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शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट: पंजाब के स्कूलों में दाखिलों में कमी, 21 तक पहुंचा शिक्षक-छात्र अनुपात
Thu, 09 Jul 2026 04:02 PM IST
Nivedita
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 09 Jul 2026 04:02 PM IST
सार
पंजाब में हर 21 विद्यार्थी के लिए 1 शिक्षक उपलब्ध है। नई शिक्षा नीति की सिफारिशों के अनुसार हर 30 विद्यार्थियों के लिए 1 शिक्षक होना चाहिए और इस हिसाब से सूबे की स्थिति काफी बेहतर है।
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- फोटो : freepik
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विस्तार
पंजाब के स्कूलों में पिछले साल के मुकाबले दाखिला में कमी आई है लेकिन शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार देखने को मिला है जो राष्ट्रीय स्तर से बेहतर है। सूबे में 1759 स्कूल एक शिक्षक के साथ चल रहे हैं जबकि 19 स्कूलों में किसी भी विद्यार्थी ने दाखिला नहीं लिया। शिक्षा मंत्रालय की यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफार्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 के दौरान 27,281 स्कूलों में 59,08,507 बच्चों ने दाखिला लिया था लेकिन वर्ष 2025-26 के दौरान 27,233 में 59,04,359 बच्चों ने दाखिला लिया है। इस तरह पिछले साल के मुकाबले दाखिला में कमी आई है। इसी तरह शिक्षक-छात्र अनुपात की बात करें तो सूबे में 22 से कम होकर 21 हो गया है जिससे इसमें सुधार हुआ है। यहां तक कि यह राष्ट्रीय स्तर 24 से भी कम है।
इस तरह पंजाब में हर 21 विद्यार्थी के लिए 1 शिक्षक उपलब्ध है। नई शिक्षा नीति की सिफारिशों के अनुसार हर 30 विद्यार्थियों के लिए 1 शिक्षक होना चाहिए और इस हिसाब से सूबे की स्थिति काफी बेहतर है। जिन 19 स्कूलों में कोई दाखिला नहीं आया वहां 53 शिक्षक तैनात हैं। इन स्कूलों में सरकार की तरफ से आसपास के बच्चों को दाखिला लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा के बिना न रहे। इसी तरह एक शिक्षक वाले 1749 स्कूलों में 51,693 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
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इन सुविधाओं की कमी
प्रदेश में कुल 27,233 स्कूल हैं जिनमें से 26,865 स्कूलों में लाइब्रेरी बुक बैंक और रीडिंग कॉर्नर है लेकिन 368 स्कूलों में यह सुविधा नहीं है। इसी तरह 1177 स्कूल बिना खेल मैदान के चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त सिर्फ 1452 स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी है। हालांकि सरकार लगातार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर दे रही है। 20,538 स्कूलों में किचन गार्डन चल रहे हैं। 26,888 स्कूलों में लड़कियों का शौचालय हैं जिसमें से 26,757 कार्यशील हैं। वहीं 26,515 स्कूलों में लड़कों का शौचालय बना हुआ है लेकिन इनमें से 26,348 कार्यशील हैं। सरकार की तरफ से 26,980 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा प्रदान की गई है जबकि 24,909 स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा है।
प्रदेश में डॉप आउट रेट में भी आई कमी
प्रदेश के स्कूलों में ड्रॉप आउट रेट में भी कमी आई है। वर्ष 2024-25 के दौरान नौंवी और दसवीं में ड्रॉप आउट रेट 5.30 प्रतिशत था जो वर्ष 2025-26 में कम होकर 4.8 हो गया है। इसी तरह सेकेंडरी कक्षाओं में राष्ट्रीय स्तर पर डॉप आउट रेट 7% है और इस हिसाब से भी प्रदेश अच्छी स्थिति में है। इसी तरह छठी से आठवीं तक ड्रॉप आउट रेट 2.70% था जो अब कम होकर 1.8% हो गया है। इसके अलावा प्राथमिक कक्षाओं में ड्रॉप आउट रेट 2.50% था जिसमें अब भारी गिरावट दर्ज की गई है और यह कम होकर मात्र 0.8% हो गया है।
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रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 के दौरान 27,281 स्कूलों में 59,08,507 बच्चों ने दाखिला लिया था लेकिन वर्ष 2025-26 के दौरान 27,233 में 59,04,359 बच्चों ने दाखिला लिया है। इस तरह पिछले साल के मुकाबले दाखिला में कमी आई है। इसी तरह शिक्षक-छात्र अनुपात की बात करें तो सूबे में 22 से कम होकर 21 हो गया है जिससे इसमें सुधार हुआ है। यहां तक कि यह राष्ट्रीय स्तर 24 से भी कम है।
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इस तरह पंजाब में हर 21 विद्यार्थी के लिए 1 शिक्षक उपलब्ध है। नई शिक्षा नीति की सिफारिशों के अनुसार हर 30 विद्यार्थियों के लिए 1 शिक्षक होना चाहिए और इस हिसाब से सूबे की स्थिति काफी बेहतर है। जिन 19 स्कूलों में कोई दाखिला नहीं आया वहां 53 शिक्षक तैनात हैं। इन स्कूलों में सरकार की तरफ से आसपास के बच्चों को दाखिला लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा के बिना न रहे। इसी तरह एक शिक्षक वाले 1749 स्कूलों में 51,693 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
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इन सुविधाओं की कमी
प्रदेश में कुल 27,233 स्कूल हैं जिनमें से 26,865 स्कूलों में लाइब्रेरी बुक बैंक और रीडिंग कॉर्नर है लेकिन 368 स्कूलों में यह सुविधा नहीं है। इसी तरह 1177 स्कूल बिना खेल मैदान के चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त सिर्फ 1452 स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी है। हालांकि सरकार लगातार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर दे रही है। 20,538 स्कूलों में किचन गार्डन चल रहे हैं। 26,888 स्कूलों में लड़कियों का शौचालय हैं जिसमें से 26,757 कार्यशील हैं। वहीं 26,515 स्कूलों में लड़कों का शौचालय बना हुआ है लेकिन इनमें से 26,348 कार्यशील हैं। सरकार की तरफ से 26,980 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा प्रदान की गई है जबकि 24,909 स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा है।
प्रदेश में डॉप आउट रेट में भी आई कमी
प्रदेश के स्कूलों में ड्रॉप आउट रेट में भी कमी आई है। वर्ष 2024-25 के दौरान नौंवी और दसवीं में ड्रॉप आउट रेट 5.30 प्रतिशत था जो वर्ष 2025-26 में कम होकर 4.8 हो गया है। इसी तरह सेकेंडरी कक्षाओं में राष्ट्रीय स्तर पर डॉप आउट रेट 7% है और इस हिसाब से भी प्रदेश अच्छी स्थिति में है। इसी तरह छठी से आठवीं तक ड्रॉप आउट रेट 2.70% था जो अब कम होकर 1.8% हो गया है। इसके अलावा प्राथमिक कक्षाओं में ड्रॉप आउट रेट 2.50% था जिसमें अब भारी गिरावट दर्ज की गई है और यह कम होकर मात्र 0.8% हो गया है।