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डेजर्ट टाइगर्स के घातक तेवर:ऑपरेशन सिंदूर में घुसपैठ नहीं कर पाया था पाकिस्तान, कारगिल युद्ध में भी अहम भूमिका

मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Thu, 26 Feb 2026 07:02 AM IST
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सार

मई 2025 में जब ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया गया था तो इस दौरान डेजर्ट टाइगर्स ने न केवल पाकिस्तान वायुसेना की घुसपैठ व हमले की कोशिशों को नाकाम किया था बल्कि दुश्मन के जंगी जहाजों को भी निशाना बनाया था।

Pakistan unable to infiltrate during Operation Sindoor because of  Desert Tigers 220 Squadron
भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन 220 के अधीन हलवारा एयरफोर्स स्टेशन पर खड़ा जंगी जहाज सुखोई। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हमेशा चौकन्ना, हमेशा तैयार और हमेशा विजयी... पिछले छह दशक से भारतीय वायुसेना की इसी उच्च परंपरा को कायम रखने वाली 220 स्क्वाड्रन आज भी अपने घातक तेवरों के साथ सरहदों की सुरक्षा के लिए डटी हुई है। इस स्क्वाड्रन को डेजर्ट टाइगर्स के नाम से भी जाना जाता है। साल 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक इस स्क्वाड्रन की अहम भूमिका रही।

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मई 2025 में जब ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया गया था तो इस दौरान डेजर्ट टाइगर्स ने न केवल पाकिस्तान वायुसेना की घुसपैठ व हमले की कोशिशों को नाकाम किया था बल्कि दुश्मन के जंगी जहाजों को भी निशाना बनाया था। वायुसेना के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ड्रोन हमलों के साथ-साथ अपने जंगी जहाजों से भारत के सैन्य अड्डों व सिविल इलाकों को निशाना बनाना चाहता था मगर भारतीय वायुसेना ने उसके नापाक मंसूबों को सफल नहीं होने दिया और इस अभियान में इस स्क्वाड्रन ने बड़ी भूमिका निभाई थी। यह स्क्वाड्रन अपने घातक तेवरों के लिए जानी जाती है।
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इस साल डेजर्ट टाइगर अपनी डायमंड जुबली मना रहा है। साल 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध से पहले इस स्क्वाड्रन को गठित किया गया था। उस वक्त इस स्क्वाड्रन ने भारतीय वायुसेना के नए पायलटों के लिए डी. हॉविलैंड वैम्पायर विमानों के परिचालन में ऑपरेशन बदलाव किया था। यह स्क्वाड्रन एयरफोर्स स्टेशन पालम में तैनात थी और साल 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान स्क्वाड्रन को वैम्पायर विमानों के साथ ही छम्ब सेक्टर में हमला करने के लिए तैनात किया गया था।

उधर, वेस्टर्न एयर कमांड के सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर एयर मार्शल जेएस मान और ईस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया ने डेजर्ट टाइगर्स की डायमंड जुबली पर शुभकामनाएं व्यक्त कर स्क्वाड्रन के पराक्रम को याद किया।

देसी मारुत से सुखोई तक सफर
वैम्पायर के बाद साल 1969 में पहले देसी जंगी जहाज एचएफ-24 मारुत का बेड़ा भी इसी स्क्वाड्रन को मिला था। मारुत को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाया गया था जबकि इसे जर्मन एयरोनॉटिकल इंजीनियर ने डिजाइन किया था। 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान इस डेजर्ट टाइगर्स ने पश्चिमी मोर्च पर आर्मी की मदद करते हुए ग्राउंड अटैक मिशन के तहत क्लोज एयर सपोर्ट किया था। इस युद्ध में इस स्क्वाड्रन ने मारुत को उड़ाया था। जून 1981 में डेजर्ट टाइगर्स को मिग-23 बाइसन का बेड़ा मिला और इसे जोधपुर में तैनात किया गया। साल 1997 में इस स्क्वाड्रन को खतरनाक जंगी जहाज सुखोई-30 एमकेआई से लैस कर पंजाब के हलवारा एयरफोर्स स्टेशन में स्थानांतरित कर दिया गया।

कारगिल में अहम मिशन किए थे पूरे
डेजर्ट टाइगर्स को कारगिल युद्ध के दाैरान कई अहम मिशन दिए गए थे, जिसे स्क्वाड्रन ने बखूबी निभाए थे। कारगिल वाॅर इतिहास में सबसे मुश्किल युद्धों में से है। इस दौरान चलाए गए ऑपरेशन सफेद सागर में भी डेजर्ट टाइगर्स ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई थी। यह भारतीय वायुसेना व भारतीय सेना का संयुक्त अभियान था। इस ऑपरेशन के दौरान एलओसी से ऊपर पाकिस्तान के कब्जे वाली भारतीय पोस्टों से पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ा गया था।

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