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मोगा में युद्ध नशेयां विरुद्ध-2 रैली: मंच पर डीजीपी-चीफ सेक्रेटरी की मौजूदगी पर बवाल, विपक्ष ने उठाए सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 17 Feb 2026 12:18 PM IST
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सार
पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी इसे नौकरशाही के राजनीतिकरण का उदाहरण बताया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि क्या देश का स्टील फ्रेम अब राजनीतिक दबाव के आगे झुक रहा है?
मोगा में मंच से संबोधित करते डीजीपी और मुख्य सचिव
- फोटो : X @SukhpalKhaira
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विस्तार
मोगा में आप सरकार के युद्ध नशेयां विरुद्ध-2 अभियान के तहत आयोजित जनसभा में डीजीपी और मुख्य सचिव की मंच से मौजूदगी और संबोधन को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है।
विपक्षी दलों ने इसे सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का मामला बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है।
शिरोमणि अकाली दल के प्रदेश महासचिव गुरप्रीत सिंह रालू खन्ना ने सवाल उठाया कि यदि यह राजनीतिक रैली थी तो डीजीपी और मुख्य सचिव जैसे वरिष्ठ अधिकारी मंच से संबोधित क्यों कर रहे थे? और यदि यह सरकारी कार्यक्रम था तो फिर राजनीतिक नेता जैसे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया मंच पर क्यों मौजूद थे? उन्होंने आशंका जताई कि कहीं सरकारी संसाधनों और करदाताओं के धन का उपयोग पार्टी हित में तो नहीं किया जा रहा।
पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी इसे नौकरशाही के राजनीतिकरण का उदाहरण बताया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि क्या देश का स्टील फ्रेम अब राजनीतिक दबाव के आगे झुक रहा है? उन्होंने इसे ऑल इंडिया सर्विस नियमों के उल्लंघन की आशंका बताया।
ऑल इंडिया कांग्रेस किसान सैल के अध्यक्ष व विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि डीजीपी और मुख्य सचिव जैसे प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों से निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है, लेकिन इस आयोजन में उनकी उपस्थिति से पद की गरिमा प्रभावित हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार से दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि आप ने अपने राजनीतिक हित साधने के लिए सरकारी तंत्र को रैली में झोंक दिया। वहीं, सत्तापक्ष की ओर से अब तक इस विवाद पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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विपक्षी दलों ने इसे सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का मामला बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है।
शिरोमणि अकाली दल के प्रदेश महासचिव गुरप्रीत सिंह रालू खन्ना ने सवाल उठाया कि यदि यह राजनीतिक रैली थी तो डीजीपी और मुख्य सचिव जैसे वरिष्ठ अधिकारी मंच से संबोधित क्यों कर रहे थे? और यदि यह सरकारी कार्यक्रम था तो फिर राजनीतिक नेता जैसे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया मंच पर क्यों मौजूद थे? उन्होंने आशंका जताई कि कहीं सरकारी संसाधनों और करदाताओं के धन का उपयोग पार्टी हित में तो नहीं किया जा रहा।
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पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी इसे नौकरशाही के राजनीतिकरण का उदाहरण बताया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि क्या देश का स्टील फ्रेम अब राजनीतिक दबाव के आगे झुक रहा है? उन्होंने इसे ऑल इंडिया सर्विस नियमों के उल्लंघन की आशंका बताया।
ऑल इंडिया कांग्रेस किसान सैल के अध्यक्ष व विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि डीजीपी और मुख्य सचिव जैसे प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों से निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है, लेकिन इस आयोजन में उनकी उपस्थिति से पद की गरिमा प्रभावित हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार से दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि आप ने अपने राजनीतिक हित साधने के लिए सरकारी तंत्र को रैली में झोंक दिया। वहीं, सत्तापक्ष की ओर से अब तक इस विवाद पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।