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सवालों के घेरे में माका ट्राफी: गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने की शिकायत, अंतिम समय में नियम बदलने का आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 14 Jan 2026 01:11 PM IST
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सार
करीब 65 साल से माका ट्रॉफी पूरे साल के खेल प्रदर्शन पर दी जाती रही है। इसमें इंटरनेशनल टूर्नामेंट, एआईयू चैंपियनशिप और अलग-अलग खेलों में निरंतर प्रदर्शन को महत्व मिलता था। लेकिन 2023–24 के सत्र में, खेल सत्र खत्म होने के बाद अचानक नियम बदल दिए गए।
Guru Nanak Dev University
- फोटो : Youtube- Guru Nanak Dev University, Amritsar
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विस्तार
देश के यूनिवर्सिटी खेलों की सबसे प्रतिष्ठित मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ट्रॉफी और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स इस समय गंभीर सवालों के घेरे में हैं। आरोप हैं कि हाल के नियम बदलावों ने खेलों की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाया है और पंजाब सहित देश की सरकारी यूनिवर्सिटी को पीछे धकेल दिया है, जबकि बीजेपी नेता की एक निजी यूनिवर्सिटी को फायदा मिला है।
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पिछले साल भी इसी बीजेपी नेता की यूनिवर्सिटी को फायदा पहुंचाने के लिए अंतिम समय पर नियमों में बदलाव किया गया था। नियमों में बदलाव से पहले इस प्राइवेट यूनिवर्सिटी के सिर्फ तीन मेडल आते थे। पिछले सेशन के दौरान इस यूनिवर्सिटी के मेडल तीन से बढ़कर 32 हो गए थे। जो मौजूदा सेशन में बढ़कर 42 हो गए। इसी बात को लेकर पंजाब में विवाद छिड़ गया है।
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करीब 65 साल से माका ट्रॉफी पूरे साल के खेल प्रदर्शन पर दी जाती रही है। इसमें इंटरनेशनल टूर्नामेंट, एआईयू चैंपियनशिप और अलग-अलग खेलों में निरंतर प्रदर्शन को महत्व मिलता था। लेकिन 2023–24 के सत्र में, खेल सत्र खत्म होने के बाद अचानक नियम बदल दिए गए। पहले जहां केआईयूजी का वेटेज सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत था, उसे पीछे की तारीख से लगभग 100 प्रतिशत कर दिया गया। इसका मतलब यह हुआ कि पूरे साल का प्रदर्शन, अंतरराष्ट्रीय मुकाबले और एआईयू प्रतियोगिताएं लगभग बेअसर हो गईं। इस बदलाव का सीधा फायदा उसी यूनिवर्सिटी को मिला, जिसने केआईयूजी में ज्यादा गोल्ड मेडल जीते थे।
2024–25 में कैनोइंग और कयाकिंग जैसे खेलों को अचानक खेलों इंडिया गेम्स में शामिल कर लिया गया। ये फैसले भी खेल सत्र के बीच या बाद में लिए गए, जब अधिकतर यूनिवर्सिटी अपनी योजना और बजट पहले ही तय कर चुकी थीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहां इन खेलों के करीब 10 मान्य ओलंपिक इवेंट्स हैं, वहीं केआईयूजी में इन्हें बढ़ाकर लगभग 30 इवेंट्स कर दिया गया, जिनमें कई नॉन-ओलंपिक कैटेगरी भी शामिल थीं। ये ऐसे खेल हैं जो न पंजाब की यूनिवर्सिटी में आम तौर पर खेले जाते हैं और न ही देश की अधिकतर पब्लिक यूनिवर्सिटी में। ये खेल महंगे हैं, इनके लिए खास इंफ्रास्ट्रक्चर और ज्यादा पैसा चाहिए, जो विदेशी संस्थानों के पास ही होता है।
आरोप है कि नियमों में यह फेरबदल जानबूझकर किया गया ताकि एक ऐसी यूनिवर्सिटी को फायदा मिल सके, जिसका सीधा संबंध बीजेपी से जुड़े एक नेता से बताया जा रहा है। इन्हीं खेलों में असामान्य रूप से ज्यादा इवेंट्स कराए गए, जिससे मेडल जीतने के मौके भी कई गुना बढ़ गए। इससे मेडल टेबल का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। पंजाब की यूनिवर्सिटी मुकाबले से बाहर होती चली गईं।
खिलाड़ियों की एंट्री पर भी सवाल उठा है। आरोप है कि कुछ खिलाड़ियों को तय समय सीमा के बाद भी खेलने दिया गया, जबकि उनकी एंट्री आधिकारिक सूची में मंजूर नहीं थी। नियमों के अनुसार ऐसा नहीं होना चाहिए था, फिर भी इन खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और मेडल भी जीते। इससे पूरे आयोजन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने इन बदलावों को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कर युवा मामले एवं खेल मंत्रालय और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जांच की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि अगर ऐसे नियमों के तहत प्रतियोगिताएं कराई जाती रहीं, तो खेलों की ईमानदारी और माका ट्रॉफी जैसी राष्ट्रीय पहचान की गरिमा दोनों को नुकसान पहुंचेगा।