जगरांव में रोष मार्च: नशे से जान गंवाने वालों के परिजनों ने युद्ध नशे के विरुद्ध मुहिम पर उठाए सवाल
परिजनों का कहना है कि नशे की ओवरडोज से होने वाली मौतों को पुलिस कई मामलों में हार्ट अटैक बताकर मामला दबा देती है। जब वे आवाज उठाने की कोशिश करते हैं तो पुलिस अधिकारी उनके घर पहुंचकर उन्हें परिवार के भविष्य का हवाला देकर चुप रहने के लिए दबाव बनाते हैं।
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पंजाब में नशे की बढ़ती समस्या को लेकर सोमवार को पेंडू मजदूर यूनियन की अगुवाई में उन परिवारों ने रोष मार्च निकाला, जिन्होंने नशे की ओवरडोज के कारण अपने बच्चों को खो दिया है।
प्रदर्शनकारी परिवारों ने बस स्टैंड परिसर में एकत्र होकर सरकार की “युद्ध नशे के विरुद्ध” मुहिम पर सवाल उठाए। परिजनों का कहना है कि नशे की ओवरडोज से होने वाली मौतों को पुलिस कई मामलों में हार्ट अटैक बताकर मामला दबा देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे आवाज उठाने की कोशिश करते हैं तो पुलिस अधिकारी उनके घर पहुंचकर उन्हें सामाजिक बदनामी, डर और परिवार के भविष्य का हवाला देकर चुप रहने के लिए दबाव बनाते हैं।
तस्करों पर कार्रवाई करने के बजाय कई बार पीड़ित युवकों पर ही केस दर्ज कर दिए जाते हैं। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं और परिजनों ने अपने मृतकों की तस्वीरें हाथों में लेकर न्याय की मांग की।
पेंडू मजदूर यूनियन के नेताओं ने मांग की कि नशे से मौत के मामलों की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों और कथित मिलीभगत में शामिल लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रदर्शनकारियों ने 15 के करीब नशे से हुई मौतों का हवाला देते हुए प्रत्येक पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी रखी। इसके अलावा रोजगार, बच्चों की शिक्षा, विधवाओं के लिए पेंशन, और विशेष सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भी मांग की गई।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि नशा प्रभावित इलाकों में तैनात अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, नशा तस्करी पर सख्त कार्रवाई हो, और नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाकर उनमें बेहतर उपचार व काउंसलिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
परिजनों का दर्द छलका
जगरांव बस स्टैंड के अंदर 14 मृतकों के परिवारों ने सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा और पीड़ा खुलकर जाहिर की। रानी वाला खूह इलाके में रहने वाली एक मासूम बच्ची अपने दिवंगत पिता की तस्वीर सीने से लगाए लगातार रोती रही। मृतक शरणजीत सिंह की पत्नी ने बताया कि उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। उनका पति चिट्टे की लत में फंस गया था। पुलिस ने उसे पकड़कर जेल भेजा था, लेकिन वहीं उसकी मौत हो गई। अब घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा। बुजुर्ग ससुर दिहाड़ी मजदूरी कर जैसे-तैसे परिवार का पेट पाल रहे हैं, लेकिन जिंदगी हर दिन और मुश्किल होती जा रही है।
वहीं गुरमीत सिंह ने बताया कि उनके दोनों बेटे नशे की दलदल में फंसकर मौत के मुंह में चले गए। अब वह अकेले बुढ़ापे में किसी तरह गुरुद्वारे से लंगर खाकर अपना जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
माई जीना क्षेत्र की रहने वाली मनजीत कौर ने बताया कि उनके बेटे की मौत भी चिट्टे के सेवन से हुई। उन्होंने कहा कि उनके इलाके में खुलेआम नशा बिकता रहा, और जब भी उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की तो उन्हें डराया-धमकाया गया।