हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पंजाब में फार्मासिस्ट भर्ती प्रक्रिया पर रोक, बीजेपी सांसद ने आप पर बोला हमला
याचिका में कथित तौर पर संगठित, उच्च तकनीक से लैस और अंतरराज्यीय नकल गिरोह के प्रभाव में परीक्षा होने की बात कही गई है जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज की ओर से 454 फार्मासिस्ट (फार्मेसी ऑफिसर) पदों पर की जा रही भर्ती प्रक्रिया पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। जस्टिस संदीप मौदगिल ने केशव कंबोज व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि 11 जून 2026 के विज्ञापन के तहत इन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया अगली सुनवाई तक आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में 19 जुलाई 2026 को आयोजित लिखित परीक्षा को रद्द करने की मांग की है। उनका आरोप है कि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से नहीं हुई। याचिका में कथित तौर पर संगठित, उच्च तकनीक से लैस और अंतरराज्यीय नकल गिरोह के प्रभाव में परीक्षा होने की बात कही गई है। याचिकाकर्ताओं ने इसी आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की है।
उनका कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होने के कारण इसके आधार पर आगे नियुक्तियां करना उचित नहीं होगा। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि प्रतिवादी पक्ष की ओर से कोई जवाब दाखिल किया जाना है तो उसे अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले दाखिल किया जाए। साथ ही जवाब की अग्रिम प्रति विपक्षी पक्ष के अधिवक्ता को भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
कोर्ट को सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि याचिका लंबित होने के कारण भर्ती प्रक्रिया पहले ही प्रभावित हो चुकी है। अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद 454 पदों की भर्ती पर औपचारिक रूप से भी रोक बनी रहेगी। मामले में 17 सितंबर को होने वाली सुनवाई में सरकार का जवाब आने के बाद भर्ती और 19 जुलाई की परीक्षा की वैधता से जुड़े मुद्दों पर आगे विचार होगा।
बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने आप पर बोला हमला
बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला दिया है। पिछले महीने पंजाब में फार्मेसी ऑफिसरों की भर्ती के लिए जुलाई 2026 में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी द्वारा करवाई गई परीक्षाओं में पेपर लीक होने के आरोप लगे थे। आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार ने दावा किया था कि ये महज अनियमितताएं हैं और जिन्होंने गड़बड़ी की थी, उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है लेकिन एक याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और आज पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के खिलाफ बहुत कड़ी टिप्पणियां कीं और पूछा कि आखिर इस परीक्षा को रोका क्यों नहीं गया? फिलहाल हाईकोर्ट ने एग्जाम प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। इससे साफ पता चलता है कि पंजाब सरकार जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही थी और झूठ परोस रही है। जब पेपर लीक हुआ तो पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बार-बार कहा था कि कोई पेपर लीक नहीं हुआ। इससे साफ है कि चाहे कांग्रेस पार्टी हो या आम आदमी पार्टी, दोनों के दोहरे मापदंड हैं।
#WATCH | Delhi: BJP MP Sambit Patra says, "A few hours ago, the Punjab and Haryana High Court gave a very important decision. Last month, the exams for the recruitment of pharmacy officers in Punjab, which were conducted in July 2026 by Farid University (BFUHS), faced allegations… pic.twitter.com/1IgO7ExFAY
— ANI (@ANI) August 12, 2026