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इस बार न बरबाद करे बाढ़: पंजाब में अभी से तैयारियां शुरू, 132 बाढ़ संभावित क्षेत्रों में तटबंध होंगे मजबूत
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 15 Jun 2026 04:53 PM IST
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सार
बाढ़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए पंजाब के अधिकारी हाल ही में असम, केरल और जम्मू-कश्मीर का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर चुके हैं। इन राज्यों की सफल परियोजनाओं और तकनीकों को पंजाब में भी लागू किया जा रहा है।
फिरोजपुर के गांव टेंडी वाला के हालात
- फोटो : संवाद
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विस्तार
पिछले साल आई भीषण बाढ़ से सबक लेते हुए पंजाब सरकार इस बार बचाव कार्यों में युद्ध स्तर पर जुटी है। सरकार का मानना है कि तटबंधों को और मजबूत किए बिना बाढ़ के खतरे को कम नहीं किया जा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए 600 करोड़ रुपये का एक्शन प्लान लागू किया गया है।
राज्य के 132 बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां मानसून से पहले तेजी से काम कराया जा रहा है। अधिकारियों को 30 जून तक सभी जरूरी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं।
पिछले वर्ष पहाड़ी क्षेत्रों से नदियों और बांधों में भारी मात्रा में पानी आने के कारण कई स्थानों पर ओवरफ्लो की स्थिति बन गई थी। नदियां, नाले और बांध अतिरिक्त पानी का दबाव नहीं झेल पाए और पंजाब को अब तक की सबसे भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ा।
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बाढ़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए पंजाब के अधिकारी हाल ही में असम, केरल और जम्मू-कश्मीर का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर चुके हैं। इन राज्यों की सफल परियोजनाओं और तकनीकों को पंजाब में भी लागू किया जा रहा है। राज्य में रावी, ब्यास, सतलुज और घग्गर समेत 1145 नहरों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
सरकार ने अल्पकालिक उपायों के साथ 10 वर्षीय कार्ययोजना भी तैयार की है। पिछले साल भाखड़ा और पौंग बांधों में रिकॉर्ड जलस्तर के कारण बार-बार गेट खोलने पड़े थे। इस बार बांधों में जल प्रबंधन पहले से बेहतर रखने और अतिरिक्त पानी का उपयोग सिंचाई में करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि मानसून के दौरान संभावित खतरे को कम किया जा सके।
राज्य के 132 बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां मानसून से पहले तेजी से काम कराया जा रहा है। अधिकारियों को 30 जून तक सभी जरूरी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं।
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पिछले वर्ष पहाड़ी क्षेत्रों से नदियों और बांधों में भारी मात्रा में पानी आने के कारण कई स्थानों पर ओवरफ्लो की स्थिति बन गई थी। नदियां, नाले और बांध अतिरिक्त पानी का दबाव नहीं झेल पाए और पंजाब को अब तक की सबसे भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ा।
बाढ़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए पंजाब के अधिकारी हाल ही में असम, केरल और जम्मू-कश्मीर का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर चुके हैं। इन राज्यों की सफल परियोजनाओं और तकनीकों को पंजाब में भी लागू किया जा रहा है। राज्य में रावी, ब्यास, सतलुज और घग्गर समेत 1145 नहरों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
सरकार ने अल्पकालिक उपायों के साथ 10 वर्षीय कार्ययोजना भी तैयार की है। पिछले साल भाखड़ा और पौंग बांधों में रिकॉर्ड जलस्तर के कारण बार-बार गेट खोलने पड़े थे। इस बार बांधों में जल प्रबंधन पहले से बेहतर रखने और अतिरिक्त पानी का उपयोग सिंचाई में करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि मानसून के दौरान संभावित खतरे को कम किया जा सके।
पिछले साल बाढ़ ने मचाई थी भारी तबाही
अगस्त 2025 में आई बाढ़ ने पंजाब के बड़े हिस्से को प्रभावित किया था। करीब पांच लाख एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई और 2,472 गांव इसकी चपेट में आए। लगभग 3.89 लाख लोग प्रभावित हुए जबकि 56 लोगों की जान चली गई। बाढ़ में 3,200 सरकारी स्कूल, 19 कॉलेज और 1,400 से अधिक स्वास्थ्य संस्थान क्षतिग्रस्त हुए। इसके अलावा 8,500 किलोमीटर सड़कें और 2,500 पुलों को नुकसान पहुंचा। राज्य सरकार ने शुरुआती नुकसान 13,800 करोड़ रुपये आंका था।मानसून से पहले हाई अलर्ट, जिलों में तेज हुई तैयारियां
पंजाब में मानसून की दस्तक से पहले बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बठिंडा नगर निगम ने शहर को जलभराव और सीवर ओवरफ्लो से बचाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। नगर निगम क्षेत्र में 57 किलोमीटर मुख्य और 853 किलोमीटर शाखा सीवर लाइन का नेटवर्क है। इनमें 55 किलोमीटर क्षेत्र को हॉटस्पॉट चिह्नित किया गया है। अब तक 21.8 किलोमीटर सीवर लाइन की डी-सिल्टिंग पूरी की जा चुकी है।
फाजिल्का में पिछले वर्ष सतलुज नदी में जलस्तर बढ़ने से आई भीषण बाढ़ के बाद प्रशासन सतर्क है। नदियों, नालों और ड्रेनों की सफाई के साथ तटबंधों की मरम्मत कराई जा रही है।
लुधियाना में 15 जून से 30 सितंबर तक 24 घंटे जिला कंट्रोल रूम संचालित करने का फैसला लिया गया है। यहां चौबीसों घंटे कर्मचारी तैनात रहेंगे। साथ ही बुड्ढा दरिया के किनारों को मजबूत करने और आवश्यक स्थानों पर बांध लगाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
नो कंस्ट्रक्शन जोन हो घोषित, नदियों से हटे अतिक्रमण
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के पूर्व सचिव सतीश सिंगला का कहना है कि पंजाब में बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2019 और 2023 के बाद पिछले साल भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। उनका सुझाव है कि नदियों के किनारे नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया जाए और नदी-नालों से अतिक्रमण हटाया जाए। उन्होंने कहा कि नदियों के आसपास खेती की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन किसी भी प्रकार के निर्माण पर पूरी तरह रोक होनी चाहिए। साथ ही धुस्सी बांध और ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत बनाना भी जरूरी है।
फिरोजपुर में बाढ़ सुरक्षा कार्य अधूरे
फिरोजपुर में पिछले साल की बाढ़ के बाद सतलुज दरिया में जमा गाद और रेत की सफाई अब तक नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ सकता है। हुसैनीवाला बॉर्डर से सटे गांव गट्टी राजोके और जेसीपी हुसैनीवाला की सुरक्षा के लिए बनाए गए अस्थायी बांध की भी मरम्मत नहीं हुई। वहीं तीन तरफ से दरिया से घिरे टापू कालूवाला और कमजोर धुस्सी बांध को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
अमृतसर: धुस्सी बांध को मजबूत करने में जुटा प्रशासन
पिछले वर्ष आई बाढ़ ने पंजाब के सीमावर्ती जिलों खासकर अमृतसर में भारी तबाही मचाई थी। इस बार प्रशासन ने बाढ़ से बचाव के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। अमृतसर के डीसी दलविंदरजीत सिंह के अनुसार रावी नदी के किनारे स्थित धुस्सी बांध के टूटे हिस्सों की मरम्मत कर दी गई है। शाहपुर सीमा चौकी के पास तटबंधों को मजबूत करने पर करीब चार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
रावी नदी और सक्की नाले की बड़े स्तर पर डी-सिल्टिंग कर गाद निकाली गई है। झब्बाज नहर के सुदृढ़ीकरण और लाइनिंग का कार्य भी पूरा किया गया है। सरकार के अनुसार रावी नदी किनारे 23 कटाव स्थलों की मरम्मत कर उन्हें पत्थरों से मजबूत बनाया गया है।
पठानकोट: 10 माह बाद भी नहीं बना स्थायी धुस्सी बांध
पठानकोट में अगस्त 2025 में सीमावर्ती क्षेत्र कोलियां अड्डा में आई बाढ़ के जख्म आज भी नहीं भरे हैं। बाढ़ की तबाही के करीब 10 माह बाद भी प्रशासन लोगों की सुरक्षा के लिए स्थायी धुस्सी बांध नहीं बना पाया है। क्षेत्र में टूटी दुकानें, क्षतिग्रस्त घर और बाढ़ के निशान अब भी दिखाई देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछली बार कोलियां अड्डा सबसे अधिक प्रभावित हुआ था, लेकिन सुरक्षा के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बाढ़ पीड़ित धर्मपाल ने बताया कि उनके घर को करीब 25 लाख रुपये का नुकसान हुआ था।
पटियाला में बड़ी नदी की सफाई अब भी अधूरी
पंजाब में मानसून की दस्तक से पहले भी पटियाला की बड़ी नदी की सफाई का काम पूरा नहीं हो सका है। नदी इस समय बूटी और गाद से भरी हुई है जिससे तेज बारिश के दौरान पानी की निकासी प्रभावित होने और आसपास के रिहायशी इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
मौसम विभाग के अनुसार अनुकूल परिस्थितियां बनी रहीं तो 20 से 25 जून के बीच मानसून पंजाब में प्रवेश कर सकता है। ऐसे में बड़ी नदी की सफाई में देरी चिंता का विषय बनी हुई है। वर्ष 2023 की बाढ़ के दौरान गोबिंद बाग, दीप नगर, न्यू फ्रेंड्स एनक्लेव, कोहिनूर एनक्लेव, गोपाल कॉलोनी और अर्बन एस्टेट समेत कई इलाकों में घरों के भीतर छह से सात फुट तक पानी भर गया था।
हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने डीसी, ड्रेनेज और अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर बड़ी नदी की सफाई और बांधों को मजबूत करने के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। ड्रेनेज विभाग के एक्सईएन आकाश अग्रवाल ने बताया कि बड़ी और छोटी नदी की सफाई 30 जून तक पूरी कर दी जाएगी। जरूरत के अनुसार नदी के बांधों को भी मजबूत किया जाएगा।
30 जून तक सभी कार्य पूरे करने के निर्देश
पंजाब सरकार बाढ़ से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके लिए राज्यभर में एक्शन प्लान लागू किया गया है और अधिकारियों को 30 जून तक सभी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ संभावित 132 स्थलों की पहचान कर वहां युद्ध स्तर पर काम कराया जा रहा है। सभी तटबंधों को मजबूत किया जा रहा है। पिछले वर्ष सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष फोकस रखा गया है ताकि इस बार नुकसान से बचा जा सके। -बरिंदर कुमार गोयल, जल संसाधन मंत्री
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के पूर्व सचिव सतीश सिंगला का कहना है कि पंजाब में बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2019 और 2023 के बाद पिछले साल भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। उनका सुझाव है कि नदियों के किनारे नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया जाए और नदी-नालों से अतिक्रमण हटाया जाए। उन्होंने कहा कि नदियों के आसपास खेती की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन किसी भी प्रकार के निर्माण पर पूरी तरह रोक होनी चाहिए। साथ ही धुस्सी बांध और ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत बनाना भी जरूरी है।
फिरोजपुर में बाढ़ सुरक्षा कार्य अधूरे
फिरोजपुर में पिछले साल की बाढ़ के बाद सतलुज दरिया में जमा गाद और रेत की सफाई अब तक नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ सकता है। हुसैनीवाला बॉर्डर से सटे गांव गट्टी राजोके और जेसीपी हुसैनीवाला की सुरक्षा के लिए बनाए गए अस्थायी बांध की भी मरम्मत नहीं हुई। वहीं तीन तरफ से दरिया से घिरे टापू कालूवाला और कमजोर धुस्सी बांध को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
अमृतसर: धुस्सी बांध को मजबूत करने में जुटा प्रशासन
पिछले वर्ष आई बाढ़ ने पंजाब के सीमावर्ती जिलों खासकर अमृतसर में भारी तबाही मचाई थी। इस बार प्रशासन ने बाढ़ से बचाव के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। अमृतसर के डीसी दलविंदरजीत सिंह के अनुसार रावी नदी के किनारे स्थित धुस्सी बांध के टूटे हिस्सों की मरम्मत कर दी गई है। शाहपुर सीमा चौकी के पास तटबंधों को मजबूत करने पर करीब चार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
रावी नदी और सक्की नाले की बड़े स्तर पर डी-सिल्टिंग कर गाद निकाली गई है। झब्बाज नहर के सुदृढ़ीकरण और लाइनिंग का कार्य भी पूरा किया गया है। सरकार के अनुसार रावी नदी किनारे 23 कटाव स्थलों की मरम्मत कर उन्हें पत्थरों से मजबूत बनाया गया है।
पठानकोट: 10 माह बाद भी नहीं बना स्थायी धुस्सी बांध
पठानकोट में अगस्त 2025 में सीमावर्ती क्षेत्र कोलियां अड्डा में आई बाढ़ के जख्म आज भी नहीं भरे हैं। बाढ़ की तबाही के करीब 10 माह बाद भी प्रशासन लोगों की सुरक्षा के लिए स्थायी धुस्सी बांध नहीं बना पाया है। क्षेत्र में टूटी दुकानें, क्षतिग्रस्त घर और बाढ़ के निशान अब भी दिखाई देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछली बार कोलियां अड्डा सबसे अधिक प्रभावित हुआ था, लेकिन सुरक्षा के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बाढ़ पीड़ित धर्मपाल ने बताया कि उनके घर को करीब 25 लाख रुपये का नुकसान हुआ था।
पटियाला में बड़ी नदी की सफाई अब भी अधूरी
पंजाब में मानसून की दस्तक से पहले भी पटियाला की बड़ी नदी की सफाई का काम पूरा नहीं हो सका है। नदी इस समय बूटी और गाद से भरी हुई है जिससे तेज बारिश के दौरान पानी की निकासी प्रभावित होने और आसपास के रिहायशी इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
मौसम विभाग के अनुसार अनुकूल परिस्थितियां बनी रहीं तो 20 से 25 जून के बीच मानसून पंजाब में प्रवेश कर सकता है। ऐसे में बड़ी नदी की सफाई में देरी चिंता का विषय बनी हुई है। वर्ष 2023 की बाढ़ के दौरान गोबिंद बाग, दीप नगर, न्यू फ्रेंड्स एनक्लेव, कोहिनूर एनक्लेव, गोपाल कॉलोनी और अर्बन एस्टेट समेत कई इलाकों में घरों के भीतर छह से सात फुट तक पानी भर गया था।
हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने डीसी, ड्रेनेज और अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर बड़ी नदी की सफाई और बांधों को मजबूत करने के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। ड्रेनेज विभाग के एक्सईएन आकाश अग्रवाल ने बताया कि बड़ी और छोटी नदी की सफाई 30 जून तक पूरी कर दी जाएगी। जरूरत के अनुसार नदी के बांधों को भी मजबूत किया जाएगा।
30 जून तक सभी कार्य पूरे करने के निर्देश
पंजाब सरकार बाढ़ से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके लिए राज्यभर में एक्शन प्लान लागू किया गया है और अधिकारियों को 30 जून तक सभी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ संभावित 132 स्थलों की पहचान कर वहां युद्ध स्तर पर काम कराया जा रहा है। सभी तटबंधों को मजबूत किया जा रहा है। पिछले वर्ष सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष फोकस रखा गया है ताकि इस बार नुकसान से बचा जा सके। -बरिंदर कुमार गोयल, जल संसाधन मंत्री