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यूं मची बड़ी सियासी हलचल: जत्थेदारों के रुख से पंजाब में पंथक सियासत के बदल सकते हैं समीकरण, CM ने नकारे आरोप

मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Sharukh Khan Updated Wed, 17 Jun 2026 12:11 PM IST
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सार

पंजाब में पंथक सियासत के समीकरण जत्थेदारों के रुख से बदल सकते हैं। पंजाब के दो बड़े नेता कथित बेअदबियों से जुड़े विवादों में घिरे हैं। ऐसे में श्री अकाल तख्त के हुक्मनामे से बड़ा असर पंथक वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।

Punjab Politics Akal Takht Row Sparks New Political Realignments in Punjab
Punjab Politics - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पंजाब की संस्कृति, सियासत और इतिहास में गहरा और निर्णायक महत्व रखने वाली सूबे की पंथक राजनीति के समीकरणों को इन दिनों जत्थेदारों का रुख प्रभावित कर रहा है। उधर, अन्य दल भी इस विवाद में अपनी-अपनी सियासत साध रहे हैं। पंजाब में जो मौजूदा राजनीतिक हालात बने हुए हैं उससे जाहिर है कि विधानसभा चुनाव से पहले पंथक सियासत के समीकरण बदल सकते हैं।


इस वक्त सूबे के मौजूदा सीएम भगवंत सिंह मान और पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल दोनों ही कथित पंथक विवादों में घिरे हुए हैं। साल 2022 में आम आदमी पार्टी ने पंजाब के बड़े पंथक वोटबैंक को अपने पाले में करते हुए सत्ता हासिल की थी। पार्टी विभिन्न मुद्दों के साथ अपने पंथक सियासत का दायरा भी बढ़ाती गई मगर अब आए श्री अकाल तख्त के हुक्मनामे ने अचानक पार्टी में हलचल पैदा कर दी है।
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पंथक वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है
राजनीतिक मामलों के जानकार हरबंस सिंह कहते हैं कि पंजाब में सिख आबादी बहुसंख्यक है और इसमें भी एक बड़ा हिस्सा धार्मिक रूप से जागरूक व पंथक प्राथमिकताओं को मानने वाला है। ऐसे में श्री अकाल तख्त के हुक्मनामे से बड़ा असर पंथक वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है। 

 

इस प्रकरण के बाद आप को अपने पंथक वोट बैंक के खिसकने की आशंका सता रही है। लिहाजा पार्टी को इस वक्त डैमेज कंट्रोल करते हुए सत्ता वापसी के लिए अपनी चुनावी रणनीति में थोड़ा बदलाव करना होगा। 
 
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शिअद सूबे की सबसे बड़ी पंथक पार्टी
सियासी मसलों के माहिर परमजीत सिंह के अनुसार शिअद सूबे की सबसे बड़ी पंथक पार्टी मानी जाती है मगर पिछले कुछ समय से पंथक वोट बैंक इस दल से दूर हुआ है। अभी भी पार्टी के मुखिया सुखबीर बादल को कथित बेअदबी के एक मामले में जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। ऐसे में शिअद को भी अपनी पुरानी पंथक पकड़ मजबूत करने के लिए संगतों का दोबारा विश्वास जीतना होगा।

उधर, इस विवाद में भाजपा और कांग्रेस दोनों अपना-अपना सियासी फायदा तलाश रहे हैं। हालांकि ये दल श्री अकाल तख्त के हुक्मनामे के बाद सीएम पर तत्काल पद छोड़ने का दबाव बनाते हुए नानक नाम लेवा संगत से श्री अकाल तख्त के संदेश का पालन करने का आह्वान कर रहे हैं। इस प्रकरण में भाजपा और कांग्रेस की निगाहें पंथक वोट बैंक के छिटकने पर टिकी हैं। दोनों दल अब पंथक मतदाताओं का अपने खेमों में करने के लिए पूरा जोर लगाएंगे।

यूं मची बड़ी सियासी हलचल
15 जून को श्री अकाल तख्त के पांच साहिबानों व संगत की मौजूदगी में एक विवादित वीडियो के संदर्भ में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के खिलाफ हुक्मनामा सामने आया। जाहिर तौर पर तख्त के इस आदेश ने सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को थोड़ा असहज किया क्योंकि हुक्मनामे में तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने नानक नाम लेवा संगतों के लिए भी एक संदेश जारी किया है और यह संदेश पंजाब के सीएम के लिए सकारात्मक नहीं है। सीएम मान ने तमाम आरोप सिरे से नकारे।

11 जून को श्री अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष व पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल को बेअदबी के एक मामले में घेरा था। उन्होंने बहिबल कलां फायरिंग मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) के समक्ष बयान देते हुए कहा था कि 2 दिसंबर 2024 को जब वे श्री अकाल तख्त के जत्थेदार थे तो सुखबीर बादल ने तख्त के सामने पांच साहिबानों व संगतों की मौजूदगी में सवालों का जवाब देते हुए बेअदबी संबंधी आरोप स्वीकार किए थे। इसके बाद उन्हें तनखाहिया (धार्मिक सजा) घोषित किया गया था।
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