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अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध विराम: निर्यातकों में जगी आस, 10 लाख टन का बासमती निर्यात पकड़ेगा रफ्तार

राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 17 Jun 2026 03:24 PM IST
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सार

बासमती निर्यातकों का कहना है कि निर्यात घटने के साथ ही परिवहन लागत भी बढ़ गई है क्योंकि उन्हें वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा था। यह मार्ग से सिर्फ ईरान ही नहीं बल्कि सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों को भी निर्यात के लिए जोड़ता है और इसके बंद होने से गुजरात और ईरान बंदरगाह पर ही माल अटका हुआ है।

US Iran Deescalation Basmati Exports of 1 Million Tonnes Set to Gain Momentum
Basmati Rice - फोटो : Istock
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विस्तार

अमेरिका ईरान में युद्ध विराम समझौते से बासमती का निर्यात रफ्तार पकड़ेगा क्योंकि पिछले साढ़े तीन माह से चल रहे युद्ध के कारण 10 लाख टन बासमती टन लटका हुआ है। 



इस कारण बासमती निर्यातक 500 करोड़ रुपये का नुकसान झेल चुके हैं लेकिन अब निर्यातकों में दोबारा पहले की तरह ही बासमती का निर्यात शुरू होने की आस जगी है।
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युद्ध शुरू होने के साथ ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य समुद्री मार्ग बंद कर दिया था जिस कारण बासमती का निर्यात प्रभावित हो रहा था। देश से हर माह पांच टन बासमती का निर्यात होता है लेकिन यह सिर्फ दो लाख टन तक ही सिमट गया था। बासमती निर्यातकों का कहना है कि निर्यात घटने के साथ ही परिवहन लागत भी बढ़ गई है क्योंकि उन्हें वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा था। यह मार्ग से सिर्फ ईरान ही नहीं बल्कि सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों को भी निर्यात के लिए जोड़ता है और इसके बंद होने से गुजरात और ईरान बंदरगाह पर ही माल अटका हुआ है।
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साथ ही कुछ माल ईरान बंदरगाह और ज्यादातर माल मिलों में पड़ा है। देश से हर साल 40 से 50 लाख टन का निर्यात होता है जिसमें से 25 प्रतिशत कुल बासमती का निर्यात ईरान को होता है जबकि 20 प्रतिशत निर्यात इराक को होता है। अकेले पंजाब की निर्यात में 30 से 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यही कारण है कि निर्यात कम होने के कारण पंजाब के निर्यातक सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

सात गुना बढ़ी परिवहन लागत, सामान्य होने में लगेगा समय : गोयल

पंजाब बासमती मिलर्स एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान बाल कृष्ण बाली ने बताया कि होर्मुज मार्ग बंद होने के कारण परिवहन लागत सात गुना बढ़ गई थी जिस कारण निर्यातकों का साढ़े तीन माह में 500 करोड़ रुपये का हो चुका है। पहले प्रति कंटेनर 400 डॉलर परिवहन लागत थी जो बढ़कर तीन हजार डॉलर तक पहुंच गई थी जिसे कम होने में फिलहाल एक माह का समय लगेगा।

एसोसिएशन के वित्त सचिव नरेश गोयल ने बताया कि दस लाख टन बासमती बीच में ही अटका हुआ है। भारी मात्रा में बासमती ईरान और गुजरात की बंदरगाह पर पड़ा है। अब युद्ध बंद होने के कारण ईरान, सऊदी अरब, इराक के लिए जितने भी लंबित ऑर्डर हैं उनका निर्यात शुरू हो जाएगा।

इन देशों में निर्यात को दिया जा रहा था बढ़ावा

ईरान के रास्ते निर्यात प्रभावित होने के कारण निर्यातक वैकल्पिक तौर पर यूरोप, अमेरिका और अफ्रीकी देशों को बासमती निर्यात करने पर बढ़ाव दे रहा था। हालांकि रोजाना सिर्फ 2 लाख टन का ही निर्यात हो पा रहा था। प्रदेश में गेहूं की खरीद का काम पूरा हो होने के बाद धान की रोपाई का काम चल रहा है। निर्यातक प्रभावित होने के कारण सूबे में स्टोरेज संकट भी बढ़ गया था। यही कारण है कि इस बार केंद्र सरकार ने मंडियों से गेहूं के सीधे उठान किया है।

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