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लग्जरी घरों के शौकीन पंजाबी: निर्माण और रेनोवेशन पर खर्च रहे लाखों रुपये, उत्तर भारत में पहले नंबर पर सूबा

राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 15 Apr 2026 01:33 PM IST
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सार

पंजाब में गांवों के मुकाबले शहरों के लोग घरों के निर्माण कार्यों पर अधिक खर्च कर रहे हैं। शहरों में औसतन हर घर के निर्माण पर वार्षिक 6.10 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि गांवों में प्रति मकान 3.87 लाख खर्च किए जा रहे हैं। 

Punjabis are fond of luxury homes millions spent on construction renovation state ranks first in North India
House Construction - फोटो : AdobeStock
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विस्तार

पंजाब के लोग लग्जरी घरों में रहने के शौकीन हैं। प्रदेश के लोग हर साल मकानों के निर्माण और रेनोवेशन पर अधिक खर्च कर रहे हैं। उत्तर भारत में यह सूबा खर्च में पहले नंबर पर है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

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रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के लोग हर साल मकानों के निर्माण और रेनोवेशन पर औसतन 4.72 लाख रुपये खर्च कर रहे हैं, जो दूसरे राज्यों के मुकाबले काफी अधिक है। अगर कुल राष्ट्रीय औसत खर्च की बात करें, तो उसमें भी प्रदेश आगे है क्योंकि राष्ट्रीय औसत व्यय सिर्फ 3.22 लाख रुपये है। हालांकि, घरों के निर्माण व्यय में केवल दो राज्य ही पंजाब से आगे हैं। पहले नंबर पर कर्नाटक और दूसरे नंबर पर तेलंगाना है। 
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कर्नाटक के लोग औसतन हर साल 6.11 लाख और तेलंगाना के लोग 5.23 लाख खर्च कर रहे हैं। प्रदेश के लोग घरों की जल्दी रेनोवेशन भी करवाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में गांवों के मुकाबले शहरों के लोग घरों के निर्माण कार्यों पर अधिक खर्च कर रहे हैं। शहरों में औसतन हर घर के निर्माण पर वार्षिक 6.10 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि गांवों में प्रति मकान 3.87 लाख खर्च किए जा रहे हैं। 

वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर गांवों में घरों के निर्माण पर लोग साल में औसतन 2.93 लाख व्यय कर रहे हैं, जबकि शहरों में 4.16 लाख खर्च कर रहे हैं। निर्माण कार्यों के लिए कच्चा माल, मजदूरी और अन्य तरह के शुल्क के आधार पर ही यह निर्माण पर किया गया कुल खर्च निकाला जाता है।

76.2 प्रतिशत राशि सिर्फ निर्माण सामग्री पर हो रही खर्च

प्रदेश में कुल राशि में से 76.2 प्रतिशत राशि सिर्फ निर्माण सामग्री पर ही खर्च होती है, जिसमें ईंटों की लागत का हिस्सा सबसे अधिक 31.5 प्रतिशत है। इसी तरह सीमेंट व उससे जुड़ी सामग्री पर 21.3%, आयरन और स्टील पर 16.5%, लकड़ी के काम पर 4.5% और प्लास्टिक उत्पाद पर 4.6% राशि खर्च होती है। इसके अलावा पेंट के काम और शौचालय से संबंधित सामान पर भी राशि खर्च होती है।

मजदूरी पर भी खर्च होता है बड़ा हिस्सा

घरों के निर्माण कार्यों पर बड़ा हिस्सा मजदूरी पर भी खर्च होता है और यह भी प्रदेश में अधिक है। पंजाब में हर साल एक मकान पर निर्माण के दौरान मजदूरी पर औसतन 1.01 लाख रुपये खर्च होता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में अधिक मजदूरी मिलती है। यही कारण है कि दूसरे राज्यों के लोग सूबे में आकर काम करते हैं। प्रदेश में औसतन चार से अधिक मजदूर एक मकान के निर्माण कार्यों में लगे हुए हैं।
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