रामलीला में बदला मेकअप का अंदाज: ग्लिटर की चमक घटी, नेचुरल लुक की मांग बढ़ी; 10 साल में खर्च 25 गुना ज्यादा
रामलीला में हर किरदार के स्वभाव और पहचान के अनुसार मेकअप किया जाता है। रावण और कुंभकरण जैसे किरदारों को तैयार करना ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में मेकअप का खर्च बढ़ रहा है।
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रामलीला देखने पहुंचने वाले दर्शकों की नजर मंच पर राम, सीता, रावण और हनुमान के किरदारों पर टिकी रहती है। हालांकि, इन किरदारों को प्रभावशाली बनाने के लिए पर्दे के पीछे होने वाली तैयारी कम ही लोगों को दिखाई देती है।
रावण की घनी मूंछें, कुंभकरण का भारी-भरकम चेहरा और राम का सौम्य रूप, हर किरदार की पहचान उसके मेकअप से भी बनती है। चंडीगढ़ में रामलीला के साथ मेकअप का अंदाज भी बदल रहा है। कभी सिंदूर, काजल, लिपस्टिक और फाउंडेशन से कलाकार खुद एक-दूसरे को तैयार कर लेते थे लेकिन अब दर्जनों तरह के मेकअप आइटम और प्रोफेशनल आर्टिस्ट इस तैयारी का अहम हिस्सा बन गए हैं।
मेकअप पर होने वाला खर्च बढ़ा
संवाद थिएटर ग्रुप के हेड मुकेश शर्मा के मुताबिक समय के साथ रामलीला में मेकअप पर होने वाला खर्च तेजी से बढ़ा है। पहले सीमित सामान से ही सभी किरदारों को तैयार कर लिया जाता था। कलाकारों को अलग से मेकअप आर्टिस्ट की जरूरत नहीं पड़ती थी। वे एक-दूसरे के चेहरे पर मेकअप लगाकर मंच पर उतरने के लिए तैयार हो जाते थे। अब किरदारों को ज्यादा प्रभावशाली बनाने की मांग के साथ मेकअप के सामान और तैयारियों का दायरा भी बढ़ गया है।
10 साल में डेढ़ हजार से बढ़कर 30-40 हजार रुपये हुआ खर्च
मुकेश शर्मा के अनुसार करीब 10 साल पहले रामलीला के मेकअप के लिए एक से डेढ़ हजार रुपये में सामान आ जाता था। अब इस पर 30 से 40 हजार रुपये तक खर्च हो रहे हैं। पहले जहां सिंदूर, काजल, लिपस्टिक और फाउंडेशन से काम चल जाता था, वहीं अब मेकअप के लिए कई तरह के उत्पाद इस्तेमाल किए जाते हैं। कलाकारों को तैयार करने के लिए अलग से मेकअप आर्टिस्ट भी बुक किए जाते हैं। इससे रामलीला की तैयारी में मेकअप की अहमियत बढ़ गई है। अब आयोजन की तैयारियां केवल पोशाक और मंच सजाने तक सीमित नहीं हैं।
ग्लिटर-स्पार्कल की चमक कम, नेचुरल लुक की मांग बढ़ी
मेकअप आर्टिस्ट सचिन राजपूत बताते हैं कि पहले रामलीला के किरदारों को आकर्षक बनाने के लिए ग्लिटर और स्पार्कल का काफी इस्तेमाल किया जाता था। चेहरे पर चमकदार रंग और गहरा मेकअप दूर बैठे दर्शकों का ध्यान खींचने का तरीका था। अब यह चलन बदल रहा है। हल्के बेस के साथ किरदार के अनुरूप नेचुरल लुक तैयार करने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। सचिन राजपूत पहले खुद रामलीला में किरदार निभाते थे। ऐसे में उन्हें मंच पर मेकअप के प्रभाव और कलाकारों की मुश्किलों का अनुभव है। उनके अनुसार लोग अब अपनी त्वचा को लेकर पहले से ज्यादा सजग हैं। यही वजह है कि ब्रांडेड मेकअप उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। कलाकार भी चाहते हैं कि उनका किरदार प्रभावशाली दिखे, लेकिन त्वचा पर अनावश्यक बोझ न पड़े।
रामलीला में हर किरदार के स्वभाव और पहचान के अनुसार मेकअप किया जाता है। सचिन राजपूत के मुताबिक, रावण और कुंभकरण जैसे किरदारों को तैयार करना ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। उनके चेहरे को उभरा हुआ और प्रभावशाली दिखाने के लिए मूंछों, भौंहों और आंखों के आसपास की बनावट पर खास ध्यान देना पड़ता है ताकि मंच की रोशनी में भी उनका रौब नजर आए। इसके विपरीत राम जैसे किरदार के मेकअप में सौम्यता और स्वाभाविकता बनाए रखना जरूरी होता है। हर कलाकार के चेहरे और भूमिका के अनुसार मेकअप का तरीका बदलता है। यही वजह है कि अब मेकअप को भी अभिनय और मंच सज्जा की तरह एक विशेष हुनर माना जाने लगा है।
मेकअप उतारने में लापरवाही पड़ सकती है भारी
रामलीला के दौरान कलाकारों को कई घंटों तक मेकअप में रहना पड़ सकता है। ऐसे में मेकअप लगाने के साथ उसे सही तरीके से हटाना भी जरूरी है। कॉस्मेटोलॉजिस्ट भाविता के अनुसार, लंबे समय तक चेहरे पर मेकअप, पसीना और उत्पादों की परत रहने से कुछ लोगों को जलन या त्वचा संबंधी परेशानी हो सकती है। इसलिए कलाकारों को मेकअप हटाने और त्वचा की सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
-वाटरप्रूफ मेकअप हटाने के लिए उपयुक्त रिमूवर इस्तेमाल करें, चेहरा जोर से न रगड़ें।
-मेकअप हटाने के बाद माइल्ड क्लींजर से चेहरा साफ करें।
- त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए मॉइस्चराइजर लगाएं।
-खुजली, लालिमा या सूजन होने पर उत्पाद का इस्तेमाल बंद करें और जरूरत पड़ने पर त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें।