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Highcourt: पंजाब ग्रामीण आजीविका मिशन की भर्ती पर रोक, अंकों के बंटवारे का रिकॉर्ड नहीं मिला
Fri, 14 Aug 2026 10:41 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 14 Aug 2026 10:41 AM IST
सार
ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण गरीब परिवारों को स्वरोजगार और कौशल आधारित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित योजना है। अब रिकॉर्ड की जांच के बाद तय होगा कि चयन प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या इसे नए सिरे से कराने की जरूरत है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 41 ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधकों और 44 क्लस्टर समन्वयकों की भर्ती प्रक्रिया पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। अदालत ने चयन में अंकों के निर्धारण और रिकॉर्ड में प्रथम दृष्टया कई विसंगतियां और अस्पष्टताएं पाए जाने के बाद यह आदेश दिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि भर्ती 100 अंकों की थी। इनमें लिखित परीक्षा के 70 अंक और साक्षात्कार शैक्षणिक योग्यता व कार्य अनुभव के लिए 30 अंक निर्धारित थे। हालांकि विज्ञापन और चयन प्रक्रिया में इन 30 अंकों के बंटवारे को लेकर स्पष्टता नहीं थी। अदालत में पेश मूल रिकॉर्ड में लिखित परीक्षा के 70 और साक्षात्कार के केवल 10 अंक दर्ज मिले। शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के लिए विज्ञापन में 10-10 अंक निर्धारित होने के बावजूद इन्हें दिए जाने का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला।
अधिकारी भी ऐसा रिकॉर्ड पेश नहीं कर सके जिससे साबित हो कि अभ्यर्थियों को शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के अंक दिए गए थे। इससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए।
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याचिका में भर्ती शुरू होने के बाद पदों के वर्गवार वितरण में बदलाव और एक विज्ञापित पद को बिना स्पष्ट कारण खाली छोड़ने का आरोप भी लगाया गया। हाईकोर्ट ने भर्ती से संबंधित मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अदालत की निगरानी में चयन प्रक्रिया की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने की दिशा में भी आदेश दिए गए हैं।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि भर्ती 100 अंकों की थी। इनमें लिखित परीक्षा के 70 अंक और साक्षात्कार शैक्षणिक योग्यता व कार्य अनुभव के लिए 30 अंक निर्धारित थे। हालांकि विज्ञापन और चयन प्रक्रिया में इन 30 अंकों के बंटवारे को लेकर स्पष्टता नहीं थी। अदालत में पेश मूल रिकॉर्ड में लिखित परीक्षा के 70 और साक्षात्कार के केवल 10 अंक दर्ज मिले। शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के लिए विज्ञापन में 10-10 अंक निर्धारित होने के बावजूद इन्हें दिए जाने का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला।
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अधिकारी भी ऐसा रिकॉर्ड पेश नहीं कर सके जिससे साबित हो कि अभ्यर्थियों को शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के अंक दिए गए थे। इससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए।
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याचिका में भर्ती शुरू होने के बाद पदों के वर्गवार वितरण में बदलाव और एक विज्ञापित पद को बिना स्पष्ट कारण खाली छोड़ने का आरोप भी लगाया गया। हाईकोर्ट ने भर्ती से संबंधित मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अदालत की निगरानी में चयन प्रक्रिया की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने की दिशा में भी आदेश दिए गए हैं।