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Highcourt: निलंबित डीआईजी एचएस भुल्लर की जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा-अहम गवाहियां बाकी हैं
Tue, 11 Aug 2026 09:09 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Tue, 11 Aug 2026 09:09 AM IST
सार
निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को पुलिस ने भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया है। अब हाईकोर्ट ने नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर उर्फ एचएस भुल्लर को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने नियमित जमानत के लिए दायर उनकी दूसरी लगातार याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने कहा कि महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही अभी होनी बाकी है और पुलिस विभाग में याचिकाकर्ता के पद को देखते हुए उनके गवाहों को प्रभावित या धमकाने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आदेश के मुताबिक एक बातचीत में भुल्लर ने कृष्णानु को शिकायतकर्ता से आठ लाख रुपये लेने के निर्देश दिए। इसके बाद 15 अक्तूबर 2025 को प्राथमिकी दर्ज की गई और 16 अक्तूबर को चंडीगढ़ में जाल बिछाया गया। कृष्णानु को शिकायतकर्ता से कथित तौर पर पांच लाख रुपये लेते हुए पकड़ा गया। इसके बाद भुल्लर को भी उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया।
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भुल्लर की ओर से जमानत के लिए दलील दी गई कि वह तीन दशक से अधिक समय तक सेवा कर चुके हैं और सेवानिवृत्ति के करीब हैं। जांच पूरी हो चुकी है तथा उन्हें आगे की जांच के लिए हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उनकी ओर से कोई बरामदगी नहीं हुई है और निलंबित होने के कारण उनके पास गवाहों को प्रभावित करने की कोई संभावना नहीं है। साथ ही सीबीआई के अधिकार क्षेत्र को भी चुनौती दी गई।
सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि भुल्लर के खिलाफ दर्ज बातचीत, वाट्सऐप रिकॉर्ड और सत्यापन के दौरान की गई नियंत्रित कॉल से रिश्वत की मांग प्रथमदृष्टया स्थापित होती है। सीबीआई ने यह भी कहा कि पिछली जमानत याचिका गुण-दोष के आधार पर खारिज हुई थी और इस बार परिस्थितियों में कोई बड़ा या ठोस बदलाव नहीं हुआ है। सीबीआई के अधिकार क्षेत्र पर भुल्लर की दलील को भी हाई कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने कहा कि पंजाब सरकार ने छह नवंबर 2020 को सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ली थी, लेकिन इस मामले में भुल्लर और सह-आरोपित की गिरफ्तारी चंडीगढ़ में हुई और मामले की कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा भी चंडीगढ़ में हुआ। अदालत ने यह भी नोट किया कि भुल्लर ने पहले इन मुद्दों को लेकर दायर रिट याचिका वापस ले ली थी।
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अदालत ने कहा कि महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही अभी होनी बाकी है और पुलिस विभाग में याचिकाकर्ता के पद को देखते हुए उनके गवाहों को प्रभावित या धमकाने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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आदेश के मुताबिक एक बातचीत में भुल्लर ने कृष्णानु को शिकायतकर्ता से आठ लाख रुपये लेने के निर्देश दिए। इसके बाद 15 अक्तूबर 2025 को प्राथमिकी दर्ज की गई और 16 अक्तूबर को चंडीगढ़ में जाल बिछाया गया। कृष्णानु को शिकायतकर्ता से कथित तौर पर पांच लाख रुपये लेते हुए पकड़ा गया। इसके बाद भुल्लर को भी उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया।
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भुल्लर की ओर से जमानत के लिए दलील दी गई कि वह तीन दशक से अधिक समय तक सेवा कर चुके हैं और सेवानिवृत्ति के करीब हैं। जांच पूरी हो चुकी है तथा उन्हें आगे की जांच के लिए हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उनकी ओर से कोई बरामदगी नहीं हुई है और निलंबित होने के कारण उनके पास गवाहों को प्रभावित करने की कोई संभावना नहीं है। साथ ही सीबीआई के अधिकार क्षेत्र को भी चुनौती दी गई।
सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि भुल्लर के खिलाफ दर्ज बातचीत, वाट्सऐप रिकॉर्ड और सत्यापन के दौरान की गई नियंत्रित कॉल से रिश्वत की मांग प्रथमदृष्टया स्थापित होती है। सीबीआई ने यह भी कहा कि पिछली जमानत याचिका गुण-दोष के आधार पर खारिज हुई थी और इस बार परिस्थितियों में कोई बड़ा या ठोस बदलाव नहीं हुआ है। सीबीआई के अधिकार क्षेत्र पर भुल्लर की दलील को भी हाई कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने कहा कि पंजाब सरकार ने छह नवंबर 2020 को सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ली थी, लेकिन इस मामले में भुल्लर और सह-आरोपित की गिरफ्तारी चंडीगढ़ में हुई और मामले की कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा भी चंडीगढ़ में हुआ। अदालत ने यह भी नोट किया कि भुल्लर ने पहले इन मुद्दों को लेकर दायर रिट याचिका वापस ले ली थी।