हाईटेक शिकंजा: जीएसटी चोरी पकड़ेगा सुपर सॉफ्टवेयर, चंडीगढ़ प्रशासन तैयार कर रहा टैक्स इंटेलिजेंट सॉफ्टवेयर
आबकारी एवं कराधान विभाग के एईटीसी प्रद्युमन सिंह ने बताया कि सॉफ्टवेयर का उद्देश्य जीएसटी चोरी रोकने के साथ ईमानदार करदाताओं के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इसके लिए प्रशासन के विभिन्न विभागों के बीच डेटा साझा करने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
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चंडीगढ़ प्रशासन का आबकारी एवं कराधान विभाग जीएसटी चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए अत्याधुनिक टैक्स इंटेलिजेंट सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है।
यह सॉफ्टवेयर विभिन्न सरकारी विभागों के आंकड़ों का विश्लेषण कर यह पता लगाएगा कि कोई उद्योगपति, कारोबारी या व्यापारी अपनी वास्तविक उत्पादन क्षमता और कारोबार की तुलना में कम जीएसटी तो नहीं दिखा रहा।
विभाग के मुताबिक डेटा एनालिटिक्स आधारित यह प्रणाली लागू होने के बाद टैक्स चोरी की पहचान पहले से अधिक सटीक, पारदर्शी और तेज होगी।
आबकारी एवं कराधान विभाग के एईटीसी प्रद्युमन सिंह ने बताया कि सॉफ्टवेयर का उद्देश्य जीएसटी चोरी रोकने के साथ ईमानदार करदाताओं के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इसके लिए प्रशासन के विभिन्न विभागों के बीच डेटा साझा करने की व्यवस्था विकसित की जा रही है जिससे किसी कारोबारी की वास्तविक आर्थिक गतिविधियों का समग्र आकलन किया जा सके।
सबसे पहले बिजली विभाग से औद्योगिक इकाइयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की मासिक बिजली खपत का रिकॉर्ड लिया जाएगा। विभाग के मुताबिक किसी फैक्टरी की बिजली खपत उसकी उत्पादन क्षमता का महत्वपूर्ण संकेतक होती है। यदि कोई इकाई बड़ी मात्रा में बिजली का उपयोग कर रही है लेकिन जीएसटी रिटर्न में उत्पादन या बिक्री कम दर्शा रही है तो सॉफ्टवेयर ऐसे मामलों को स्वतः चिह्नित कर देगा।
इसी तरह नगर निगम से प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य रिकॉर्ड, एस्टेट ऑफिस से औद्योगिक एवं व्यावसायिक संपत्तियों की जानकारी, ट्रांसपोर्ट विभाग से माल परिवहन संबंधी आंकड़े तथा अन्य प्रशासनिक विभागों से उपलब्ध सूचनाएं भी एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत की जाएंगी। इन सभी आंकड़ों का मिलान कर कारोबारी की वास्तविक गतिविधियों का अनुमान लगाया जाएगा।
मैन्युफैक्चरिंग और बिक्री का मिलेगा वास्तविक आकलन
विभागीय अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में कुछ कारोबारी कर बचाने के लिए वास्तविक उत्पादन और बिक्री की तुलना में कम कारोबार दर्शाते हैं। इससे सरकार को जीएसटी राजस्व का नुकसान होता है। नया सॉफ्टवेयर विभिन्न विभागों के आंकड़ों का मिलान कर संदिग्ध लेन-देन और रिटर्न की पहचान करेगा। इससे निरीक्षण और जांच प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक होगी और विभाग केवल उन्हीं मामलों में कार्रवाई करेगा जहां डेटा में स्पष्ट असमानता मिलेगी।
नई प्रणाली लागू होने के बाद टैक्स निर्धारण केवल कारोबारी की ओर से दाखिल जीएसटी रिटर्न तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि बिजली-पानी की खपत, संपत्ति के आकार, परिवहन गतिविधियों और अन्य प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर भी वास्तविक कारोबार का आकलन किया जाएगा। इससे कर संग्रह बढ़ने के साथ व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता भी आएगी।
ऐसे करेगा काम सॉफ्टवेयर
- विभिन्न विभागों का डेटा एक प्लेटफॉर्म पर एकत्र होगा।
- बिजली, पानी, प्रॉपर्टी टैक्स और परिवहन रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा।
- जीएसटी रिटर्न में घोषित कारोबार और वास्तविक गतिविधियों की तुलना होगी।
- डेटा में अंतर मिलने पर सिस्टम स्वतः संदिग्ध मामलों को चिन्हित करेगा।
- इसके आधार पर विभाग जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेगा।
जून में 229 करोड़ रहा जीएसटी संग्रह
चंडीगढ़ में जून 2026 के दौरान घरेलू जीएसटी संग्रह 229 करोड़ रुपये रहा जो जून 2025 के 215 करोड़ रुपये की तुलना में सात प्रतिशत अधिक है। हालांकि मई के मुकाबले जून में संग्रह में करीब 39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल में 306 करोड़ और मई में 373 करोड़ रुपये का संग्रह हुआ था।
पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में कुल घरेलू जीएसटी संग्रह 908 करोड़ रुपये रहा जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग 887 करोड़ रुपये था। यानी पहली तिमाही में दो से तीन प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। प्रशासन को उम्मीद है कि नया टैक्स इंटेलिजेंट सॉफ्टवेयर लागू होने के बाद जीएसटी चोरी पर प्रभावी रोक लगेगी और कर संग्रह में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।