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चंडीगढ़ में अब चल सकती है ट्राम: 200 किमी लंबे साइकिल ट्रैक करेंगे मदद, हैरिटेज से छेड़छाड़ के बिना होगा काम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Mon, 22 Jun 2026 12:09 PM IST
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सार

चंडीगढ़ में 200 किलोमीटर से अधिक लंबे साइकिल ट्रैक हैं। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया का मानना है कि इन चौड़े साइकिल ट्रैक के एक हिस्से का उपयोग करके पर्यावरण-अनुकूल लाइट ट्राम चलाई जाए तो फायदा होगा।

Trams in Chandigarh cycle tracks to aid project heritage
ट्राम - फोटो : Amar Ujala/File
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विस्तार

चंडीगढ़ सिटी में लगातार बढ़ते ट्रैफिक के दबाव और हर चौक पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए प्रशासन अब शहर में ट्राम चला सकता है। वजह है कि ट्राम चंडीगढ़ के साइकिल ट्रैक जितनी जगह से आसानी से निकल जाएगी जिससे न तो शहर का हैरिटेज बिगड़ेगा न ही महंगाई का बोझ प्रशासन पर पड़ेगा।



चंडीगढ़ में 200 किलोमीटर से अधिक लंबे साइकिल ट्रैक हैं। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया का मानना है कि इन चौड़े साइकिल ट्रैक के एक हिस्से का उपयोग करके पर्यावरण-अनुकूल लाइट ट्राम चलाई जाए तो इसके दो फायदे होंगे। पहला यह कि मुख्य सड़कों पर बिना किसी छेड़छाड़ या खुदाई के पब्लिक ट्रांसपोर्ट का एक नया विकल्प मिलेगा दूसरा कि अंडर ग्राउंड मेट्रो के खुदाई या विशाल पिलर खड़े करने से शहर का मूल स्वरूप प्रभावित होने का डर खत्म होगा।

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मेट्रो को लेकर हुईं तीन महत्वपूर्ण बैठक

25,000 करोड़ की लागत वाली ट्राईसिटी मेट्रो परियोजना को लेकर संशय और उम्मीदों का दौर जारी है। केंद्र सरकार द्वारा संसद में दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक अप्रैल 2023 में मेट्रो प्रोजेक्ट की देखरेख के लिए गठित यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की 3 मुख्य बैठकें हो सकी हैं। तीसरी और आखिरी बैठक सितंबर 2024 में हुई थी। इसके बाद से कोई नई बैठक नहीं बुलाई गई है।

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बजट की व्यवहारिकता के लिए कमेटी गठित

2025-2026 में चंडीगढ़ प्रशासन ने मेट्रो प्रोजेक्ट की आर्थिक व्यवहार्यता और कैग की रिपोर्टों की समीक्षा के लिए एक विशेष 8-सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी इस बात का आकलन कर रही है कि क्या चंडीगढ़ जैसी कम आबादी वाले हेरिटेज शहर के लिए भारी-भरकम बजट वाली मेट्रो सही है या फिर ट्राम और बीआरटीएस जैसे सस्ते व प्रभावी विकल्प ज्यादा बेहतर रहेंगे। 

रोजाना आते हैं डेढ़ लाख वाहन

मोहाली और पंचकूला के साथ पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से रोजाना 1 लाख से 1.5 लाख वाहन चंडीगढ़ की सीमाओं में प्रवेश करते हैं। इसके साथ चंडीगढ़ की सड़कों पर हर दिन औसतन 104 नए वाहन शामिल हो रहे हैं। वहीं, शहर में प्रति 1,000 निवासियों पर 1,142 वाहन हैं। चंडीगढ़ की सड़कों पर दौड़ने वाले कुल ट्रैफिक में 80 फीसदी से से 90 फीसदी हिस्सेदारी निजी कारों और दोपहिया वाहनों की है जबकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट (बसें आदि) का हिस्सा मात्र 6 फीसदी के करीब है।

राइट्स की यह है रिपोर्ट

राइट्स ने तीन प्रमुख कॉरिडोर वाले कुल 85.65 किलोमीटर लंबे नेटवर्क के लिए दो अलग-अलग अनुमानित खर्च सौंपे हैं।
एलिवेटेड मेट्रो : इसकी अनुमानित निर्माण लागत 23,263 करोड़ तय की गई है। टैक्स और साल 2031 तक होने वाली महंगाई को जोड़कर यह कुल बजट 25,631 करोड़ तक पहुंच जाएगा।
अंडरग्राउंड मेट्रो : इसकी निर्माण लागत 27,680 करोड़ आंकी गई है। जो सभी टैक्स और समय वृद्धि के साथ कुल 30,498 करोड़ हो जाएगी।

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