राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस: बचपन में लगा टीका युवावस्था तक देता है सुरक्षा, पीजीआई शोध में सकारात्मक परिणाम
शोध के दौरान प्रतिभागियों के रक्त के नमूनों की जांच कर यह देखा गया कि उनके शरीर में खसरा, गलसुआ और रूबेला के खिलाफ इम्यूनोग्लोबुलिन-जी (आईजीजी) एंटीबॉडी मौजूद हैं या नहीं। जांच के परिणामों में पाया गया कि अधिकांश वयस्कों के शरीर में इन बीमारियों के खिलाफ प्रतिरक्षा बनी हुई है।
विस्तार
बचपन में लगाए जाने वाले टीकों को लेकर आम लोगों में अक्सर यह धारणा रहती है कि उनका असर समय के साथ कम हो जाता है लेकिन पीजीआई के एक शोध ने इस सोच को काफी हद तक गलत साबित किया है।
साल 2025 में हुए शोध में पाया गया है कि बचपन में लगाया गया एमएमआर (खसरा, गलसुआ और रूबेला) टीका युवावस्था तक भी शरीर को इन संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है।
यह शोध जर्नल ऑफ क्लिनिकल इंफेक्शियस डिजीज एंड प्रैक्टिस में प्रकाशित किया गया है। इसमें पीजीआई के विशेषज्ञों की टीम में डॉ. सतीश कुमार रेंटापल्ला, डॉ. विकास सूरी, डॉ. हरप्रीत सिंह और डॉ. मिनी पी. सिंह सहित अन्य शामिल रहे। शोध के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु के 207 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया जिनमें अलग-अलग आयु वर्ग के लोग और स्वास्थ्यकर्मी भी थे।
शोध के दौरान प्रतिभागियों के रक्त के नमूनों की जांच कर यह देखा गया कि उनके शरीर में खसरा, गलसुआ और रूबेला के खिलाफ इम्यूनोग्लोबुलिन-जी (आईजीजी) एंटीबॉडी मौजूद हैं या नहीं। जांच के परिणामों में पाया गया कि अधिकांश वयस्कों के शरीर में इन बीमारियों के खिलाफ प्रतिरक्षा बनी हुई है। शोध के अनुसार 95.5 प्रतिशत प्रतिभागियों में खसरे के खिलाफ सुरक्षा देने वाली एंटीबॉडी पाई गई जबकि 92.3 प्रतिशत लोगों में रूबेला और 82.5 प्रतिशत प्रतिभागियों में गलसुआ (मंप्स) के खिलाफ प्रतिरक्षा मौजूद थी। यह परिणाम बताते हैं कि बचपन में लगाया गया टीकाकरण लंबे समय तक प्रभावी रहता है और वयस्क आबादी को भी इन बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है।
शोध में यह भी सामने आया कि लगभग 80 प्रतिशत प्रतिभागियों ने खसरे के टीकाकरण का इतिहास बताया, जबकि गलसुआ और रूबेला के टीकाकरण की जानकारी अपेक्षाकृत कम लोगों को थी। इसके बावजूद अधिकतर लोगों में एंटीबॉडी का पाया जाना इस बात का संकेत है कि टीकाकरण के साथ-साथ प्राकृतिक संक्रमण के बाद भी शरीर में प्रतिरक्षा विकसित हो सकती है।
संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा कम
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर किया गया टीकाकरण समाज में मजबूत सामूहिक प्रतिरक्षा (कम्युनिटी इम्युनिटी) तैयार करता है जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा काफी कम हो जाता है। हालांकि शोध में यह भी पाया गया कि कुछ स्वास्थ्यकर्मियों में इन बीमारियों के प्रति संवेदनशीलता अभी भी मौजूद है। ऐसे में विशेषज्ञ अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए समय-समय पर टीकाकरण की स्थिति की जांच और जरूरत पड़ने पर बूस्टर डोज देने की सलाह देते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार बचपन में समय पर कराया गया टीकाकरण न केवल बच्चों बल्कि पूरे समाज के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है इसलिए अभिभावकों को बच्चों का टीकाकरण तय समय पर कराना चाहिए और वयस्कों को भी अपने टीकाकरण के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
शोध के प्रमुख निष्कर्ष
95.5 प्रतिशत प्रतिभागियों में खसरे के खिलाफ एंटीबॉडी मौजूद
92.3 प्रतिशत लोगों में रूबेला के खिलाफ प्रतिरक्षा पाई गई
82.5 प्रतिशत प्रतिभागियों में गलसुआ (मंप्स) के खिलाफ एंटीबॉडी मौजूद