School Reopen: पंजाब में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की बीच खुले स्कूल; न के बराबर पहुंचे विद्यार्थी
पंजाब के स्कूलों में सर्दी की छुट्टियां खत्म हो गई हैं। बुधवार से स्कूल दोबारा खुल गए हैं।ऐसे में भीषण ठंड, घने कोहरे और बर्फीली हवाओं ने बच्चों और अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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पंजाब के स्कूलों में सर्दी की छुट्टियां खत्म हो गई हैं। लगभग 20 दिन से ज्यादा दिनों तक स्कूलों में छुट्टियां थीं। 24 दिसंबर से 13 जनवरी तक स्कूल बंद रहे। 14 जनवरी को स्कूल दोबारा शुरू हो गए हैं। ऐसे में भीषण ठंड, घने कोहरे और बर्फीली हवाओं ने बच्चों और अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सरकार ने स्कूलों की छुट्टी नहीं बढ़ाई और बुधवार सुबह हालात ऐसे रहे कि पंजाब के कई इलाकों में धुंध की वजह से विजिबिलिटी बेहद कम रही और तापमान करीब 6 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए बड़ी संख्या में अभिभावकों ने छोटे बच्चों को स्कूल न भेजने का फैसला लिया, जिसका सीधा असर स्कूलों की हाजिरी पर पड़ा। कई सरकारी स्कूलों में महज 25 से 30 प्रतिशत बच्चे ही पहुंच सके। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति काफी कम रही। ऐसा हाल जालंधर के कई स्कूलों में देखने को मिला है।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में ठंड से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। न तो कक्षाओं में हीटर हैं और न ही बच्चों को पर्याप्त सुविधा मिल रही है। ऐसे में छोटे बच्चे इस ठंड को सहन नहीं कर पा रहे। अभिभावकों का कहना है कि जब तक मौसम में सुधार नहीं होता, वे बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
ग्रामीण इलाकों में हालात और भी खराब
फतेह जलाल प्राइमरी स्कूल में प्री-प्राइमरी से पांचवीं तक कुल 94 बच्चों में से सिर्फ 15-20 बच्चे ही स्कूल पहुंचे, जबकि प्री-प्राइमरी की कक्षाएं पूरी तरह खाली रहीं। मिडल स्कूल फतेह जलाल में 37 में से सिर्फ 20 बच्चे आए, जिन्हें शिक्षक घर जाकर लेकर आए। ब्लॉक करतारपुर के प्राइमरी स्कूल ब्रह्मपुर में 51 में से केवल 15 बच्चे उपस्थित रहे, जबकि प्री-प्राइमरी के 18 में से महज 5 बच्चे आए। प्राइमरी स्कूल पत्तड़ कलां में 150 में से सिर्फ 25-26 बच्चे पहुंचे और दोपहर 12:30 बजे तक अभिभावक ठंड का हवाला देकर बच्चों को घर ले गए। यहां प्री-प्राइमरी के अधिकांश बच्चों को अभिभावकों ने स्कूल भेजा ही नहीं।
शिक्षकों की चिंता: सिलेबस और परीक्षाएं प्रभावित
शिक्षकों का कहना है कि अगर छुट्टियां और बढ़ाई गईं तो पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होगी। 17 जनवरी से प्री-एग्जाम शुरू होने हैं और 22 जनवरी से प्री-प्राइमरी के पेपर तय हैं। ऐसे में सिलेबस पूरा करना चुनौती बन गया है। ऑनलाइन पढ़ाई भी पूरी तरह संभव नहीं है, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में अधिकतर बच्चों के पास मोबाइल या इंटरनेट की सुविधा नहीं है।
छुट्टियां बढ़ाने या टाइमिंग बदलने की मांग
अभिभावकों और शिक्षकों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। अभिभावक जहां छुट्टियां बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, वहीं शिक्षक स्कूलों की टाइमिंग में बदलाव को बेहतर समाधान बता रहे हैं। उनका कहना है कि सुबह के समय कोहरा सबसे ज्यादा होता है, इसलिए समय आगे बढ़ाया जाए तो बच्चों की सुरक्षा भी बनी रहेगी और पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी। फिलहाल कड़ाके की ठंड और कोहरे के बीच बच्चों की सुरक्षा बनाम पढ़ाई को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है और सभी की निगाहें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं।