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शेर-ए-पंजाब क्रिकेट लीग बनी सियासत का अखाड़ा: हरभजन सिंह ने उठाए सवाल, सरकार पर श्रेय लेने का आरोप
Thu, 10 Sep 2026 10:16 AM IST
Nivedita
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
Published by: Nivedita
Updated Thu, 10 Sep 2026 10:16 AM IST
सार
शेर-ए-पंजाब टी-20 लीग का पहला संस्करण 2023 में हुआ था और 2024 में दूसरा संस्करण आयोजित किया गया। 2025 में प्रतियोगिता नहीं हुई। इस बार इसका स्वरूप बदला गया है। इसी पर राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने सवाल उठाया है।
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शेर ए पंजाब क्रिकेट लीग पर सवाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शेर-ए-पंजाब लीग की चमक अब क्रिकेट के मैदान से निकलकर सियासत के अखाड़े तक पहुंच गई है।
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लीग के मौजूदा संस्करण को लेकर भाजपा सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने पंजाब सरकार पर सीधे निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि जब यह प्रतियोगिता पहले से होती आ रही है तो इसे सरकार की नई उपलब्धि के तौर पर क्यों पेश किया जा रहा है। हरभजन ने कहा कि शेर-ए-पंजाब लीग का यह चौथा संस्करण है, पहला नहीं, जबकि इसका आयोजन पंजाब क्रिकेट संघ यानी पीसीए करता आया है।
पीसीए की उपलब्धि के तौर पर देखें-हरभजन
हरभजन ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए साफ कहा कि पीसीए भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड से संबद्ध संस्था है, पंजाब सरकार की नहीं। उनका आरोप है कि काम पीसीए का है और सरकार उसका श्रेय अपने खाते में डाल रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर लीग को लेकर इतना उत्साह है तो इसे पीसीए की उपलब्धि के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि सरकार के खाते में।
हरभजन की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ भी आवाजें उठीं। एक पोस्ट में कहा गया कि पूरा पंजाब शेर-ए-पंजाब लीग की तारीफ कर रहा है, लेकिन पंजाब से भाजपा सांसद हरभजन सिंह ने अब तक इसकी सराहना में एक ट्वीट तक नहीं किया। उन पर पंजाब को बदनाम करने वाले कथित फर्जी ट्वीट करने का आरोप लगाते हुए यह भी कहा गया कि उन्हें पार्टीवाद से ऊपर उठकर पंजाब में हो रहे अच्छे काम की प्रशंसा करनी चाहिए।
इस जवाबी हमले में पंजाब के पूर्व खेल मंत्री और पीसीए से जुड़े मीत हेयर का नाम भी सामने आया। सरकार समर्थकों का तर्क है कि भले ही लीग का औपचारिक आयोजन पीसीए कर रहा हो, लेकिन इस संस्करण को बड़े स्तर पर पेश करने में पंजाब सरकार और मीत हेयर की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। यही तर्क अब इस विवाद का राजनीतिक केंद्र बन गया है।
हरभजन ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए साफ कहा कि पीसीए भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड से संबद्ध संस्था है, पंजाब सरकार की नहीं। उनका आरोप है कि काम पीसीए का है और सरकार उसका श्रेय अपने खाते में डाल रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर लीग को लेकर इतना उत्साह है तो इसे पीसीए की उपलब्धि के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि सरकार के खाते में।
हरभजन की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ भी आवाजें उठीं। एक पोस्ट में कहा गया कि पूरा पंजाब शेर-ए-पंजाब लीग की तारीफ कर रहा है, लेकिन पंजाब से भाजपा सांसद हरभजन सिंह ने अब तक इसकी सराहना में एक ट्वीट तक नहीं किया। उन पर पंजाब को बदनाम करने वाले कथित फर्जी ट्वीट करने का आरोप लगाते हुए यह भी कहा गया कि उन्हें पार्टीवाद से ऊपर उठकर पंजाब में हो रहे अच्छे काम की प्रशंसा करनी चाहिए।
इस जवाबी हमले में पंजाब के पूर्व खेल मंत्री और पीसीए से जुड़े मीत हेयर का नाम भी सामने आया। सरकार समर्थकों का तर्क है कि भले ही लीग का औपचारिक आयोजन पीसीए कर रहा हो, लेकिन इस संस्करण को बड़े स्तर पर पेश करने में पंजाब सरकार और मीत हेयर की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। यही तर्क अब इस विवाद का राजनीतिक केंद्र बन गया है।
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नया नहीं है लीग का सफर
हालांकि, विवाद में एक अहम तथ्य यह भी है कि शेर-ए-पंजाब टी-20 लीग का सफर नया नहीं है। पहला संस्करण 2023 में हुआ था और 2024 में दूसरा संस्करण आयोजित किया गया। 2025 में प्रतियोगिता नहीं हुई और 2026 में इसका चौथा संस्करण खेला जा रहा है। इस बार इसका स्वरूप जरूर बदला गया है और छह शहर आधारित टीमों के साथ फ्रेंचाइजी मॉडल में इसे बड़े स्तर पर पेश किया गया है।
यही अंतर अब पूरी बहस की जड़ बन गया है। लीग पुरानी है लेकिन उसका मौजूदा फ्रेंचाइजी स्वरूप नया है। लिहाजा सरकार समर्थक इसे नए अंदाज और बड़े स्तर पर शुरू की गई पहल बता रहे हैं, जबकि हरभजन सिंह का जोर इस बात पर है कि प्रतियोगिता की मूल पहल और आयोजन पीसीए का रहा है।
कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री भी हुए शामिल
दिलचस्प बात यह है कि लीग के मौजूदा संस्करण के शुभारंभ से जुड़े कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री भगवंत मान और मीत हेयर की मौजूदगी ने भी राजनीतिक बहस को हवा दी है। एक तरफ सरकार इसे पंजाब में क्रिकेट प्रतिभाओं को बड़ा मंच देने वाली पहल के तौर पर प्रचारित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हरभजन सिंह आयोजन का श्रेय पीसीए को देने की बात कर रहे हैं। इस तरह शेर-ए-पंजाब लीग की सफलता के बीच अब असली मुकाबला मैदान पर खिलाड़ियों के बीच नहीं, बल्कि श्रेय की सियासत में दिखाई दे रहा है।
हालांकि, विवाद में एक अहम तथ्य यह भी है कि शेर-ए-पंजाब टी-20 लीग का सफर नया नहीं है। पहला संस्करण 2023 में हुआ था और 2024 में दूसरा संस्करण आयोजित किया गया। 2025 में प्रतियोगिता नहीं हुई और 2026 में इसका चौथा संस्करण खेला जा रहा है। इस बार इसका स्वरूप जरूर बदला गया है और छह शहर आधारित टीमों के साथ फ्रेंचाइजी मॉडल में इसे बड़े स्तर पर पेश किया गया है।
यही अंतर अब पूरी बहस की जड़ बन गया है। लीग पुरानी है लेकिन उसका मौजूदा फ्रेंचाइजी स्वरूप नया है। लिहाजा सरकार समर्थक इसे नए अंदाज और बड़े स्तर पर शुरू की गई पहल बता रहे हैं, जबकि हरभजन सिंह का जोर इस बात पर है कि प्रतियोगिता की मूल पहल और आयोजन पीसीए का रहा है।
कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री भी हुए शामिल
दिलचस्प बात यह है कि लीग के मौजूदा संस्करण के शुभारंभ से जुड़े कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री भगवंत मान और मीत हेयर की मौजूदगी ने भी राजनीतिक बहस को हवा दी है। एक तरफ सरकार इसे पंजाब में क्रिकेट प्रतिभाओं को बड़ा मंच देने वाली पहल के तौर पर प्रचारित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हरभजन सिंह आयोजन का श्रेय पीसीए को देने की बात कर रहे हैं। इस तरह शेर-ए-पंजाब लीग की सफलता के बीच अब असली मुकाबला मैदान पर खिलाड़ियों के बीच नहीं, बल्कि श्रेय की सियासत में दिखाई दे रहा है।