यूनिवर्सिटी के साथ खेल: बाहरी राज्यों के छात्रों के एडमिशन का दिया झांसा, सैलरी-दफ्तर के नाम पर शुरू हुई लूट
पश्चिम बंगाल निवासी दो भाइयों ने सीटी यूनिवर्सिटी से एक हजार बच्चों को एडमिशन दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी की है।
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विस्तार
लुधियाना में फिरोजपुर रोड स्थित सीटी यूनिवर्सिटी में बाहरी राज्यों से 1,000 छात्रों के एडमिशन कराने का दावा कर यूनिवर्सिटी से लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है।
आरोप है कि पश्चिम बंगाल निवासी दीपक कुमार सिंह ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को बड़े पैमाने पर एडमिशन कराने का भरोसा दिया और इसी आधार पर नौकरी, वेतन, कार्यालय, लैपटॉप, मोबाइल फोन और प्रचार-प्रसार के नाम पर रकम हासिल की। बाद में उसके द्वारा बताए गए एडमिशन फर्जी पाए गए।
मामले में यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट रजिस्ट्रार एचआर विकास जैन की शिकायत पर जांच के बाद पुलिस ने पश्चिम बंगाल निवासी दीपक कुमार सिंह और उसके भाई आदित्यराज सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
ऐसे शुरू हुआ पूरा मामला
जुलाई 2024 में 1000 एडमिशन का दावा
दीपक कुमार सिंह ने जुलाई 2024 में यूनिवर्सिटी प्रशासन से संपर्क कर पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड से एक साल में करीब 1,000 छात्रों के एडमिशन कराने का दावा किया। यूनिवर्सिटी ने उसके प्रस्ताव पर भरोसा किया। आरोप है कि उसे यूनिवर्सिटी की ओर से हवाई टिकट भी उपलब्ध कराई गई और 27 सितंबर 2024 को उसने यूनिवर्सिटी पहुंचकर प्रेजेंटेशन दी।
95 हजार महीने की सैलरी मांगी
शुरुआत में दीपक ने कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने की बात कही, लेकिन बाद में बड़े टारगेट का हवाला देते हुए 95 हजार रुपये मासिक वेतन की मांग की। उसे असिस्टेंट डायरेक्टर, आउटरीच के पद पर नियुक्त किया गया। उसकी सिफारिश पर अखिलेश्वर दुबे को झारखंड का स्टेट हेड बनाकर 50 हजार रुपये मासिक वेतन दिया गया।
रानीगंज में ऑफिस के नाम पर रकम ली
आरोप है कि दीपक ने पश्चिम बंगाल के रानीगंज में यूनिवर्सिटी का कार्यालय खोलने के नाम पर 17 हजार रुपये मासिक किराया और 34 हजार रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट अपने खाते में ट्रांसफर करवाए।
लैपटॉप-मोबाइल और फर्नीचर के नाम पर खर्च
आरोपी ने कार्यालय की व्यवस्था और सजावट के नाम पर यूनिवर्सिटी से करीब 1.40 लाख रुपये लिए। इसके अलावा 27 हजार रुपये का लैपटॉप और 44,500 रुपये के दो मोबाइल फोन भी खरीदे गए। शिकायत के अनुसार नौकरी से हटाए जाने के बाद भी ये सामान वापस नहीं किए गए।
आरोपी ने एडमिशन बढ़ाने के लिए एजुकेशन फेयर और टेस्ट करवाने की योजना बताई। प्रचार-प्रसार और परीक्षा आयोजित करने के नाम पर यूनिवर्सिटी ने उसे अलग-अलग किस्तों में करीब 70 हजार रुपये दिए।
डेटा जुटाकर कागजों में दिखाए फर्जी एडमिशन
शिकायतकर्ता के अनुसार जब दीपक पर एडमिशन का दबाव बढ़ा तो उसने बाहरी राज्यों के छात्रों का डेटा जुटाकर कागजों में एडमिशन दिखाने शुरू कर दिए। आरोप है कि कुछ छात्रों के नाम पर उसने अपनी जेब से 2,000 से 5,000 रुपये तक जमा करवाकर एडमिशन प्रक्रिया पूरी होने का रिकॉर्ड तैयार किया।
इसके बाद वह छात्रों की लिस्ट लगातार यूनिवर्सिटी प्रशासन को भेजता रहा। यूनिवर्सिटी को लगा कि एडमिशन का काम आगे बढ़ रहा है और आरोपी पर विश्वास बना रहा।
शिकायत के अनुसार जब तक यूनिवर्सिटी को फर्जी एडमिशन की जानकारी मिली, तब तक दीपक कुमार सिंह ने सैलरी और अन्य खर्चों के नाम पर 7,67,037 रुपये और अखिलेश्वर दुबे ने 3,90,066 रुपये हासिल कर लिए थे।
नौकरी से हटाए जाने के बाद देनदारी चुकाने के लिए दीपक ने 2.85 लाख रुपए का चेक दिया, लेकिन वह बाउंस हो गया। वहीं अखिलेश्वर दुबे द्वारा दिया गया 1.50 लाख रुपये का चेक गलत हस्ताक्षर के कारण रिजेक्ट हो गया।
यूनिवर्सिटी प्रशासन को जब एडमिशन पर संदेह हुआ तो लिस्ट में शामिल छात्रों के मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया गया। छात्रों ने कथित तौर पर बताया कि उन्होंने सीटी यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए आवेदन ही नहीं किया था।
जांच के दौरान सात कॉल रिकॉर्डिंग और एक छात्र का ईमेल भी सामने आया, जिनसे यूनिवर्सिटी को कथित फर्जी एडमिशन का पता चला।
रानीगंज के ऑफिस पर भी उठे सवाल
जब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पश्चिम बंगाल में बताए गए कार्यालय की जानकारी जुटानी शुरू की तो कथित मकान मालकिन सिंधु देवी से संपर्क करने का प्रयास किया गया। शिकायत के अनुसार बाद में उसने यूनिवर्सिटी के फोन उठाने बंद कर दिए और किराए से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने से भी इनकार कर दिया।
पुलिस ने शिकायत और जांच के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस पूरे मामले में पैसों के लेन-देन, फर्जी एडमिशन, कार्यालय और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है।