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जापान में PR लेना होगा मुश्किल: आवेदक की वार्षिक आय से जुड़ा बड़ा नियम, एक अगस्त से होंगे प्रभावी
Wed, 29 Jul 2026 09:13 AM IST
Nivedita
कंवरपाल, संवाद, हलवारा
कंवरपाल, संवाद, हलवारा
Published by: Nivedita
Updated Wed, 29 Jul 2026 09:13 AM IST
सार
जापान ने सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवरों की भर्ती की है। भारत-जापान के मजबूत होते आर्थिक संबंधों के बीच भारतीयों की मांग बढ़ रही है जिस पर नए नियम सीधा असर डालेंगे।
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जापान
- फोटो : Freepik
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विस्तार
जापान में हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए स्थायी निवास (पीआर) हासिल करना अब पहले से कहीं अधिक कठिन होगा। जापानी सरकार ने पीआर के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये नियम 1 अगस्त से प्रभावी होंगे, जबकि आवेदनों की जांच अप्रैल 2027 से शुरू होगी।
नए नियमों के तहत आवेदक की वार्षिक आय जापानी नागरिकों की औसत घरेलू आय से अधिक होना जरूरी है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थायी निवास पाने वाला व्यक्ति भविष्य में सार्वजनिक सहायता पर निर्भर न रहे। पेंशन व्यवस्था भी सख्त की गई है; आवेदक को जापान की कर्मचारी पेंशन बीमा प्रणाली में 30 वर्ष के योगदान के बराबर अनुमानित पेंशन लाभ दिखाना होगा। यदि ऐसा संभव नहीं है तो उसे पर्याप्त निजी बचत या निवेश के जरिये अपनी आर्थिक क्षमता साबित करनी होगी।
जापानी भाषा दक्षता और स्थानीय सामाजिक नियमों की समझ का मूल्यांकन भी होगा। बच्चों का नियमित विद्यालय में नामांकन भी आवश्यक है। कर, पेंशन और स्वास्थ्य बीमा भुगतान में एक भी देरी पीआर आवेदन खारिज कर सकती है। इन सभी रिकॉर्ड की निगरानी जापान की माई नंबर डिजिटल पहचान प्रणाली से की जाएगी। सामान्य श्रेणी के विदेशी नागरिकों को अब पीआर आवेदन से पहले पांच वर्ष की निवास वीजा अवधि पूरी करनी होगी जो पहले तीन वर्ष थी।
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नए नियमों के तहत आवेदक की वार्षिक आय जापानी नागरिकों की औसत घरेलू आय से अधिक होना जरूरी है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थायी निवास पाने वाला व्यक्ति भविष्य में सार्वजनिक सहायता पर निर्भर न रहे। पेंशन व्यवस्था भी सख्त की गई है; आवेदक को जापान की कर्मचारी पेंशन बीमा प्रणाली में 30 वर्ष के योगदान के बराबर अनुमानित पेंशन लाभ दिखाना होगा। यदि ऐसा संभव नहीं है तो उसे पर्याप्त निजी बचत या निवेश के जरिये अपनी आर्थिक क्षमता साबित करनी होगी।
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जापानी भाषा दक्षता और स्थानीय सामाजिक नियमों की समझ का मूल्यांकन भी होगा। बच्चों का नियमित विद्यालय में नामांकन भी आवश्यक है। कर, पेंशन और स्वास्थ्य बीमा भुगतान में एक भी देरी पीआर आवेदन खारिज कर सकती है। इन सभी रिकॉर्ड की निगरानी जापान की माई नंबर डिजिटल पहचान प्रणाली से की जाएगी। सामान्य श्रेणी के विदेशी नागरिकों को अब पीआर आवेदन से पहले पांच वर्ष की निवास वीजा अवधि पूरी करनी होगी जो पहले तीन वर्ष थी।
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मुख्य बदलाव और प्रभाव
ये बदलाव उन भारतीय पेशेवरों पर अधिक असर डालेंगे जो जापान में लंबे समय तक बसने की योजना बना रहे हैं। माना जा रहा है कि इससे मध्यम आय वर्ग के विदेशी कर्मचारियों के लिए पीआर प्राप्त करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
जापान ने सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवरों की भर्ती की है। भारत-जापान के मजबूत होते आर्थिक संबंधों के बीच भारतीयों की मांग बढ़ रही है जिस पर नए नियम सीधा असर डालेंगे।
विशेषज्ञों की राय और राहत
अंतरराष्ट्रीय शिक्षण एवं आव्रजन मामलों के जानकार प्रोफेसर करमजीत सिंह बराड़ के अनुसार, जापान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से एकीकृत लोगों को स्थायी निवास देना चाहता है। उन्होंने कहा कि कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की तुलना में जापान में पीआर हासिल करना पहले से ही आसान नहीं था, अब यह प्रक्रिया और कठोर होगी।
जापान की हाईली स्किल्ड प्रोफेशनल प्रणाली के तहत योग्य विशेषज्ञों को राहत मिलेगी। वे उच्च योग्यता और बेहतर आय के आधार पर अपेक्षाकृत कम समय में आवेदन कर सकेंगे पर उन्हें भी कर, पेंशन और अन्य सार्वजनिक दायित्वों से जुड़े नए मानकों का पूरी तरह पालन करना होगा।
ये बदलाव उन भारतीय पेशेवरों पर अधिक असर डालेंगे जो जापान में लंबे समय तक बसने की योजना बना रहे हैं। माना जा रहा है कि इससे मध्यम आय वर्ग के विदेशी कर्मचारियों के लिए पीआर प्राप्त करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
जापान ने सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवरों की भर्ती की है। भारत-जापान के मजबूत होते आर्थिक संबंधों के बीच भारतीयों की मांग बढ़ रही है जिस पर नए नियम सीधा असर डालेंगे।
विशेषज्ञों की राय और राहत
अंतरराष्ट्रीय शिक्षण एवं आव्रजन मामलों के जानकार प्रोफेसर करमजीत सिंह बराड़ के अनुसार, जापान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से एकीकृत लोगों को स्थायी निवास देना चाहता है। उन्होंने कहा कि कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की तुलना में जापान में पीआर हासिल करना पहले से ही आसान नहीं था, अब यह प्रक्रिया और कठोर होगी।
जापान की हाईली स्किल्ड प्रोफेशनल प्रणाली के तहत योग्य विशेषज्ञों को राहत मिलेगी। वे उच्च योग्यता और बेहतर आय के आधार पर अपेक्षाकृत कम समय में आवेदन कर सकेंगे पर उन्हें भी कर, पेंशन और अन्य सार्वजनिक दायित्वों से जुड़े नए मानकों का पूरी तरह पालन करना होगा।