सीट का समीकरण: लुधियाना पूर्वी में तीनों दलों के दिग्गज आमने-सामने, भाजपा-अकाली साथ आए तो बदलेगा समीकरण
लुधियाना पूर्वी विधानसभा क्षेत्र अति-सघन आबादी वाला इलाका है। यहां औद्योगिक क्षेत्र के साथ बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रहते हैं। विकास की धीमी रफ्तार और स्थानीय समस्याएं इस बार चुनावी मुद्दा बन सकती हैं।
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पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। लुधियाना पूर्वी में इस बार भी मुकाबला दिलचस्प रहने के आसार हैं।
आम आदमी पार्टी के मौजूदा विधायक दलजीत सिंह ग्रेवाल भोला, कांग्रेस के पूर्व विधायक संजीव तलवाड़ और शिरोमणि अकाली दल के पूर्व विधायक रंजीत सिंह ढिल्लों प्रमुख दावेदारों के रूप में मैदान में हैं। प्रवासी मतदाताओं की बड़ी संख्या के कारण भाजपा भी यहां मजबूत दावेदार मानी जा रही है। अकाली दल और भाजपा का गठबंधन हुआ तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है जबकि अलग-अलग चुनाव लड़ने पर मुकाबला चतुष्कोणीय होने के आसार हैं।
2022 में भोला ने 35 हजार से ज्यादा वोटों से जीता था चुनाव
2022 के विधानसभा चुनाव में आप के दलजीत सिंह ग्रेवाल भोला ने 68,682 वोट लेकर जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल मतों का 47.54 प्रतिशत वोट मिला था। कांग्रेस के संजीव तलवाड़ को 32,760 वोट यानी 22.67 प्रतिशत और अकाली दल के रंजीत सिंह ढिल्लों को 20,377 वोट यानी 14.10 प्रतिशत मिले थे। भाजपा के जगमोहन शर्मा 18,074 वोट लेकर 12.51 प्रतिशत मतों के साथ चौथे स्थान पर रहे थे। भोला ने करीब 35 हजार वोट के अंतर से जीत दर्ज की थी।
बुड्ढा नाला और कचरे का पहाड़ बने सबसे बड़े सवाल
2022 के चुनाव में आप ने बुड्ढा नाले के प्रदूषण का स्थायी समाधान करने उद्योगों के रसायनयुक्त पानी के अवैध बहाव पर रोक लगाने और ताजपुर रोड स्थित कचरे के पहाड़ का जैविक उपचार कराने के वादे किए थे। नाले के किनारे बसी बस्तियों को प्रदूषण से राहत देने सीवरेज व्यवस्था सुधारने और जलभराव रोकने के लिए नई जलनिकासी व्यवस्था विकसित करने का भी भरोसा दिया गया था।
इसके अलावा ग्लाडा की अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने नगर निगम में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने आम आदमी क्लीनिकों के जरिये बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने और क्षेत्र को नशामुक्त बनाने के दावे किए गए थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बुड्ढा नाले की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। बारिश के दौरान रसायनयुक्त गंदा पानी रिहाइशी इलाकों में पहुंच जाता है। ताजपुर रोड कचरा डंप में आग लगने से उठने वाला धुआं भी परेशानी का कारण है। ताजपुर रोड और राहों रोड की कॉलोनियों में सीवरेज ओवरफ्लो और दूषित पानी की समस्या बनी हुई है। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें भी जर्जर हैं। नशे की खरीद-फरोख्त और छोटी आपराधिक घटनाएं भी चुनौती हैं।
जमीनी स्तर पर भोला की पकड़ अब भी मजबूत मानी जाती है। हालांकि लंबे समय से चले आ रहे बुड्ढा नाला और कचरा डंप के मुद्दों पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने से मतदाताओं का एक वर्ग नाराज है। कांग्रेस संजीव तलवाड़ के नेतृत्व में सीवरेज दूषित पानी और सड़कों के मुद्दे उठा रही है। अकाली दल के रंजीत सिंह ढिल्लों का संगठन भी सक्रिय है।
पूर्वी विधानसभा क्षेत्र का गठन 1977 में हुआ था। अब तक यहां कांग्रेस का सबसे अधिक दबदबा रहा है। कांग्रेस के ओमप्रकाश गुप्ता ने 1977 1980 और 1985 में जीत दर्ज की। भाजपा के सतपाल गोसाईं 1992 1997 और 2007 में विजयी रहे। कांग्रेस के सुरिंदर डावर ने 2002 में और शिअद के रंजीत सिंह ढिल्लों ने 2012 में जीत हासिल की। 2017 में कांग्रेस के संजीव तलवाड़ विधायक बने। इस क्षेत्र से अब तक किसी महिला उम्मीदवार को टिकट नहीं मिला है।
कांग्रेस के सुरिंदर डावर ने 16,311 वोट के अंतर से सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी जबकि ओमप्रकाश गुप्ता 1977 में महज 1,029 वोट के अंतर से जीते थे।
2022 में किसे कितने वोट
आप के दलजीत सिंह ग्रेवाल भोला : 68,682 (47.54%)
कांग्रेस के संजीव तलवाड़ : 32,760 (22.67%)
अकाली दल के रंजीत सिंह ढिल्लों : 20,377 (14.10%)
भाजपा के जगमोहन शर्मा : 18,074 (12.51%)