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Ludhiana News: वार्डबंदी का नक्शा बना सियासी बवाल की जड़, काउंसिल खन्ना में हंगामा
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-कांग्रेस का आरोप- सत्ता के दुरुपयोग से बदले जा रहे राजनीतिक समीकरण
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खन्ना। नगर काउंसिल खन्ना में प्रस्तावित वार्डबंदी को लेकर शुक्रवार शाम उस समय सियासी घमासान छिड़ गया, जब कांग्रेस पार्षदों ने आम आदमी पार्टी सरकार और नगर काउंसिल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा और नारेबाजी की। वार्डबंदी का नक्शा समय पर सार्वजनिक न करने और जानबूझकर पार्षदों को भ्रम में रखने के आरोपों ने पूरे मामले को विवादों के केंद्र में ला खड़ा किया है।
नगर काउंसिल प्रधान एवं कांग्रेस नेता कमलजीत सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हाउस मीटिंग के लिए आधिकारिक कॉल पहले ही दी जा चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद कार्यकारी अधिकारी (ईओ) चरणजीत सिंह ने शाम पांच बजे मीटिंग शुरू होने से महज पांच मिनट पहले वार्डबंदी का नक्शा मीटिंग हॉल में लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईओ खुद वही नक्शा हाथ में लेकर हॉल में पहुंचे।
अंधेरे में नक्शा लगाने का आरोप
कमलजीत सिंह ने आरोप लगाया कि जब वे अन्य कांग्रेसी पार्षदों के साथ मीटिंग हॉल पहुंचे तो वहां जानबूझकर अंधेरा किया गया था। उन्होंने दावा किया कि बिजली कटवाकर यह दिखाने की कोशिश की गई कि नक्शा पहले ही लगाया जा चुका है। इस घटना के बाद मीटिंग हॉल में भारी हंगामा हुआ और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई, जिसके बाद लाइट बहाल की गई।
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31 तक दर्ज हो सकते हैं एतराज
नियमों के अनुसार 31 तारीख तक वार्डबंदी पर आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। कांग्रेस का आरोप है कि बीच में रविवार की छुट्टी डालकर समय जानबूझकर कम किया गया। आम जनता और पार्षदों को बोलने का पूरा मौका नहीं मिल रहा। प्रधान ने कहा कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण है।
प्रशासन ने आरोप किए खारिज
नगर काउंसिल के ईओ चरणजीत सिंह ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वार्डबंदी का नक्शा नियमानुसार तय समय पर लगाया गया है और सोमवार तक नगर काउंसिल परिसर में सार्वजनिक रहेगा। वार्डबंदी को लेकर बढ़ते विवाद से शहर का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने इसे जनता के अधिकारों पर हमला बताया है, जबकि सरकार नियमों के तहत प्रक्रिया पूरी होने का दावा कर रही है। प्रधान ने चेतावनी दी कि यदि आपत्तियों को गंभीरता से नहीं सुना गया, तो मामला अदालत तक पहुंच सकता है।
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खन्ना। नगर काउंसिल खन्ना में प्रस्तावित वार्डबंदी को लेकर शुक्रवार शाम उस समय सियासी घमासान छिड़ गया, जब कांग्रेस पार्षदों ने आम आदमी पार्टी सरकार और नगर काउंसिल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा और नारेबाजी की। वार्डबंदी का नक्शा समय पर सार्वजनिक न करने और जानबूझकर पार्षदों को भ्रम में रखने के आरोपों ने पूरे मामले को विवादों के केंद्र में ला खड़ा किया है।
नगर काउंसिल प्रधान एवं कांग्रेस नेता कमलजीत सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हाउस मीटिंग के लिए आधिकारिक कॉल पहले ही दी जा चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद कार्यकारी अधिकारी (ईओ) चरणजीत सिंह ने शाम पांच बजे मीटिंग शुरू होने से महज पांच मिनट पहले वार्डबंदी का नक्शा मीटिंग हॉल में लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईओ खुद वही नक्शा हाथ में लेकर हॉल में पहुंचे।
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अंधेरे में नक्शा लगाने का आरोप
कमलजीत सिंह ने आरोप लगाया कि जब वे अन्य कांग्रेसी पार्षदों के साथ मीटिंग हॉल पहुंचे तो वहां जानबूझकर अंधेरा किया गया था। उन्होंने दावा किया कि बिजली कटवाकर यह दिखाने की कोशिश की गई कि नक्शा पहले ही लगाया जा चुका है। इस घटना के बाद मीटिंग हॉल में भारी हंगामा हुआ और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई, जिसके बाद लाइट बहाल की गई।
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31 तक दर्ज हो सकते हैं एतराज
नियमों के अनुसार 31 तारीख तक वार्डबंदी पर आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। कांग्रेस का आरोप है कि बीच में रविवार की छुट्टी डालकर समय जानबूझकर कम किया गया। आम जनता और पार्षदों को बोलने का पूरा मौका नहीं मिल रहा। प्रधान ने कहा कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण है।
प्रशासन ने आरोप किए खारिज
नगर काउंसिल के ईओ चरणजीत सिंह ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वार्डबंदी का नक्शा नियमानुसार तय समय पर लगाया गया है और सोमवार तक नगर काउंसिल परिसर में सार्वजनिक रहेगा। वार्डबंदी को लेकर बढ़ते विवाद से शहर का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने इसे जनता के अधिकारों पर हमला बताया है, जबकि सरकार नियमों के तहत प्रक्रिया पूरी होने का दावा कर रही है। प्रधान ने चेतावनी दी कि यदि आपत्तियों को गंभीरता से नहीं सुना गया, तो मामला अदालत तक पहुंच सकता है।