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पंजाब में हरियाणा के सीएम सैनी: नाभा रियासत में दस्तारबंदी पर शाही परिवार को बधाई दी, AAP सरकार पर निशाना साधा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Tue, 03 Feb 2026 10:26 PM IST
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सार
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मंगलवार को पटियाला के नाभा पहुंचे थे। यहां उन्होंने नाभा रियासत के महाराजा रिपुदमन सिंह के परिवार में कुंवर अभि उदय प्रताप सिंह की दस्तारबंदी के लिए उन्हें बधाई दी।
नाभा में शाही परिवार के सदस्यों के साथ हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मंगलवार को नाभा रियासत के महाराजा रिपुदमन सिंह के परिवार में कुंवर अभि उदय प्रताप सिंह की दस्तारबंदी में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि शाही परिवार ने 124 साल पुरानी परंपरा को कायम रखा, जिसके लिए उन्हें बधाई। सैनी ने उम्मीद जताई कि कुंवर अभि उदय प्रताप सिंह अपने पूर्वजों की तरह पंजाब और सिखी की सेवा करेंगे।
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पत्रकारों से बातचीत में सैनी ने पंजाब की वर्तमान सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था दिन-ब-दिन बिगड़ रही है, चोरी-डकैती और अखाड़ों में हत्या बढ़ रही है, जबकि नशे का कारोबार भी तेजी से फैल रहा है। उन्होंने पंजाब सरकार पर आरोप लगाया कि महिलाओं को वादा किए गए 1100 रुपये भत्ते का भुगतान अभी तक नहीं हुआ।
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सीएम सैनी ने कहा कि जनता भ्रष्टाचार और दफ्तरों में रिश्वतखोरी से त्रस्त है और इसलिए पंजाब में सत्ता बदलाव चाहता है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की सरकार आने पर पंजाब को तरक्की की नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा।
नाभा रियासत में 124 साल बाद लौटी शाही परंपरा
पटियाला जिले के नाभा स्थित हीरा महल में सोमवार को सिख और शाही परंपराओं का ऐतिहासिक संगम देखने को मिला। करीब 124 वर्षों के अंतराल के बाद नाभा रियासत में शाही दस्तारबंदी की परंपरा को पुनर्जीवित किया गया। नाभा रियासत के प्रतिष्ठित महाराजा रिपुदमन सिंह के प्रपौत्र कुंवर अभि उदय प्रताप सिंह की दस्तारबंदी रस्म पूरे धार्मिक और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर कुंवर अभि उदय प्रताप सिंह भावुक नजर आए और उन्होंने अपने पूर्वजों की तरह पंजाब और सिख धर्म की सेवा करने की इच्छा जताई।
48 घंटे तक एक चौंकड़े में बैठकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ
दस्तारबंदी से पूर्व गुरुद्वारा दरबार सिरोपाओ साहिब में 48 घंटे तक एक चौंकड़े में बैठकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ किया गया। पाठ की समाप्ति पर अरदास गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब के हेड ग्रंथी भाई हरपाल सिंह ने की। इसके उपरांत पारंपरिक मर्यादा के अनुसार कुंवर अभि उदय प्रताप सिंह की दस्तारबंदी की रस्म अदा की गई।
विशिष्ट हस्तियों की रही मौजूदगी
ऐतिहासिक अवसर की गवाह बनी कई हस्तियां
इस ऐतिहासिक अवसर पर डेरा ब्यास प्रमुख संत गुरिंदर सिंह ढिल्लों, पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और पर्यटन मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद विशेष रूप से उपस्थित रहे। कुंवर अभि उदय प्रताप सिंह, महाराजा रिपुदमन सिंह के वंशज भानु प्रताप सिंह और रानी प्रीति सिंह नाभा के पुत्र हैं। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि करीब 124 वर्ष पहले इसी स्थान पर भाई काहन सिंह नाभा के पिता भाई नारायण सिंह ने एक चौंकड़े में बैठकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ किया था। उसी परंपरा को दोहराया जाना गर्व का विषय है। विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि जिस तरह महाराजा रिपुदमन सिंह ने पंजाब, सिख धर्म और देश की सेवा की, उसी तरह उनके वंशजों से भी समाज को बड़ी उम्मीदें हैं। पर्यटन मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दीवान टोडर मल हेरिटेज फाउंडेशन के माध्यम से रानी प्रीति सिंह द्वारा ऐतिहासिक विरासत को सहेजने के प्रयासों की सराहना की।
परिवार ने जताया आभार
महारानी उमा सिंह, भानु प्रताप सिंह और रानी प्रीति सिंह नाभा ने संगत और अतिथियों का आभार जताया। कुंवर अभि उदय प्रताप सिंह ने कहा कि हर सिख परिवार को अपने बच्चों की दस्तारबंदी अवश्य करनी चाहिए ताकि नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़ी रहे। उनकी माता ने बताया कि बेटे की स्वयं की इच्छा पर यह रस्म कराई गई है और उन्होंने संगत से उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए अरदास करने की अपील की। कार्यक्रम में अनेक संत-महापुरुष, धार्मिक नेता, शिरोमणि कमेटी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी, नामधारी संस्था के प्रतिनिधि, पद्मश्री जगजीत सिंह दर्दी सहित देश-विदेश से आए सिख बुद्धिजीवी और संगत बड़ी संख्या में उपस्थित रही।
