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पंजाब में मानसून रूठा, खेत सूखे: अगस्त में 32% कम बारिश से धान पर संकट, किसानों की चिंताएं बढ़ी

Wed, 26 Aug 2026 08:41 AM IST
Nivedita राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 26 Aug 2026 08:41 AM IST
सार

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की पैदावार में करीब 20 फीसदी तक की गिरावट हो सकती है। धान की फसल के लिए इस समय पर्याप्त पानी बेहद जरूरी होता है। कम बारिश के कारण किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

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Rain deficit in Punjab 26% less rainfall in first 24 days of August 13 districts, in 'red zone'
पंजाब में कम हो रही बरसात - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अगस्त माह में प्रदेश में सामान्य से औसत 32 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की कमी के कारण पंजाब उन चार राज्यों में शामिल है जहां अगस्त में सबसे कम बारिश हुई। इसका सीधा असर धान की फसल पर पड़ने की आशंका है।
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की पैदावार में करीब 20 फीसदी तक की गिरावट हो सकती है। धान की फसल के लिए इस समय पर्याप्त पानी बेहद जरूरी होता है। कम बारिश के कारण किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे उनकी लागत भी बढ़ रही है।
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मानसून की बारिश में कमी का असर भूजल स्तर पर भी दबाव बढ़ा सकता है। बिहार में अगस्त के दौरान सबसे अधिक 41 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है। आंध्र प्रदेश में 38 और कर्नाटक में 22 फीसदी कम बारिश हुई है। पूरे देश में इस बार 13 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। 1 जून से 24 अगस्त तक पंजाब में औसत से 33 फीसदी कम बारिश हुई है।
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खरीफ फसलों पर असर  
कम बारिश का सबसे ज्यादा असर धान की पैदावार पर पड़ेगा। धान की खेती के लिए सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा कपास, मक्का और मूंग की खेती भी प्रभावित होने की आशंका है। कम बारिश के कारण फसलों में विभिन्न प्रकार के रोग और कीटों का खतरा भी बढ़ सकता है। पिछले वर्ष प्रदेश में बाढ़ से करीब पांच लाख एकड़ फसल खराब हुई थी। इस बार सूखे के कारण संकट खड़ा हो गया है।

धान खरीद लक्ष्य पर प्रभाव 
कम बारिश का असर राज्य सरकार के धान खरीद लक्ष्य पर भी पड़ सकता है। इस वर्ष 180 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया गया है। पिछले वर्ष भी सरकार ने 180 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा था। मंडियों में 190 लाख मीट्रिक टन तक की तैयारी की गई थी। इसके बावजूद केवल 156 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हो सकी। यह वर्ष 2016 के बाद सबसे कम खरीद रही थी, जब 140 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था।


कृषि विशेषज्ञों की राय  
पंजाब विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर हर्ष नैयर ने बताया कि अगस्त में पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की पैदावार में 20 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। फसलों को कई तरह के रोग लगने का खतरा भी बढ़ गया है। कपास की फसल भी 10 से 15 फीसदी प्रभावित हो सकती है। हरे चारे की पैदावार में भी 15 फीसदी की कमी आ सकती है। इसका सीधा असर और भार किसानों पर पड़ेगा।
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