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देश में दो तरह के कानून क्यों: ज्ञानी हरप्रीत

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 09:27 PM IST
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Why are there two different sets of laws in the country?: Giani Harpreet
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अमृतसर। शिरोमणि अकाली दल (पुनर्गठित) के अध्यक्ष एवं श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने 1984 के सिख नरसंहार के दोषियों की बरी की गई अदालत की फैसलों पर गहरा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि भारत में ऐसा प्रतीत होता है कि दो प्रकार के कानून हैं—एक अल्पसंख्यकों के लिए और दूसरा बहुसंख्यकों के लिए। ज्ञानी हरप्रीत ने बताया कि 1984 में दिल्ली, बोकारो, कानपुर समेत कई शहरों में हजारों सिखों को जिंदा जलाया गया और महिलाओं के साथ दुष्कर्म किए गए। बावजूद इसके, दोषियों को लंबे समय तक न्याय के कटघरे में नहीं लाया गया और कई आसानी से बरी हो गए। उन्होंने कहा कि आज भी सिख युवाओं को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निरंतर कैद में रखा जा रहा है, जबकि नरसंहार के दोषी मुक्त घूम रहे हैं। यह सिख समुदाय के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है। संवाद
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