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Ajmer News: उर्स के दौरान वीआईपी चादर पेश करने पर रोक की मांग, अदालत ने आदेश सुरक्षित रखा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
Published by: अजमेर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Dec 2025 10:38 PM IST
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सार
अजमेर उर्स में चढ़ाई जाने वाली वीआईपी चादरों पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश को रिजर्व रखा है। गौरतलब है कि उर्स के मौके पर प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों की ओर से दरगाह पर चादर चढ़ाई जाती है।
हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता पहुंचे अजमेर कोर्ट
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विस्तार
अजमेर दरगाह में उर्स के दौरान प्रधानमंत्री सहित अन्य संवैधानिक पदों की ओर से चढ़ाई जाने वाली वीआईपी चादर पर रोक लगाने की मांग को लेकर बुधवार को लिंक कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता द्वारा दायर प्रार्थना पत्र पर वादी पक्ष की ओर से बहस पूरी कर ली गई, जबकि प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद न्यायालय ने आदेश को रिजर्व रख लिया।
विष्णु गुप्ता जो इससे पूर्व दरगाह में संकट मोचन शिव मंदिर होने का दावा करते हुए वाद दायर कर चुके हैं, ने इस बार उर्स के दौरान पेश होने वाली वीआईपी चादर को लेकर रोक लगाने की मांग की है। गुप्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा है कि उर्स के अवसर पर प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों की ओर से अल्पसंख्यक मंत्रालय के माध्यम से दरगाह में चादर पेश की जाती है। यह चादर पेश होने के बाद मंत्रालय की ओर से इसकी फोटो व वीडियो आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाते हैं, जिससे उनके विधिक अधिकारों का हनन हो रहा है।
बुधवार को इस मामले की सुनवाई नियोजित रूप से अजमेर न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-दो मनमोहन चंदेल की अदालत में होनी थी, लेकिन जज के अवकाश पर होने के कारण इसे लिंक कोर्ट में सुना गया। वादी पक्ष के साथ हाईकोर्ट के एडवोकेट संदीप कुमार भी अदालत में मौजूद रहे। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उर्स प्रारंभ होने वाला है और किसी भी समय प्रधानमंत्री की ओर से चादर पेश हो सकती है, इसलिए मामले में त्वरित रोक आवश्यक है।
ये भी पढ़ें: Ajmer News: अजमेर दरगाह को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई मेल, घंटों चला सर्च ऑपरेशन, नहीं मिली कोई संदिग्ध वस्तु
एडवोकेट संदीप कुमार ने यह भी बताया कि प्रतिवादी पक्ष को 8 दिसंबर को ही नोटिस जारी कर दिए गए थे, बावजूद इसके सुनवाई के दौरान उनकी ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वादी पक्ष से कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा, जिनका जवाब देते हुए एडवोकेट ने वेबसाइट पर प्रकाशित फोटो और वीडियो को वादी के अधिकारों का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में तत्काल आदेश आवश्यक है, ताकि उर्स के दौरान वीआईपी चादर पेश करने की परंपरा को रोका जा सके।
सुनवाई के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर सिविल लाइंस थाना पुलिस का जाब्ता भी अदालत परिसर में तैनात किया गया था। चूंकि मामला धार्मिक भावनाओं और संवैधानिक पदों से जुड़ा हुआ है, इसलिए प्रशासनिक स्तर पर भी इसे संवेदनशील मानते हुए सतर्कता बढ़ाई गई है।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने प्रार्थना पत्र पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब न्यायालय के निर्णय का इंतजार है, जो यह तय करेगा कि उर्स के दौरान संवैधानिक पदाधिकारियों की ओर से चादर पेश करने की प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगाई जाएगी या यह परंपरा पूर्ववत जारी रहेगी।
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विष्णु गुप्ता जो इससे पूर्व दरगाह में संकट मोचन शिव मंदिर होने का दावा करते हुए वाद दायर कर चुके हैं, ने इस बार उर्स के दौरान पेश होने वाली वीआईपी चादर को लेकर रोक लगाने की मांग की है। गुप्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा है कि उर्स के अवसर पर प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों की ओर से अल्पसंख्यक मंत्रालय के माध्यम से दरगाह में चादर पेश की जाती है। यह चादर पेश होने के बाद मंत्रालय की ओर से इसकी फोटो व वीडियो आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाते हैं, जिससे उनके विधिक अधिकारों का हनन हो रहा है।
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बुधवार को इस मामले की सुनवाई नियोजित रूप से अजमेर न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-दो मनमोहन चंदेल की अदालत में होनी थी, लेकिन जज के अवकाश पर होने के कारण इसे लिंक कोर्ट में सुना गया। वादी पक्ष के साथ हाईकोर्ट के एडवोकेट संदीप कुमार भी अदालत में मौजूद रहे। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उर्स प्रारंभ होने वाला है और किसी भी समय प्रधानमंत्री की ओर से चादर पेश हो सकती है, इसलिए मामले में त्वरित रोक आवश्यक है।
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एडवोकेट संदीप कुमार ने यह भी बताया कि प्रतिवादी पक्ष को 8 दिसंबर को ही नोटिस जारी कर दिए गए थे, बावजूद इसके सुनवाई के दौरान उनकी ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वादी पक्ष से कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा, जिनका जवाब देते हुए एडवोकेट ने वेबसाइट पर प्रकाशित फोटो और वीडियो को वादी के अधिकारों का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में तत्काल आदेश आवश्यक है, ताकि उर्स के दौरान वीआईपी चादर पेश करने की परंपरा को रोका जा सके।
सुनवाई के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर सिविल लाइंस थाना पुलिस का जाब्ता भी अदालत परिसर में तैनात किया गया था। चूंकि मामला धार्मिक भावनाओं और संवैधानिक पदों से जुड़ा हुआ है, इसलिए प्रशासनिक स्तर पर भी इसे संवेदनशील मानते हुए सतर्कता बढ़ाई गई है।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने प्रार्थना पत्र पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब न्यायालय के निर्णय का इंतजार है, जो यह तय करेगा कि उर्स के दौरान संवैधानिक पदाधिकारियों की ओर से चादर पेश करने की प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगाई जाएगी या यह परंपरा पूर्ववत जारी रहेगी।

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