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दरगाह शिव मंदिर विवाद: चिश्ती ने किया कोर्ट के फैसले का स्वागत, कहा- गरीब नवाज की दरगाह देती है अमन का पैगाम
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, अजमेर
Published by: अजमेर ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 06:24 PM IST
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सार
Ajmer News: अजमेर दरगाह शिव मंदिर विवाद मामले में अदालत द्वारा सुनवाई का अधिकार दिए जाने पर नसरुद्दीन चिश्ती ने फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि गरीब नवाज की दरगाह अमन और भाईचारे का संदेश देती है तथा दरगाह पक्ष कानूनी रूप से मजबूती से अपना पक्ष रखेगा।
दरगाह शिव मंदिर विवाद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अजमेर में ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में शिव मंदिर विवाद मामले को लेकर न्यायालय द्वारा सुनाए गए महत्वपूर्ण फैसले का दरगाह दीवान के उत्तराधिकारी और ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन नसरुद्दीन चिश्ती ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह मानते हुए दरगाह दीवान पक्ष को सुनवाई का अधिकार दिया है कि उनका ख्वाजा गरीब नवाज से खून का रिश्ता है और ऐसे मामलों में उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
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नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि न्यायालय का यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें अन्य प्रतिवादियों पर जुर्माना भी लगाया गया है। उनके अनुसार अदालत ने स्पष्ट किया है कि दरगाह दीवान की ओर से भी पक्ष रखा जाना आवश्यक है।
कानूनी प्रक्रिया के तहत मजबूती से रखा जाएगा पक्ष
नसरुद्दीन चिश्ती ने विश्वास जताया कि दरगाह पक्ष इस मामले में मजबूती से अपना पक्ष रखेगा और कानूनी प्रक्रिया के तहत पूरी गंभीरता से केस लड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय में तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही न्याय मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि दरगाह हमेशा से भाईचारे, अमन और इंसानियत का संदेश देती रही है। गरीब नवाज की दरगाह से देश-दुनिया में शांति और सौहार्द का पैगाम जाता है और करोड़ों अकीदतमंदों की आस्था इससे जुड़ी हुई है।
करोड़ों अकीदतमंदों की भावनाओं से जुड़ा मामला
नसरुद्दीन चिश्ती ने न्यायालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला केवल दरगाह दीवान परिवार के लिए ही नहीं बल्कि दरगाह से जुड़े करोड़ों अकीदतमंदों की भावनाओं के लिए भी अहम है। उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा सुनवाई का अधिकार दिए जाने से दरगाह पक्ष अपनी बात प्रभावी तरीके से रख सकेगा।
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उन्होंने यह भी कहा कि दरगाह और सूफी परंपरा हमेशा से सामाजिक सौहार्द और धार्मिक सद्भाव का प्रतीक रही है तथा सभी समुदायों के लोग यहां श्रद्धा के साथ आते हैं।
फैसले के बाद मामले पर बढ़ी कानूनी और सामाजिक चर्चा
न्यायालय के इस फैसले के बाद अजमेर दरगाह से जुड़े इस मामले पर कानूनी और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। दरगाह पक्ष इसे अपने लिए महत्वपूर्ण कानूनी अवसर मान रहा है, जबकि आने वाले समय में अदालत में इस मामले की सुनवाई और साक्ष्यों पर सभी पक्षों की निगाहें बनी रहेंगी।