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Balotra News: भीषण गर्मी में आरक्षण उपवर्गीकरण की मांग को लेकर सड़क पर उतरे लोग, सीएम का पुतला फूंका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा
Published by: बालोतरा ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2026 04:20 PM IST
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सार
डीएनटी, वंचित ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों के संयुक्त आंदोलन ने बालोतरा में शक्ति प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने आरक्षण उपवर्गीकरण की मांग को लेकर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और जमकर नारेबाजी की।
आरक्षण उपवर्गीकरण की मांग को लेकर सीएम का पुतला फूंका
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले में वंचित वर्गों के अधिकारों और आरक्षण उपवर्गीकरण की मांग को लेकर बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला। राष्ट्रीय पशुपालक संघ, डीएनटी संघर्ष समिति और मूल ओबीसी महापंचायत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जेल भरो आंदोलन ने पश्चिमी राजस्थान की राजनीति और सामाजिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है।
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भीषण गर्मी और 46 डिग्री तापमान के बावजूद हजारों लोग सड़कों पर उतरे और करीब 6 किलोमीटर लंबी रैली निकालकर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री का पुतला भी फूंका।
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आंदोलनकारी संगठनों ने ऐलान किया कि यह अभियान अब राजस्थान के हर जिले तक पहुंचाया जाएगा और 1 जुलाई को जयपुर में विशाल महापड़ाव आयोजित किया जाएगा। आंदोलनकारियों ने इसे वंचित वर्गों की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी की निर्णायक लड़ाई बताया।
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शहर में सुबह से ही अलग-अलग गांवों और कस्बों से लोग झंडे और बैनर लेकर पहुंचने लगे। रैली में डीएनटी समाज, वंचित ओबीसी, वंचित एससी और वंचित एसटी वर्ग के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। भीषण गर्मी के बावजूद महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं का उत्साह देखने लायक था। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंची, जहां प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालराम राईका ने बताया कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य डीएनटी (डिनोटिफाइड ट्राइब्स) समाज की 11 सूत्रीय मांगों को लागू करवाना है। इनमें सबसे प्रमुख मांग डीएनटी समाज को अलग से 10 प्रतिशत आरक्षण देने की है। आंदोलनकारियों का दावा है कि राजस्थान में डीएनटी समाज की आबादी करीब 1.23 करोड़ है लेकिन उन्हें शिक्षा, रोजगार और राजनीति में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया।
डीएनटी संघर्ष समिति के सह-अध्यक्ष रतन नाथ कालबेलिया ने आरोप लगाया कि पिछले महापड़ाव के बाद सरकार ने तीन महीने में समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन पांच महीने बीतने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े 78 लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए और छह लोगों को 18 दिन तक जेल में रखा गया। इसी के विरोध में अब जेल भरो आंदोलन शुरू किया गया है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था का लाभ कुछ सीमित वर्गों तक सिमट गया है, जबकि कई जातियां अब भी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी हुई हैं। आंदोलनकारी नेताओं ने मांग की कि अत्यंत पिछड़े और डीएनटी समाजों को अलग श्रेणी में शामिल कर न्यायपूर्ण आरक्षण व्यवस्था लागू की जाए।