सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Balotra News ›   Balotra News: Luni river pollution case reaches court, complaint filed against 26 CETP trust officials

Balotra: लूणी नदी प्रदूषण मामले में बड़ा एक्शन, CETP ट्रस्ट के 26 पदाधिकारियों पर परिवाद, अदालत पहुंचा मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा Published by: बालोतरा ब्यूरो Updated Sat, 13 Jun 2026 03:57 PM IST
विज्ञापन
सार

लूणी नदी प्रदूषण मामले में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। बिठूजा सीईटीपी ट्रस्ट के अध्यक्ष समेत 26 पदाधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में परिवाद पेश किया गया है, जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

Balotra News: Luni river pollution case reaches court, complaint filed against 26 CETP trust officials
लूणी नदी प्रदूषण मामले में कानूनी घेरे में सीईटीपी
विज्ञापन

विस्तार

पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली लूणी नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर अब कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने चर्चित लूणी नदी प्रदूषण मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए बिठूजा स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन करने वाले ट्रस्ट के अध्यक्ष समेत 26 पदाधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में परिवाद पेश किया है।



यह परिवाद बालोतरा स्थित सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ खंड) एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में दायर किया गया है। मंडल का आरोप है कि सीईटीपी प्रबंधन ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों और संचालन की निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया तथा औद्योगिक अपशिष्ट जल के प्रभावी उपचार में लापरवाही बरती।
विज्ञापन
विज्ञापन


पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी का आरोप
प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद के अनुसार बिठूजा स्थित बालोतरा वाटर पॉल्यूशन कंट्रोल ट्रीटमेंट एंड रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट पर जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
विज्ञापन


मंडल का कहना है कि ट्रस्ट द्वारा संचालित सीईटीपी में आने वाले औद्योगिक अपशिष्ट जल का समुचित उपचार सुनिश्चित नहीं किया गया। इसके चलते अनुपचारित अथवा आंशिक रूप से उपचारित जल के लूणी नदी क्षेत्र तक पहुंचने की आशंका और शिकायतें लगातार सामने आती रहीं। परिवाद में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों और नोटिसों के बावजूद आवश्यक सुधारात्मक कदम प्रभावी रूप से नहीं उठाए गए। इसी कारण मामले को न्यायालय तक ले जाने का निर्णय लिया गया।

ये भी पढ़ें: Rajasthan: चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर एएसआई का बड़ा एक्शन, 209 अवैध निर्माण चिन्हित; भू-माफियाओं में मचा हड़कंप

क्या है CETP की भूमिका?
बिठूजा क्षेत्र में स्थापित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) का मुख्य उद्देश्य वस्त्र रंगाई-छपाई एवं अन्य औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक उपचार करना है। यह संयंत्र जीरो लिक्विड डिस्चार्ज यानी शून्य अपशिष्ट जल निस्तारण की अवधारणा पर आधारित है, ताकि किसी भी स्थिति में प्रदूषित पानी प्राकृतिक जल स्रोतों या नदी में न पहुंचे। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रसायन युक्त जल का संग्रहण, उपचार और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप पुनः उपयोग सुनिश्चित करना सीईटीपी की प्रमुख जिम्मेदारी है। हालांकि मंडल का आरोप है कि संचालन के दौरान निर्धारित मानकों का पूर्ण पालन नहीं किया गया।

वर्षों से उठते रहे हैं सवाल
लूणी नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर पिछले कई वर्षों से पर्यावरणविद, सामाजिक संगठन, किसान और स्थानीय ग्रामीण चिंता जताते रहे हैं। नदी के जल की गुणवत्ता में गिरावट, कृषि भूमि पर प्रतिकूल प्रभाव, भूजल प्रदूषण और पशुधन पर पड़ रहे असर को लेकर लगातार आवाज उठाई जाती रही है। क्षेत्र के कई गांवों के लोगों ने आरोप लगाया कि औद्योगिक अपशिष्ट जल के कारण खेती प्रभावित हो रही है और जल स्रोतों की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है।

SIT जांच के बीच कार्रवाई का बढ़ा महत्व
हाल ही में राज्य सरकार द्वारा लूणी, जोजरी और बांडी नदियों में प्रदूषण की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) भी सक्रिय हुआ है। ऐसे समय में प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा सीईटीपी ट्रस्ट के पदाधिकारियों के खिलाफ अदालत में परिवाद दायर किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि न्यायालय में आरोप साबित होते हैं तो यह मामला प्रदेश में औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रमुख मामलों में शामिल हो सकता है। साथ ही इससे भविष्य में औद्योगिक इकाइयों और अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों की जवाबदेही भी तय होगी।

अदालत तय करेगी आगे की कार्रवाई
अब यह मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। अदालत परिवाद में प्रस्तुत तथ्यों, दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ जल प्रदूषण कानूनों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

लूणी नदी प्रदूषण को लेकर शुरू हुई यह कानूनी कार्रवाई केवल बालोतरा ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसका सीधा संबंध पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों की सुरक्षा और लाखों लोगों के जीवन से जुड़ा हुआ है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed