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Balotra News: लूनी, जोजरी और बांडी नदी प्रदूषण मामले में SIT का बड़ा एक्शन, औद्योगिक क्षेत्रों की जांच शुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा
Published by: बालोतरा ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2026 04:41 PM IST
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सार
लूनी, जोजरी और बांडी नदियों के प्रदूषण मामले में जांच तेज हो गई है। राज्य सरकार की हाई-लेवल टीम ने बालोतरा के औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा कर प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाओं और CETP की कार्यप्रणाली की समीक्षा की।
बालोतरा में SIT ने शुरू की व्यापक जांच
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली लूनी, जोजरी और बांडी नदियों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। वर्षों से औद्योगिक अपशिष्ट और दूषित जल के कारण प्रभावित इन नदियों की स्थिति का आकलन करने के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने गुरुवार को बालोतरा पहुंचकर व्यापक जांच अभियान शुरू किया।
वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से युक्त इस हाई-लेवल टीम ने औद्योगिक क्षेत्रों, प्रदूषण प्रभावित इलाकों और अपशिष्ट जल शोधन संयंत्रों (CETP) का निरीक्षण कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। टीम का उद्देश्य प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों की पहचान कर जिम्मेदार इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करना है।
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राज्य सरकार द्वारा गठित SIT में डीआईजी लवली कटियार, आईपीएस अधिकारी दिनेश विश्नोई, आरएसी कमांडेंट पंकज यादव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। उनके साथ राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के विशेषज्ञ, स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे।
बिठूजा औद्योगिक क्षेत्र जांच का केंद्र
जांच दल ने सबसे पहले बालोतरा के बिठूजा औद्योगिक क्षेत्र का दौरा किया, जहां बड़ी संख्या में वस्त्र प्रसंस्करण और रंगाई-छपाई से जुड़ी इकाइयां संचालित होती हैं। अधिकारियों ने विभिन्न फैक्ट्रियों में पहुंचकर उत्पादन प्रक्रिया, रसायनों के उपयोग, अपशिष्ट जल के संग्रहण और उसके निस्तारण की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। साथ ही यह भी जांचा गया कि कहीं बिना उपचारित दूषित जल को खुले क्षेत्रों, नालों या नदी तंत्र में तो नहीं छोड़ा जा रहा। सूत्रों के अनुसार टीम ने कई स्थानों से तकनीकी जानकारियां जुटाईं और संबंधित रिकॉर्ड व संचालन प्रक्रियाओं का भी परीक्षण किया।
CETP की कार्यप्रणाली पर विशेष फोकस
SIT का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बालोतरा स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) रहा। यह संयंत्र औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले दूषित पानी के शोधन का प्रमुख केंद्र है। अधिकारियों ने प्लांट की शोधन क्षमता, तकनीकी संसाधनों, जल उपचार प्रक्रिया और अपशिष्ट निस्तारण व्यवस्था का बारीकी से अध्ययन किया। जांच दल ने यह भी परखा कि संयंत्र वर्तमान औद्योगिक भार को संभालने में कितना सक्षम है और उपचारित जल निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप है या नहीं।
नदियों के अस्तित्व पर बढ़ता संकट
गौरतलब है कि लूनी, जोजरी और बांडी नदियां लंबे समय से प्रदूषण की समस्या से जूझ रही हैं। पर्यावरणविदों और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट के कारण नदी जल की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। इसका असर केवल नदी तंत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि भूमि, भूजल और स्थानीय जैव विविधता भी प्रभावित हो रही है। किसानों की ओर से भूमि की उर्वरता कम होने और भूजल की गुणवत्ता खराब होने की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं।
रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई
जांच के दौरान जुटाए गए तथ्यों, निरीक्षण रिपोर्ट और तकनीकी आंकड़ों के आधार पर SIT अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट में प्रदूषण के स्रोतों, जिम्मेदार इकाइयों और सुधारात्मक उपायों को लेकर महत्वपूर्ण सिफारिशें शामिल होंगी। यदि जांच में किसी औद्योगिक इकाई, संस्था या अन्य पक्ष की लापरवाही अथवा पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो उनके खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर SIT की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट तय करेगी कि वर्षों से उठ रहे नदी प्रदूषण के मुद्दे पर सरकार कितना सख्त कदम उठाती है और नदियों को स्वच्छ बनाने की दिशा में आगे क्या कार्रवाई होती है।