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Banswara News: अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश, फर्जी खातों से करोड़ों की ठगी; 4 गिरफ्तार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो Updated Sat, 02 May 2026 07:43 AM IST
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सार

‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’ के तहत बांसवाड़ा पुलिस ने फर्जी खातों के जरिए चल रहे साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

Banswara News: Interstate cyber fraud racket busted, crores siphoned through fake accounts; four arrested
आरोपियों को पेशी पर ले जाते पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जिले की साइबर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय ऑनलाइन ठगी नेटवर्क का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 1 से 30 अप्रैल तक चलाए गए विशेष अभियान ऑपरेशन म्यूल हंटर के तहत की गई, जिसका मकसद फर्जी बैंक खातों के जरिए चल रहे साइबर फ्रॉड के रैकेट को तोड़ना था।
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जांच के दौरान पुलिस के सामने हर्ष ट्रेडिंग नाम का एक बैंक खाता सामने आया, जो इस पूरे नेटवर्क का मुख्य केंद्र बना हुआ था। शुरुआती जांच में ही स्पष्ट हो गया कि यह खाता सिर्फ नाम का व्यापारिक खाता था, जबकि असल में इसका इस्तेमाल ठगी की रकम को इकट्ठा करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था।
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साइबर थाना प्रभारी हरिओम मीणा ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में इस खाते से जुड़ी कुल 21 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इन शिकायतों में करीब 16 लाख 40 हजार रुपए की ठगी की रकम इसी खाते में आने की पुष्टि हुई। ये शिकायतें फर्जी कॉल, लिंक भेजकर फ्रॉड और निवेश के नाम पर धोखाधड़ी से जुड़ी हैं। जिन मामलों में अभी तक पीड़ितों ने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं करवाई है, उन सभी संदिग्ध ट्रांजेक्शन को जोड़ने पर करीब 65 लाख 70 हजार रुपए की अतिरिक्त राशि इसी खाते में घूमती पाई गई। इस तरह कुल मिलाकर 82 लाख रुपए से अधिक का संदिग्ध लेनदेन इस एक ही खाते से जुड़ा हुआ पाया गया।

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पुलिस ने मामले में बांसवाड़ा के चार आरोपियों हर्ष जोशी (22), हिमांशु शर्मा (40), विकास विजयवर्गीय और अनिल बाथम (28) को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि हर्ष जोशी के नाम पर बैंक खाता खुलवाया गया था, लेकिन वह नाममात्र का खाताधारक था। असल संचालन अन्य आरोपी कर रहे थे, जो तकनीकी और नेटवर्किंग के जरिए इस खाते को नियंत्रित करते थे। लोगों को अलग-अलग तरीकों से झांसे में लिया जाता था। जैसे ही पीड़ित रकम ट्रांसफर करता, पैसा तुरंत हर्ष ट्रेडिंग के खाते में पहुंच जाता था। इसके बाद रकम को कई हिस्सों में बांटकर अलग-अलग खातों में भेज दिया जाता या नकद निकाल लिया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि इस खाते में गुजरात के अहमदाबाद, महाराष्ट्र के पुणे और तेलंगाना सहित कई राज्यों से लगातार ट्रांजेक्शन हो रहे थे। इससे साफ है कि यह कोई स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय साइबर क्राइम नेटवर्क है, जो अलग-अलग राज्यों के लोगों को निशाना बना रहा था।

साइबर पुलिस अब इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक डिटेल्स और डिजिटल डिवाइस की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं और किन-किन खातों का इस्तेमाल ठगी के लिए किया गया। संभावित पीड़ितों की पहचान कर उन्हें न्याय दिलाने की दिशा में भी कार्रवाई की जा रही है।

 

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