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Bharatpur News: 31 फर्जी फर्मों का पंजीयन रद्द किया
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भरतपुर। डीग जिले के मेवात क्षेत्र स्थित कामां और पहाड़ी में अब तक साइबर ठग ही सक्रिय थे, पहली बार बोगस फर्मों का खुलासा हुआ है। वाणिज्यिक कर विभाग ने एक साल की गहन जांच के बाद 31 फर्जी फर्मों को पंजीयन रद्द कर दिया है। ये फर्में सिर्फ कागजों में संचालित हो रहीं थीं। इन फर्मों के जरिए अब तक 19.08 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की जा चुकी है।
पकड़ में आईं इन फार्मों का कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं था। ये केवल फर्जी बिलिंग के माध्यम से आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) पास ऑन कर रहीं थीं। जांच में सामने आया कि यह पूरा जीएसटी फ्रॉड ग्रामीण पतों पर पंजीकृत फर्मों के जरिए चल रहा था। इन फर्मों में चालक, मजदूर और अनपढ़ महिलाओं को प्रोपराइटर बनाया हुआ था, जिनका व्यापार से कोई लेना-देना नहीं था।
सहायक आयुक्त विद्यासागर शर्मा ने बताया कि मुख्य आयुक्त एवं अतिरिक्त आयुक्त के निर्देशन में मामले की गहन जांच की। इसमें सामने आया कि इन फर्मों का पंजीकरण कराने के बाद सिर्फ कागजों पर व्यापार दिखाने और फर्जी बिलिंग करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। भौतिक जांच में पाया गया कि इनमें से कोई फार्म वास्तविक व्यवसाय नहीं कर रही थी।
विद्यासागर शर्मा ने बताया कि एक साल की गहन जांच के बाद 31 फर्जी फर्मों का पंजीयन रद्द किया गया है। इनसे 19.08 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी गई है, जिन फर्मों ने आईटीसी लिया है, उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अब इस राशि की वसूली ब्याज सहित की जाएगी। मामले में असली गुनहगारों की तलाश जारी है, इसमें बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
पकड़ी गई फर्मों में फर्जी किरायानामा लगाकर दुकान किराए पर ली जाती थीं। गरीब व्यक्ति को प्रोपराइटर बनाकर उसके आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था। वास्तविकता में कोई कारोबार न कर फर्म कागजों में करोड़ों का व्यापार करती थीं। इनमें गिट्टी, बिटुमिन और ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज आदि के नाम पर फर्जी खरीद-बिक्री दिखाई जाती थी। फर्जी बिल बनाकर अन्य फर्मों को अवैध आईटीसी पास ऑन किया जाता था। जांच में सामने आया कि इस पूरे जीएसटी फ्रॉड के पीछे संगठित गिरोह काम कर रहा है।
सहायक आयुक्त विद्यासागर शर्मा ने बताया कि विभाग अब ऐसे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कड़े कदम उठा रहा है। अब संदिग्ध फर्मों के रजिस्ट्रेशन से पहले बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। प्रोपराइटर को कार्यालय बुलाकर आई स्कैन और थंब स्कैन के जरिए पहचान सत्यापन किया जाता है। इससे कोई भी डमी मालिक बाद में अपनी पहचान से इनकार नहीं कर सकेगा।
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पकड़ में आईं इन फार्मों का कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं था। ये केवल फर्जी बिलिंग के माध्यम से आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) पास ऑन कर रहीं थीं। जांच में सामने आया कि यह पूरा जीएसटी फ्रॉड ग्रामीण पतों पर पंजीकृत फर्मों के जरिए चल रहा था। इन फर्मों में चालक, मजदूर और अनपढ़ महिलाओं को प्रोपराइटर बनाया हुआ था, जिनका व्यापार से कोई लेना-देना नहीं था।
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सहायक आयुक्त विद्यासागर शर्मा ने बताया कि मुख्य आयुक्त एवं अतिरिक्त आयुक्त के निर्देशन में मामले की गहन जांच की। इसमें सामने आया कि इन फर्मों का पंजीकरण कराने के बाद सिर्फ कागजों पर व्यापार दिखाने और फर्जी बिलिंग करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। भौतिक जांच में पाया गया कि इनमें से कोई फार्म वास्तविक व्यवसाय नहीं कर रही थी।
विद्यासागर शर्मा ने बताया कि एक साल की गहन जांच के बाद 31 फर्जी फर्मों का पंजीयन रद्द किया गया है। इनसे 19.08 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी गई है, जिन फर्मों ने आईटीसी लिया है, उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अब इस राशि की वसूली ब्याज सहित की जाएगी। मामले में असली गुनहगारों की तलाश जारी है, इसमें बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
पकड़ी गई फर्मों में फर्जी किरायानामा लगाकर दुकान किराए पर ली जाती थीं। गरीब व्यक्ति को प्रोपराइटर बनाकर उसके आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था। वास्तविकता में कोई कारोबार न कर फर्म कागजों में करोड़ों का व्यापार करती थीं। इनमें गिट्टी, बिटुमिन और ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज आदि के नाम पर फर्जी खरीद-बिक्री दिखाई जाती थी। फर्जी बिल बनाकर अन्य फर्मों को अवैध आईटीसी पास ऑन किया जाता था। जांच में सामने आया कि इस पूरे जीएसटी फ्रॉड के पीछे संगठित गिरोह काम कर रहा है।
सहायक आयुक्त विद्यासागर शर्मा ने बताया कि विभाग अब ऐसे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कड़े कदम उठा रहा है। अब संदिग्ध फर्मों के रजिस्ट्रेशन से पहले बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। प्रोपराइटर को कार्यालय बुलाकर आई स्कैन और थंब स्कैन के जरिए पहचान सत्यापन किया जाता है। इससे कोई भी डमी मालिक बाद में अपनी पहचान से इनकार नहीं कर सकेगा।