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क्या ट्रंप फिर सुलगा रहे आग?: ईरान को 'असफल देश' बताया, धमकाते हुए कहा- हम 'रीसेट' को तैयार, सोच ले तेहरान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 11 Apr 2026 07:23 PM IST
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सार
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता शुरू हुई है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ बना है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को असफल राष्ट्र बता दिया है। ट्रंप ने सख्त चेतावनी दी है कि शांति वार्ता में विफल रहने पर अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाएगा। ईरान ने भी अपनी जब्त संपत्तियों की वापसी और लेबनान में युद्धविराम की शर्त रखी है।
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : @अमर उजाला
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विस्तार
दुनिया की नजरें इस वक्त पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का आगाज हो चुका है। त्रिपक्षीय युद्धविराम वार्ता के इस पहले चरण में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, बातचीत की मेज सजने के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त तेवरों ने माहौल में गर्मी पैदा कर दी है।
ईरान एक असफल राष्ट्र- डोनाल्ड ट्रंप
शांति वार्ता के शुरू होते ही ट्रंप ने एक बार फिर अपने चिर-परिचित अंदाज में ईरान पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि ईरान एक असफल देश है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बातचीत के लिए तैयार तो है, लेकिन किसी भी समझौते के लिए झुकने वाला नहीं है। ट्रंप ने एक मीडिया चैनल को दिए साक्षात्कार में चेतावनी दी कि यदि बातचीत उनकी शर्तों के मुताबिक आगे नहीं बढ़ती है, तो अमेरिका 'रीसेट' बटन दबाने के लिए तैयार है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल की राजनीति
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि जल्द ही होर्मुज को व्यापार के लिए खोल दिया जाएगा। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के पास बातचीत के लिए होर्मुज के अलावा कोई कार्ड नहीं बचा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरानी अर्थव्यवस्था इतनी जर्जर हो चुकी है कि बातचीत करना अब उनके लिए मजबूरी है।
यह भी पढ़ें: Islamabad US-Iran Talks: शांतिवार्ता से पहले अमेरिका-ईरान के नेताओं से मिले PM शहबाज, जानें कहां तक पहुंची बात
पाकिस्तानी जमीन पर उच्च स्तरीय बैठकें
इस्लामाबाद में चल रही वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरान की ओर से वहां की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ मोर्चा संभाले हुए हैं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ दोनों देशों के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात कर चुके हैं। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि यह बातचीत सफल रही, तो पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद है।
शर्तों और संघर्ष का पेंच
ईरान ने बातचीत की मेज पर अपनी शर्तें साफ कर दी हैं। गालिबाफ ने कहा है कि जब तक तेहरान की जब्त संपत्तियों को रिलीज नहीं किया जाता और लेबनान में इस्राइली हमले नहीं रुकते, तब तक कोई ठोस नतीजा निकलना मुश्किल है। वहीं, लेबनान में जारी हिंसा ने इस संघर्ष को और पेचीदा बना दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका हमेशा वादे तोड़ता रहा है, इसलिए वे इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
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ईरान एक असफल राष्ट्र- डोनाल्ड ट्रंप
शांति वार्ता के शुरू होते ही ट्रंप ने एक बार फिर अपने चिर-परिचित अंदाज में ईरान पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि ईरान एक असफल देश है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बातचीत के लिए तैयार तो है, लेकिन किसी भी समझौते के लिए झुकने वाला नहीं है। ट्रंप ने एक मीडिया चैनल को दिए साक्षात्कार में चेतावनी दी कि यदि बातचीत उनकी शर्तों के मुताबिक आगे नहीं बढ़ती है, तो अमेरिका 'रीसेट' बटन दबाने के लिए तैयार है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल की राजनीति
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि जल्द ही होर्मुज को व्यापार के लिए खोल दिया जाएगा। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के पास बातचीत के लिए होर्मुज के अलावा कोई कार्ड नहीं बचा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरानी अर्थव्यवस्था इतनी जर्जर हो चुकी है कि बातचीत करना अब उनके लिए मजबूरी है।
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पाकिस्तानी जमीन पर उच्च स्तरीय बैठकें
इस्लामाबाद में चल रही वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरान की ओर से वहां की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ मोर्चा संभाले हुए हैं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ दोनों देशों के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात कर चुके हैं। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि यह बातचीत सफल रही, तो पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद है।
शर्तों और संघर्ष का पेंच
ईरान ने बातचीत की मेज पर अपनी शर्तें साफ कर दी हैं। गालिबाफ ने कहा है कि जब तक तेहरान की जब्त संपत्तियों को रिलीज नहीं किया जाता और लेबनान में इस्राइली हमले नहीं रुकते, तब तक कोई ठोस नतीजा निकलना मुश्किल है। वहीं, लेबनान में जारी हिंसा ने इस संघर्ष को और पेचीदा बना दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका हमेशा वादे तोड़ता रहा है, इसलिए वे इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
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