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Rajasthan: तीन साल बाद पटवारी पर गिरी गाज! बर्खास्तगी के फैसले से भड़के कर्मचारी, जिलेभर में हड़ताल का एलान
Sun, 26 Jul 2026 07:37 PM IST
भीलवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा
Published by: भीलवाड़ा ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 07:37 PM IST
सार
Rajasthan News: भीलवाड़ा के बहुचर्चित कोटड़ी कोयला भट्टी कांड में तीन साल बाद तत्कालीन पटवारी हरदेव बैरवा को राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई के विरोध में राजस्थान कानूनगो एवं पटवार संघ ने आंदोलन और कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है। कर्मचारी संगठनों ने भी पटवारी के समर्थन में उतरते हुए बहाली की मांग उठाई है।
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पटवारी हरदेव बैरवा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले के गिरड़िया पटवार हल्के के नरसिंहपुरा गांव में वर्ष 2023 में हुए बहुचर्चित कोटड़ी कोयला भट्टी कांड से जुड़े मामले में करीब तीन साल बाद बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। तत्कालीन हल्का पटवारी हरदेव बैरवा को राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जिला प्रशासन के इस फैसले के बाद जिलेभर के पटवारियों और कानूनगो में नाराजगी फैल गई है। राजस्थान कानूनगो एवं पटवार संघ ने इसे एकतरफा कार्रवाई बताते हुए आंदोलन का ऐलान किया है। वहीं कर्मचारी अधिकारी विकास संस्थान ने भी पटवारी के समर्थन में ज्ञापन देने का निर्णय लिया है।
क्या था बहुचर्चित कोटड़ी कोयला भट्टी कांड?
दो अगस्त 2023 को शाहपुरा तहसील के नरसिंहपुरा गांव में एक नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर शव को कोयला बनाने वाली भट्टी में डाल देने का सनसनीखेज मामला सामने आया था। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। वारदात के विरोध में कई दिनों तक ग्रामीणों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने धरना-प्रदर्शन किया। दोषियों की गिरफ्तारी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर व्यापक आंदोलन हुए। यह मामला लंबे समय तक प्रदेश की सुर्खियों में बना रहा।
तीन साल बाद पटवारी पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
जिला प्रशासन ने 22 जुलाई 2026 को तत्कालीन गिरड़िया हल्का पटवारी हरदेव बैरवा को राजकीय सेवा से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए। आदेश सार्वजनिक होने के बाद राजस्व कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि यह कार्रवाई तथ्यों और जांच रिपोर्टों की अनदेखी करते हुए की गई है। उनका कहना है कि पूरे मामले में केवल एक कर्मचारी को निशाना बनाया गया है।
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'जांच में निर्दोष था, फिर भी नौकरी छीन ली'
बर्खास्त किए गए पटवारी हरदेव बैरवा ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में दावा किया कि घटना वाले दिन सभी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे थे और अतिक्रमण भी हटाया गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें 14 अगस्त तक धारा 91 के तहत अतिक्रमण संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। बैरवा का कहना है कि तहसील और उपखंड स्तर की जांच में उन्हें निर्दोष बताया गया था, लेकिन इसके बावजूद जिला प्रशासन ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। घटना के बाद दिसंबर 2025 में उन्हें हार्ट अटैक आया था और उदयपुर में स्टेंट डाला गया था। स्वास्थ्य लाभ के बाद 1 जून 2026 को उनकी कोटड़ी हल्के के बोरड़ा में पोस्टिंग हुई थी, लेकिन दो महीने के भीतर ही उन्हें सेवा से हटा दिया गया। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
पटवार संघ ने खोला मोर्चा, बहाली की मांग
25 जुलाई को राजस्थान कानूनगो एवं पटवार संघ, जिला शाखा भीलवाड़ा की आपात बैठक जिला मुख्यालय पर आयोजित हुई। बैठक में जिलेभर से आए पटवारी और कानूनगो शामिल हुए। संघ ने जिला कलेक्टर के फैसले का विरोध करते हुए हरदेव बैरवा की बर्खास्तगी के आदेश का पुनरावलोकन कर उन्हें तत्काल बहाल करने की मांग की। संघ ने घोषणा की कि 27 जुलाई को जिले की सभी उपशाखाओं के माध्यम से उपखंड अधिकारियों को जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
बुधवार से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी
पटवार संघ ने चेतावनी दी है कि यदि ज्ञापन देने के बाद भी जिला प्रशासन ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो बुधवार से जिले के सभी पटवारी और कानूनगो पूर्ण कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर चले जाएंगे। संघ का कहना है कि यदि इससे राजस्व कार्य प्रभावित होते हैं तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
यह भी पढ़ें: सब कुछ सांवलिया सेठ का! भक्त ने 10 बीघा खेत और चार मंजिला मकान ट्रस्ट के नाम किया; ये है वजह
कर्मचारी अधिकारी विकास संस्थान भी आया समर्थन में
रविवार को भीलवाड़ा के पुर स्थित अंबेडकर भवन में कर्मचारी अधिकारी विकास संस्थान की बैठक आयोजित हुई। बैठक में हरदेव बैरवा के मामले पर चर्चा के बाद सोमवार, 27 जुलाई को जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया। संस्थान ने सभी कर्मचारियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।
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क्या था बहुचर्चित कोटड़ी कोयला भट्टी कांड?
दो अगस्त 2023 को शाहपुरा तहसील के नरसिंहपुरा गांव में एक नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर शव को कोयला बनाने वाली भट्टी में डाल देने का सनसनीखेज मामला सामने आया था। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। वारदात के विरोध में कई दिनों तक ग्रामीणों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने धरना-प्रदर्शन किया। दोषियों की गिरफ्तारी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर व्यापक आंदोलन हुए। यह मामला लंबे समय तक प्रदेश की सुर्खियों में बना रहा।
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तीन साल बाद पटवारी पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
जिला प्रशासन ने 22 जुलाई 2026 को तत्कालीन गिरड़िया हल्का पटवारी हरदेव बैरवा को राजकीय सेवा से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए। आदेश सार्वजनिक होने के बाद राजस्व कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि यह कार्रवाई तथ्यों और जांच रिपोर्टों की अनदेखी करते हुए की गई है। उनका कहना है कि पूरे मामले में केवल एक कर्मचारी को निशाना बनाया गया है।
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'जांच में निर्दोष था, फिर भी नौकरी छीन ली'
बर्खास्त किए गए पटवारी हरदेव बैरवा ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में दावा किया कि घटना वाले दिन सभी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे थे और अतिक्रमण भी हटाया गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें 14 अगस्त तक धारा 91 के तहत अतिक्रमण संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। बैरवा का कहना है कि तहसील और उपखंड स्तर की जांच में उन्हें निर्दोष बताया गया था, लेकिन इसके बावजूद जिला प्रशासन ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। घटना के बाद दिसंबर 2025 में उन्हें हार्ट अटैक आया था और उदयपुर में स्टेंट डाला गया था। स्वास्थ्य लाभ के बाद 1 जून 2026 को उनकी कोटड़ी हल्के के बोरड़ा में पोस्टिंग हुई थी, लेकिन दो महीने के भीतर ही उन्हें सेवा से हटा दिया गया। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
पटवार संघ ने खोला मोर्चा, बहाली की मांग
25 जुलाई को राजस्थान कानूनगो एवं पटवार संघ, जिला शाखा भीलवाड़ा की आपात बैठक जिला मुख्यालय पर आयोजित हुई। बैठक में जिलेभर से आए पटवारी और कानूनगो शामिल हुए। संघ ने जिला कलेक्टर के फैसले का विरोध करते हुए हरदेव बैरवा की बर्खास्तगी के आदेश का पुनरावलोकन कर उन्हें तत्काल बहाल करने की मांग की। संघ ने घोषणा की कि 27 जुलाई को जिले की सभी उपशाखाओं के माध्यम से उपखंड अधिकारियों को जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
बुधवार से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी
पटवार संघ ने चेतावनी दी है कि यदि ज्ञापन देने के बाद भी जिला प्रशासन ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो बुधवार से जिले के सभी पटवारी और कानूनगो पूर्ण कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर चले जाएंगे। संघ का कहना है कि यदि इससे राजस्व कार्य प्रभावित होते हैं तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
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कर्मचारी अधिकारी विकास संस्थान भी आया समर्थन में
रविवार को भीलवाड़ा के पुर स्थित अंबेडकर भवन में कर्मचारी अधिकारी विकास संस्थान की बैठक आयोजित हुई। बैठक में हरदेव बैरवा के मामले पर चर्चा के बाद सोमवार, 27 जुलाई को जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया। संस्थान ने सभी कर्मचारियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।