नगर विकास न्यास (यूआईटी) में लंबे समय से सचिव का पद रिक्त रहने, आमजन के कार्य लंबित पड़े होने और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर शुक्रवार को यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा को विरोध का सामना करना पड़ा। शहरी जन सेवा शिविर के फॉलोअप कैंप का निरीक्षण करने पहुंचे मंत्री का यूआईटी कार्यालय परिसर में प्रॉपर्टी व्यवसायियों, शहरवासियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने घेराव कर दिया।
लोगों ने नारेबाजी करते हुए अपनी समस्याएं रखीं और आरोप लगाया कि तीन माह से यूआईटी सचिव नहीं होने के कारण न्यास की कार्यप्रणाली पूरी तरह प्रभावित हो गई है। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट लोगों ने पांच दिन में समाधान नहीं होने पर जयपुर स्थित उनके सरकारी आवास के बाहर धरना देने की चेतावनी दी।
सचिव नहीं होने से नामांतरण से लेकर पट्टे तक के काम ठप
यूआईटी कार्यालय में मंत्री के पहुंचते ही बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सचिव का पद लंबे समय से खाली होने के कारण नामांतरण, रजिस्ट्री, पट्टा जारी करने, ले-आउट स्वीकृति और अन्य प्रशासनिक कार्य ठप पड़े हैं। आम नागरिकों को बार-बार यूआईटी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। लोगों ने आरोप लगाया कि शहरी जन सेवा शिविर केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं और मौके पर समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा।
प्रॉपर्टी व्यवसायियों ने लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
प्रदर्शन कर रहे प्रॉपर्टी व्यवसायियों ने मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए यूआईटी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। प्रॉपर्टी व्यवसायी एवं कांग्रेस नेता महेश सोनी ने कहा कि मुख्यमंत्री आवास योजना और नेहरू विहार जैसी योजनाओं के लाभार्थियों को भूखंड मिलने के बावजूद रजिस्ट्री और नामांतरण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न कार्यों के लिए लोगों से अवैध रूप से राशि मांगी जाती है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यदि भ्रष्टाचार समाप्त नहीं किया जा सकता तो कम से कम यूआईटी कार्यालय की दीवार पर ही यह सूची चस्पा कर दी जाए कि किस काम के लिए कितना पैसा देना पड़ता है, ताकि आम आदमी उसी हिसाब से पैसा लेकर आए।
मंत्री की टिप्पणी पर बढ़ा विवाद
इस दौरान माहौल गर्म हो गया। मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने लोगों को शांत कराते हुए कहा, 'ज्यादा बोलने से काम नहीं होता है। आपकी जो भी समस्या है, वह लिखकर हमें दे दीजिए। आप जितना ज्यादा बोलेंगे, उतनी ही गफलत में पड़ेंगे।'
सचिव की नियुक्ति पर मुख्यमंत्री से करेंगे आग्रह
बाद में मीडिया से बातचीत में मंत्री खर्रा ने कहा कि यूआईटी में सचिव की नियुक्ति मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र का विषय है। वे मुख्यमंत्री से शीघ्र नियुक्ति का आग्रह करेंगे, ताकि लंबित कार्यों का तेजी से निस्तारण हो सके। यूआईटी में पूर्व में विवादों में रहे अधिशासी अभियंता की दोबारा नियुक्ति के सवाल पर भी उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए मामले को दिखवाने की बात कही।
5 दिन का अल्टीमेटम, नहीं तो जयपुर में होगा धरना
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सचिव का पद रिक्त रहने से प्रशासनिक निर्णय नहीं हो पा रहे हैं और आम लोगों के जरूरी काम महीनों तक लंबित पड़े हैं। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि पांच दिन के भीतर सचिव की नियुक्ति और लंबित मामलों के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जयपुर पहुंचकर मंत्री के सरकारी आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
निकाय चुनावों पर सरकार का पक्ष रखा
मीडिया से वार्ता के दौरान यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने निकाय चुनावों को लेकर भी राज्य सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निकाय चुनाव समय पर और निष्पक्ष ढंग से कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार के स्तर पर सीमा विस्तार, वार्डों का पुनर्गठन और परिसीमन सहित सभी आवश्यक प्रशासनिक कार्य पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि वार्ड पुनर्गठन से संबंधित एक मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय का निर्णय भी राज्य सरकार के पक्ष में आया है।
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ट्रिपल टेस्ट के बाद तय होगा आरक्षण
यूडीएच मंत्री ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के वर्ष 2022 के निर्णय के अनुरूप राजनीतिक आरक्षण लागू करने के लिए ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। इसके तहत राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग वार्डवार, निकायवार और पंचायतवार ओबीसी आबादी के आंकड़े तैयार कर रहा है। आयोग अगस्त माह में यह आंकड़े राज्य सरकार को सौंप देगा। आंकड़े प्राप्त होने के बाद राज्य सरकार एक सप्ताह के भीतर ओबीसी, एससी, एसटी और महिला आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करते हुए अंतिम रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को उपलब्ध करा देगी।