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Bundi News: नहरी पानी की मांग को लेकर किसानों का महापड़ाव, धान की फसल बचाने के लिए सड़क पर उतरे अन्नदाता
Wed, 01 Jul 2026 04:49 PM IST
बूँदी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदी
Published by: बूँदी ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2026 04:49 PM IST
सार
सिंचाई के लिए नहरी पानी की मांग को लेकर बूंदी के केशोरायपाटन में किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। बड़ी संख्या में किसान गुडला टोल प्लाजा पर धरने पर बैठ गए और प्रशासन से तत्काल नहरों में पानी छोड़ने की मांग की।
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फसल बचाने को लेकर किसानों का महापड़ाव
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विस्तार
धान की सूखती फसल को बचाने के लिए नहरी पानी छोड़ने की मांग को लेकर जिले के केशोरायपाटन क्षेत्र में किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया। केशोरायपाटन शुगर मिल संयुक्त किसान समन्वय समिति के आह्वान पर बड़ी संख्या में किसान गुडला टोल प्लाजा पर एकत्रित हुए और महापड़ाव शुरू कर दिया। किसान दिनभर मेगा हाईवे पर डटे रहे तथा धरना स्थल पर ही भोजन की व्यवस्था कर रात तक आंदोलन जारी रखा। किसानों ने नहरों में तत्काल पानी छोड़ने की मांग की।
इस दौरान कई बार सीएडी विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों से वार्ता की लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर किसान अपनी मांगों पर कायम रहे। उपखंड अधिकारी ने शीर्ष अधिकारियों से चर्चा के बाद किसानों को बताया कि संभागीय आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे कोटा कलेक्टर से वार्ता कर किसानों के हित में सकारात्मक निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा।
धरने को संबोधित करते हुए युवा किसान नेता गिर्राज गौतम ने कहा कि नहरी पानी पर किसानों का पहला अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों ने एक माह पहले ही प्रशासन को सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता से अवगत करा दिया था, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसका खामियाजा अब किसानों को भुगतना पड़ रहा है और धान की फसल सूखने लगी है।
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उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से किसानों को हर बार नहरी पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पिछले वर्ष एक जुलाई तक नहरों में पानी छोड़ दिया गया था लेकिन इस बार अब तक पानी नहीं मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल को किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होने देंगे।
किसान नेताओं ने प्रशासन से जल्द से जल्द नहरों में पानी छोड़ने का निर्णय लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन के साथ होने वाली वार्ता में किसानों के पक्ष में निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी। किसानों ने स्पष्ट कहा कि फसल बचाने के लिए वे हर स्तर तक संघर्ष करने को तैयार हैं।
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इस दौरान कई बार सीएडी विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों से वार्ता की लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर किसान अपनी मांगों पर कायम रहे। उपखंड अधिकारी ने शीर्ष अधिकारियों से चर्चा के बाद किसानों को बताया कि संभागीय आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे कोटा कलेक्टर से वार्ता कर किसानों के हित में सकारात्मक निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा।
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धरने को संबोधित करते हुए युवा किसान नेता गिर्राज गौतम ने कहा कि नहरी पानी पर किसानों का पहला अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों ने एक माह पहले ही प्रशासन को सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता से अवगत करा दिया था, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसका खामियाजा अब किसानों को भुगतना पड़ रहा है और धान की फसल सूखने लगी है।
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उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से किसानों को हर बार नहरी पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पिछले वर्ष एक जुलाई तक नहरों में पानी छोड़ दिया गया था लेकिन इस बार अब तक पानी नहीं मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल को किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होने देंगे।
किसान नेताओं ने प्रशासन से जल्द से जल्द नहरों में पानी छोड़ने का निर्णय लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन के साथ होने वाली वार्ता में किसानों के पक्ष में निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी। किसानों ने स्पष्ट कहा कि फसल बचाने के लिए वे हर स्तर तक संघर्ष करने को तैयार हैं।