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Dausa News: पावटा में डोलची होली की धूम, नंगे बदन युवा कर रहे पानी से प्रहार, रणभूमि बना मैदान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा Published by: दौसा ब्यूरो Updated Wed, 04 Mar 2026 07:18 PM IST
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सार

पावटा गांव में होली दूज पर अनोखी डोलची खूनी होली खेली गई। करीब 500 साल पुरानी इस परंपरा में दो दलों के युवक आमने-सामने होकर डोलची से पानी के तेज प्रहार करते हैं।

Dausa News: Dolchi Holi in Pawta sees bare-bodied youths strike with water, ground turns into battlefield
नंगे बदन युवाओं ने खेली खूनी डोलची होली - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जिले के महवा उपखंड क्षेत्र के पावटा गांव में होली दूज पर खेली जाने वाली पारंपरिक डोलची होली की शुरुआत हो गई है। करीब 500 साल पुरानी इस परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग हदीरा मैदान में जुटे हैं, जहां युवाओं के बीच डोलची से पानी के प्रहार के साथ यह अनोखा आयोजन किया जा रहा है।

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आयोजन की शुरुआत सुबह हदीरा मैदान में हवन के साथ होती है। इसके बाद भैरुजी मंदिर में होली का आमंत्रण दिया जाता है। परंपरा के अनुसार गुर्जर समाज के दणगस और पीलवाड़ गोत्र के युवक दो दलों में बंटकर आमने-सामने होते हैं।
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अतिथियों के संकेत मिलते ही दोनों दलों के युवक चमड़े की डोलची में पानी भरकर एक-दूसरे पर प्रहार करना शुरू कर देते हैं। अर्धनग्न युवक पूरी ताकत से डोलची से पानी फेंकते हैं, जिससे उनकी पीठ पर लाल निशान उभर आते हैं। इसके बावजूद उनका उत्साह कम नहीं होता और जवाबी वार उतनी ही तेजी से किया जाता है। यह नजारा ऐसा प्रतीत होता है मानो दो सेनाएं रणभूमि में आमने-सामने युद्ध कर रही हों। इसी कारण इसे खूनी होली कहा जाता है।

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पूर्व जिला प्रमुख अजीत सिंह ने बताया कि यह परंपरा करीब 500 वर्षों से वीर बल्लू शहीद की स्मृति में निभाई जा रही है। मान्यता है कि प्राचीन समय में दो पक्षों के विवाद के दौरान बल्लू का सिर धड़ से अलग हो गया था, लेकिन वे तब भी दुश्मनों से लड़ते रहे। उनकी वीरता की याद में हर साल होली दूज के दिन यह आयोजन किया जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार इस परंपरा को एक बार बंद करने की कोशिश की गई थी लेकिन इसके बाद गांव में प्राकृतिक आपदाएं और आगजनी जैसी घटनाएं होने लगीं। इसके बाद ग्रामीणों ने बाबा से माफी मांगकर इस परंपरा को फिर से शुरू किया।

इस खेल की खास बात यह है कि इसमें हार-जीत का कोई निर्णय नहीं होता। खेल तब तक चलता रहता है जब तक मैदान में फैला पानी गांव के पास स्थित कुएं की ओर नहीं पहुंच जाता। इसके बाद पंच-पटेल दोनों पक्षों को रोककर भाईचारे के साथ खेल समाप्त करवाते हैं।

आयोजन को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और छतों और ऊंचे स्थानों पर खड़े होकर इस अनोखी खूनी डोलची होली का नजारा देखा। ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा साहस, एकता और अन्याय के खिलाफ खड़े होने का संदेश भी देती है। साथ ही युवाओं को नशे से दूर रहकर खेलों और परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा भी देती है।
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