Dholpur Crime: ट्रांसफार्मर हटाने पहुंची टीम पर पथराव, दो करोड़ था बकाया; पुलिस को दागने पड़े आंसू गैस के गोल
Dholpur Crime: धौलपुर के मनिया थाना क्षेत्र के सिंगरौली गांव में विद्युत ट्रांसफार्मर को जब्त करने गई पुलिस एवं डिस्कॉम की टीम पर ग्रामीणों ने लामबंद होकर पर पथराव और हमला कर दिया। पुलिस द्वारा भी ग्रामीणों पर आंसू गैस के गले दागे गए। हालांकि हताहत कोई नहीं हुआ है। विद्युत निगम ने पुलिस के सहयोग से एक दर्जन से अधिक ट्रांसफार्मर को जब्त किया है। विद्युत निगम की 2 करोड़ से अधिक की राशि ग्रामीणों पर बकाया चली आ रही थी।
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विद्युत निगम के एईएन अनुराग मित्तल ने बताया मनिया क्षेत्र के बड़ागांव एवं सिंगरौली में ग्रामिणों पर विद्युत निगम की दो करोड़ से अधिक की राशि बकाया चली आ रही थी। विगत 4 साल से विद्युत निगम के अधिकारी राशि को वसूलने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन ग्रामीणों द्वारा निगम की राशि को जमा नहीं कराया जा रहा था। विद्युत निगम द्वारा ग्रामीणों को नोटिस जारी कर हिदायत भी दी गई थी, लेकिन ग्रामीणों ने राशि को जमा नहीं कराया। डिफाल्टर उपभोक्ताओं में घरेलू एवं खेती के भी शामिल है। बुधवार को सैपऊ सीओ आनंद कुमार राव एवं मनिया सीओ राजेश कुमार के नेतृत्व में डिस्कॉम के आला अधिकारियों को साथ लेकर कार्रवाई को अंजाम दिया है। कार्रवाई के दौरान डिस्कॉम एवं पुलिस ने एक दर्जन से अधिक बिजली के ट्रांसफार्मर को जब्त किया है।
पुलिस और डिस्कॉम के अधिकारियों पर किया पथराव
बड़गांव में ट्रांसफार्मरों को जब्त कर पुलिस और डिस्कॉम की टीम दूसरे गांव सिंगरौली पहुंच गई। सिंगरौली गांव के ग्रामीणों ने ट्रांसफार्मर उतारने का विरोध किया। इसी दौरान पुलिस और ग्रामीणों में विरोध पैदा हो गया और ग्रामीणों ने लामबंद होकर पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। करीब आधा घंटा तक ग्रामीण और पुलिस आमने-सामने हो गए। पुलिस द्वारा भी ग्रामीणों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए। भारी पुलिस बल होने की वजह से ग्रामीण भाग गए। मौके से कुछ ग्रामीणों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया है।
राजनेताओं का मिलता रहा संरक्षण
बता दें कि बड़ागांव एवं सिंगरौली के ग्रामीणों पर करीब 4 साल से विद्युत निगम की दो करोड़ से अधिक की भारी भरकम राशि बकाया चली जा रही है। विद्युत निगम द्वारा राशि जमा कराने के पूर्व में भी प्रयास किए गए थे, लेकिन राजनीति एवं राजनेताओं के दखल की वजह से डिफाल्टर उपभोक्ता बिल जमा नहीं करा रहे थे। राजनीतिक प्रेशर की वजह से हर बार डिस्कॉम के अधिकारियों को निराशा हाथ लगती थी।