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IPL सट्टेबाजी रैकेट का भंडाफोड़: 5 हजार यूजर्स बनाकर चला रहे थे खेल, दो आरोपी गिरफ्तार
Sat, 18 Apr 2026 11:35 AM IST
हनुमानगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हनुमानगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हनुमानगढ़
Published by: हनुमानगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 18 Apr 2026 11:35 AM IST
सार
हनुमानगढ़ में आईपीएल मैचों पर ऑनलाइन सट्टा लगाने वाले बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 2.30 लाख रुपए नकद, मोबाइल, लैपटॉप और 19 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं।
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सट्टेबाजी के रैकेट का भंडाफोड़
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
हनुमानगढ़ जिले में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। आईपीएल मैचों पर करोड़ों रुपए के दांव लगवाने वाले दो आरोपियों को पीलीबंगा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी कार में बैठकर अलग-अलग स्थानों से ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे थे, जिससे लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहे थे।
19 अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड बरामद
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पुनित कुमार (34) और पंकज कुमार (33) को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से करीब 2 लाख 30 हजार रुपए नकद, 11 एंड्रॉयड मोबाइल, एक कीपैड मोबाइल, एक लैपटॉप और 19 अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी बड़े स्तर पर क्रिकेट बुकी नेटवर्क चला रहे थे।
कार में बैठकर बदलते रहते थे लोकेशन
पुलिस को सूचना मिली थी कि रावतसर रोड स्थित एसटीजी नहर पुलिया के पास एक कार में बैठकर ऑनलाइन सट्टा संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने दबिश देकर कार से दोनों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के खिलाफ सट्टेबाजी से संबंधित धाराओं के साथ-साथ आईटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
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व्हाट्सएप ग्रुप में विदेशी नंबरों से संपर्क
प्रारंभिक पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी क्रिकेट सट्टा आईडी के मास्टर ऑपरेटर थे और अलग-अलग राज्यों में करीब 5000 यूजर्स को सट्टा आईडी बेच चुके थे। आरोपियों के मोबाइल फोन में कई व्हाट्सएप ग्रुप मिले हैं, जिनमें लगभग 50 विदेशी मोबाइल नंबरों सहित बड़ी संख्या में यूजर्स जुड़े हुए थे।
सिर्फ 18 दिनों में 45 लाख का लेन-देन
जांच में यह भी सामने आया कि मास्टर सट्टा आईडी के माध्यम से महज 18 दिनों में करीब 45 लाख रुपए का लेन-देन किया गया। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि पूरे गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा और सक्रिय है। पुलिस को लाखों रुपए का हिसाब-किताब और सट्टा संचालन से जुड़ा डेटा भी मिला है, जिसे तकनीकी टीम खंगाल रही है।
ये भी पढ़ें- ओरण की लड़ाई पड़ी भारी? विधायक भाटी की सुरक्षा घटाई, चार की जगह सिर्फ एक गनमैन; बोले- ‘मेरी असली मालिक जनता’
म्यूल खातों के जरिए छिपाया जाता था पैसा
आरोपियों के पास से बरामद किए गए एटीएम कार्ड अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर हैं। पुलिस का मानना है कि इन खातों का उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में किया जा रहा था, जिनके जरिए सट्टे का पैसा ट्रांजेक्ट कर अवैध कमाई को छिपाने और ट्रैकिंग से बचने की कोशिश की जा रही थी।
नेटवर्क के अन्य तार खंगाल रही पुलिस
पूरे मामले में एजीटीएफ टीम की अहम भूमिका रही, जिसने तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचना के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस सट्टा रैकेट के तार किन-किन राज्यों या अन्य नेटवर्क से जुड़े हैं और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
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19 अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड बरामद
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पुनित कुमार (34) और पंकज कुमार (33) को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से करीब 2 लाख 30 हजार रुपए नकद, 11 एंड्रॉयड मोबाइल, एक कीपैड मोबाइल, एक लैपटॉप और 19 अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी बड़े स्तर पर क्रिकेट बुकी नेटवर्क चला रहे थे।
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कार में बैठकर बदलते रहते थे लोकेशन
पुलिस को सूचना मिली थी कि रावतसर रोड स्थित एसटीजी नहर पुलिया के पास एक कार में बैठकर ऑनलाइन सट्टा संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने दबिश देकर कार से दोनों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के खिलाफ सट्टेबाजी से संबंधित धाराओं के साथ-साथ आईटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
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व्हाट्सएप ग्रुप में विदेशी नंबरों से संपर्क
प्रारंभिक पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी क्रिकेट सट्टा आईडी के मास्टर ऑपरेटर थे और अलग-अलग राज्यों में करीब 5000 यूजर्स को सट्टा आईडी बेच चुके थे। आरोपियों के मोबाइल फोन में कई व्हाट्सएप ग्रुप मिले हैं, जिनमें लगभग 50 विदेशी मोबाइल नंबरों सहित बड़ी संख्या में यूजर्स जुड़े हुए थे।
सिर्फ 18 दिनों में 45 लाख का लेन-देन
जांच में यह भी सामने आया कि मास्टर सट्टा आईडी के माध्यम से महज 18 दिनों में करीब 45 लाख रुपए का लेन-देन किया गया। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि पूरे गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा और सक्रिय है। पुलिस को लाखों रुपए का हिसाब-किताब और सट्टा संचालन से जुड़ा डेटा भी मिला है, जिसे तकनीकी टीम खंगाल रही है।
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म्यूल खातों के जरिए छिपाया जाता था पैसा
आरोपियों के पास से बरामद किए गए एटीएम कार्ड अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर हैं। पुलिस का मानना है कि इन खातों का उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में किया जा रहा था, जिनके जरिए सट्टे का पैसा ट्रांजेक्ट कर अवैध कमाई को छिपाने और ट्रैकिंग से बचने की कोशिश की जा रही थी।
नेटवर्क के अन्य तार खंगाल रही पुलिस
पूरे मामले में एजीटीएफ टीम की अहम भूमिका रही, जिसने तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचना के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस सट्टा रैकेट के तार किन-किन राज्यों या अन्य नेटवर्क से जुड़े हैं और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।