असहिष्णुता पर दोस्त करण जौहर से जुदा है काजोल की राय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल शनिवार को अपने पूरे सुरूर में था। यहां लेखकों, विचारकों के साथ राजनीतिक और बॉलिवुड का तड़का भी लगा। साथ ही, भारत की सामाजिक व आर्थिक स्थितियों पर भी चर्चा हुई।
अभिनेत्री काजोल देवगन ने अपने दोस्त निर्माता-निर्देशक करण जौहर के जेएलएफ के पहले दिन दिए विचार से बिलकुल उलट कहा कि उन्हें मन की बात करने में कोई दिक्कत नहीं है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि हम कई विषयों पर अनावश्यक रूप से संवेदनशील हो गए हैं, इसलिए एक-एक शब्द नापतोल कर बोलना पड़ता है, बोलें कि नहीं बोलें।
सुनने वाला भी एक-एक शब्द के अलग-अलग अर्थ निकाल रहा है। काजोल ने शनिवार को पहले सत्र में कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम अच्छा बोलें और संवेदनशील रहें। गौरतलब है कि जौहर ने जेएलएफ के पहले दिन एक सत्र में कहा था कि इस देश में मन की बात करना बहुत मुश्किल है।
सन्नी लियोनी का भी स्वागत
काजोल ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में कोई असहिष्णुता नहीं है। सन्नी लियोन की फिल्म इंडस्ट्री में स्वीकार्यता को लेकर पूछे गए सवाल पर काजोल ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में सभी का स्वागत है। यहां के दरवाजे किसी के लिए भी बंद नहीं हैं। यहां किसी भी तरह का कोई जाति, भाषा, धर्म को लेकर किसी तरह का भेदभाव नहीं है।
साथ ही यहां किसी के अतीत से भी कोई फर्क नहीं पड़ता। सन्नी लियोन के आने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता।लेखन से बिकती हैं किताबें, सेलिब्रिटी से नहीं काजोल ने जेएलएफ में अश्विन सांघी की बुक द सियालकोट सागा के लॉन्चिंग के बाद मीडिया के एक सवाल पर कहा कि किताबें हमेशा लेखन के कारण बिकती है, किसी सेलिब्रिटी के कारण नहीं। मैंने किसी भी लेखक की किताब प्रसिद्ध या अवार्ड विजेता होने के कारण कभी नहीं खरीदी।
खरीदने के लिए किसी भी किताब के कंटेंट अधिक जरूरी हैं। अच्छे पाठक होते हैं एंटी सोशल काजोल का मानना है कि अच्छे पाठक एंटी सोशल होते हैं। जिन्हें किताबें पसंद आती हैं, उन्हें लोग पसंद नहीं आते। उन्होंने बताया कि जब तक वे एक किताब पूरी खत्म नहीं हो जाती, तब तक माता-पिता, परिवार, बच्चे और घर संभालने तक को भूल जाती हूं।
देश में अब भी असहिष्णुता, वापस नहीं लूंगा पुरस्कार : अशोक वाजपेयी
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में असहिष्णुता के विरोध में अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले लेखक व कवि अशोक वाजपेयी ने कहा कि वह अपना लौटाया पुरस्कार वापस नहीं लेंगे, क्योंकि देश में अभी भी असहिष्णुता है।
अशोक वाजपेयी ने कहा कि देश में असहिष्णुता अब भी ज्यादा है। उन्होंने हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दलित छात्र मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि यही असहिष्णुता है कि एक दलित छात्र को आत्महत्या करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजय वेमुला की मौत पर शोक तो जताया है, लेकिन उन्होंने मामले की दलित अवधारणा पर कोई बात नहीं की।
उन्होंने सरकार की तरफ से मामले में देरी से कार्रवाई करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने साहित्य अकादमी के आग्रह पर अपना पुरस्कार वापस लेने वाले लेखकों को लेकर नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि लेखकों के इस कदम से मुझे दुख पहुंचा है, लेकिन यह उनका चुनाव है।