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Jaipur News: शाही लवाजमे के साथ निकली तीज माता की सवारी, पद्मनाभ सिंह ने की आरती, लोक कलाकारों ने समां बांधा
Sat, 15 Aug 2026 08:42 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Sat, 15 Aug 2026 08:42 PM IST
सार
शनिवार शाम जयपुर में तीज माता की शाही सवारी का भव्य नजारा देखने को मिला। राजसी ठाठ-बाट के साथ सिटी पैलेस से निकली सवारी में देशी-विदेशी पर्यटकों समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए।
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धूमधाम से निकली तीज माता की सवारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गुलाबी नगरी में शनिवार शाम तीज माता की ऐतिहासिक शाही सवारी पारंपरिक उल्लास और राजस्थानी लोक संस्कृति के रंगों के बीच निकली। सिटी पैलेस से शुरू हुई सवारी त्रिपोलिया गेट पहुंची, जहां पूर्व राजघराने के सदस्य पद्मनाभ सिंह ने पूरे लाव-लश्कर के साथ तीज माता की पारंपरिक आरती की। शाही सवारी और आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक उमड़े। शाही सवारी के दौरान त्रिपोलिया गेट से लेकर गणगौरी बाजार तक राजस्थानी लोक संस्कृति की मनमोहक झलक देखने को मिली। करीब 175 लोक कलाकारों ने विभिन्न लोक विधाओं की प्रस्तुतियां देकर माहौल को जीवंत कर दिया।
कलाकारों ने कच्छी घोड़ी, गैर, कालबेलिया, चरी-घूमर, चंग-ढप, मांगणियार गायन, भपंग, रावणहत्था, कठपुतली और बहुरूपिया जैसी पारंपरिक कलाओं की प्रस्तुतियां दीं। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने सवारी में शामिल लोगों और रास्ते के दोनों ओर खड़े दर्शकों का ध्यान खींचा।
ये भी पढ़ें: Rajasthan News: आन-बान-शान से फहरा तिरंगा, कोटपूतली में कलेक्टर ने ली परेड की सलामी, वीरांगनाओं का किया सम्मान
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तलवारबाजी और लोकनृत्य रहे खास आकर्षण
शाही सवारी से पहले शौर्य सेवा संगठन की बालिकाओं ने तलवारबाजी का प्रदर्शन किया। बालिकाओं के शौर्य प्रदर्शन ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया। इसके बाद कलाकारों ने कालबेलिया और कच्छी घोड़ी नृत्य के साथ फड़ गायन की प्रस्तुति दी। महिलाओं ने सिर पर मटकी रखकर चरी नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं कठपुतली कलाकारों और बहुरूपियों ने अपनी कला के जरिए राजस्थानी परंपरा और लोक जीवन की झलक पेश की।
बाड़मेर के कलाकार भी रहे आकर्षण का केंद्र
शाही सवारी में बाड़मेर से आए लोक कलाकार भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। उनकी पारंपरिक प्रस्तुतियों ने राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति को एक मंच पर जीवंत कर दिया। सवारी के दौरान जयपुर की पारंपरिक तीज संस्कृति, लोक कलाओं और राजसी परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोगों ने शाही सवारी का आनंद लिया और तीज माता के दर्शन किए।
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कलाकारों ने कच्छी घोड़ी, गैर, कालबेलिया, चरी-घूमर, चंग-ढप, मांगणियार गायन, भपंग, रावणहत्था, कठपुतली और बहुरूपिया जैसी पारंपरिक कलाओं की प्रस्तुतियां दीं। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने सवारी में शामिल लोगों और रास्ते के दोनों ओर खड़े दर्शकों का ध्यान खींचा।
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तलवारबाजी और लोकनृत्य रहे खास आकर्षण
शाही सवारी से पहले शौर्य सेवा संगठन की बालिकाओं ने तलवारबाजी का प्रदर्शन किया। बालिकाओं के शौर्य प्रदर्शन ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया। इसके बाद कलाकारों ने कालबेलिया और कच्छी घोड़ी नृत्य के साथ फड़ गायन की प्रस्तुति दी। महिलाओं ने सिर पर मटकी रखकर चरी नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं कठपुतली कलाकारों और बहुरूपियों ने अपनी कला के जरिए राजस्थानी परंपरा और लोक जीवन की झलक पेश की।
बाड़मेर के कलाकार भी रहे आकर्षण का केंद्र
शाही सवारी में बाड़मेर से आए लोक कलाकार भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। उनकी पारंपरिक प्रस्तुतियों ने राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति को एक मंच पर जीवंत कर दिया। सवारी के दौरान जयपुर की पारंपरिक तीज संस्कृति, लोक कलाओं और राजसी परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोगों ने शाही सवारी का आनंद लिया और तीज माता के दर्शन किए।