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Jaipur News: बेनीवाल-भाजपा टकराव के बीच कांग्रेस की चिंता बढ़ी, क्या जाट वोट बैंक में लगेगी नई सियासी सेंध?
Mon, 29 Jun 2026 05:05 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2026 05:05 PM IST
सार
राजस्थान की सियासत में जाट वोट बैंक एक बार फिर अहम मुद्दा बन गया है। भाजपा और हनुमान बेनीवाल के बीच जारी सियासी टकराव के बीच अब कांग्रेस के पारंपरिक जाट वोट पर भी असर पड़ने के आसार हैं।
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नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल
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विस्तार
राजस्थान की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी और हनुमान बेनीवाल के बीच जारी तीखी बयानबाजी ने जाट राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक हलकों में यह आकलन किया जा रहा है कि इस टकराव का सबसे बड़ा असर कांग्रेस के पारंपरिक जाट वोट बैंक पर पड़ सकता है। यदि बड़ी संख्या में जाट मतदाता राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) की ओर रुख करते हैं तो इसका सीधा राजनीतिक लाभ भाजपा को मिलने की संभावना जताई जा रही है।
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राज्य में जाट समुदाय को सबसे प्रभावशाली राजनीतिक वर्गों में माना जाता है। अनुमानित रूप से 80 लाख से एक करोड़ के बीच आबादी वाला यह समुदाय शेखावाटी, बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, बाड़मेर, जैसलमेर तथा भरतपुर के कुछ क्षेत्रों सहित करीब 50 से 60 विधानसभा सीटों पर निर्णायक प्रभाव रखता है। लंबे समय तक जाट मतदाताओं का बड़ा वर्ग कांग्रेस के समर्थन में माना जाता रहा है और सत्ता परिवर्तन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका देखी गई है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में भाजपा से टकराव के दौरान हनुमान बेनीवाल को जाट समाज के एक बड़े वर्ग का समर्थन मिलता दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। यदि यह समर्थन चुनाव तक कायम रहता है तो कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लग सकती है, जिससे चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
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इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस की चुप्पी भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी रही। पार्टी ने न तो बेनीवाल के समर्थन में कोई खुला बयान दिया और न ही उनके विरोध में। इससे जाट समाज के भीतर यह सवाल भी उठ रहा है कि वर्षों से समर्थन मिलने के बावजूद कांग्रेस ने इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख क्यों नहीं अपनाया।
इसी बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का डॉ. किरोड़ीलाल मीणा और हनुमान बेनीवाल के विवाद को लेकर दिया गया बयान भी राजनीतिक मायने रखता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान जाट समाज के बीच सकारात्मक संदेश देने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं हनुमान बेनीवाल पहले भी कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन की बात सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले जाट वोट बैंक की दिशा राजस्थान की राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।