Rajasthan News: गर्भवती महिलाओं का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड; हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की समय रहते हो सकेगी पहचान
राजस्थान में प्रसूताओं मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने फैसला लिया है कि गर्भवती महिलाओं का डिजिटल हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा ताकि हाई रिस्क प्रेगनेंसी के मामलों में समय रहते निगरानी की जा सके-
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कोटा, बीकानेर, नागौर और जोधपुर में प्रसूताओं की मौत और डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और मौतों की घटनाओं के बाद सरकार ने राजस्थान में प्रसूताओं का डिजिटल हेल्थकार्ड तैयार करने का फैसला लिया है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं के लिए ABHA (Ayushman Bharat Health Account) कार्ड को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि यदि गर्भावस्था के शुरुआती चरण से लेकर प्रसव तक हर महिला का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार रहेगा तो हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की समय रहते पहचान की जा सकेगी और रेफरल या इमरजेंसी की स्थिति में इलाज में देरी नहीं होगी।
प्रसूता मौतों से मिला सबक, अब डिजिटल निगरानी पर जोर
हाल के महीनों में प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में मरीजों की पूर्व मेडिकल हिस्ट्री, जांच रिपोर्ट और जोखिम संबंधी जानकारियां समय पर उपलब्ध नहीं थीं।
इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार गर्भवती महिलाओं को ABHA प्लेटफॉर्म से जोड़कर उनकी पूरी मेडिकल प्रोफाइल डिजिटल रूप में सुरक्षित करना चाहती है।
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क्या बदलेगा ABHA कार्ड से?
ABHA के तहत प्रत्येक व्यक्ति को 14 अंकों का यूनिक हेल्थ नंबर मिलता है। गर्भवती महिलाओं के मामले में इस नंबर से जुड़ा डिजिटल रिकॉर्ड डॉक्टरों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां तुरंत उपलब्ध करा सकेगा।
इसमें शामिल होंगे—
ब्लड ग्रुप और हीमोग्लोबिन स्तर
-ब्लड प्रेशर और शुगर की रिपोर्ट
-अल्ट्रासाउंड और लैब जांच
-पूर्व बीमारियों और ऑपरेशन का रिकॉर्ड
-हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी से जुड़ी जानकारी
-दवाइयों और उपचार का पूरा इतिहास
रेफरल के दौरान नहीं खोएगी मरीज की जानकारी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, प्रसव के दौरान कई बार मरीज को जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज या बड़े अस्पताल में रेफर करना पड़ता है। ऐसे समय में मरीज की पुरानी मेडिकल फाइलें उपलब्ध नहीं होने से इलाज प्रभावित हो सकता है।
ABHA कार्ड लागू होने के बाद डॉक्टर केवल यूनिक हेल्थ आईडी के जरिए मरीज का पूरा रिकॉर्ड देख सकेंगे। इससे इलाज का निर्णय लेने में तेजी आएगी और गंभीर मामलों में समय बचाया जा सकेगा।
राजस्थान डिजिटल हेल्थ मिशन में आगे
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के अनुसार राजस्थान में अब तक 7.1 करोड़ से अधिक ABHA अकाउंट बनाए जा चुके हैं। आबादी के अनुपात में लगभग 89.7 प्रतिशत लोगों का डिजिटल हेल्थ अकाउंट तैयार हो चुका है, जिससे राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि ABHA कार्ड लागू होने के बाद डॉक्टरों के हाथ में मरीज की पूरी "केस स्टडी" होगी। इससे हाई-रिस्क गर्भावस्था की पहचान, समय पर रेफरल और बेहतर इलाज की संभावनाएं बढ़ेंगी।
राजस्थान सरकार इसे केवल डिजिटल हेल्थ कार्ड नहीं, बल्कि मातृ मृत्यु दर कम करने और गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक बड़े सुधार के रूप में देख रही है।