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Rajasthan: ‘साहब’ बनकर ठगी; डीपी और AI आवाज से जाल बिछा रहे साइबर अपराधी, राजस्थान पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Wed, 29 Apr 2026 12:39 PM IST
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सार

Rajasthan: राजस्थान में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां ठग अब ‘इम्पर्सोनेशन फ्रॉड’ के जरिए अधिकारियों की नकली पहचान बनाकर लोगों को ठग रहे हैं। अपराधी डीपी, व्हाट्सएप अकाउंट, स्पूफ ईमेल और AI आधारित डीपफेक वॉइस का इस्तेमाल कर भरोसेमंद तरीके से धोखाधड़ी कर रहे हैं। 

Cybercriminals Using Fake DP and AI Voice to Scam People Rajasthan Police Issues Advisory
पुलिस मुख्यालय,जयपुर
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विस्तार

पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी अब पारंपरिक ठगी के तरीकों से आगे बढ़कर तकनीकी रूप से अधिक उन्नत और विश्वसनीय दिखने वाले तरीके अपना रहे हैं। वे सबसे पहले संबंधित विभाग या संस्था की वेबसाइट से अधिकारियों की जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद LinkedIn और Facebook जैसे प्लेटफॉर्म से कर्मचारियों की प्रोफाइल, पदक्रम और चल रहे प्रोजेक्ट्स की जानकारी हासिल करते हैं। इतना ही नहीं, कई मामलों में अपराधी विभागीय WhatsApp ग्रुप्स तक में सेंध लगाकर सदस्यों की सूची और आपसी संवाद को समझ लेते हैं। इस जानकारी के आधार पर वे बेहद सुनियोजित तरीके से ठगी को अंजाम देते हैं।

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ठगी के नए हाई-टेक तरीके
साइबर ठग अब केवल फर्जी मैसेज तक सीमित नहीं हैं। वे अधिकारियों की फोटो लगाकर नकली WhatsApp अकाउंट बनाते हैं और इमरजेंसी का हवाला देकर पैसे या गिफ्ट वाउचर की मांग करते हैं। सबसे खतरनाक तरीका AI आधारित डीपफेक वॉइस है, जिसमें अपराधी किसी अधिकारी या बॉस की आवाज की हूबहू नकल कर कॉल करते हैं, जिससे व्यक्ति आसानी से भ्रमित हो जाता है। इसके अलावा, स्पूफ्ड ईमेल्स के जरिए भी ठगी की जा रही है, जिनमें ईमेल एड्रेस असली जैसा दिखता है, लेकिन उसमें मामूली बदलाव होता है। मेडिकल इमरजेंसी जैसे भावनात्मक बहाने बनाकर भी तुरंत पैसे ट्रांसफर कराने की कोशिश की जाती है।
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कैसे करें बचाव?
राजस्थान पुलिस ने नागरिकों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की सलाह दी है। यदि किसी नए नंबर से वरिष्ठ अधिकारी के नाम पर मैसेज या कॉल आता है, तो तुरंत उनके आधिकारिक नंबर पर संपर्क कर पुष्टि करें। केवल प्रोफाइल फोटो देखकर भरोसा न करें, क्योंकि इंटरनेट से किसी की भी तस्वीर आसानी से डाउनलोड की जा सकती है। किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या इमरजेंसी के दबाव में आकर वित्तीय लेनदेन न करें। पहले स्थिति की जांच करें और अपने वरिष्ठों या सहयोगियों से चर्चा करें। सबसे महत्वपूर्ण, OTP, बैंक डिटेल्स या निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

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कहां करें शिकायत?
यदि आपके साथ ऐसी कोई घटना होती है या ठगी की कोशिश की जाती है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर संपर्क किया जा सकता है। ऑनलाइन शिकायत www.cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सतर्कता और समय पर पुष्टि ही इस तरह के साइबर अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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