बीकानेर-कोटा प्रसूता प्रकरण: कई महिलाएं अब भी गंभीर, दवाओं की जांच रिपोर्ट का इंतजार
बीकानेर और कोटा के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत और गंभीर बीमारियों के मामलों की जांच जारी है। कई महिलाएं अब भी गंभीर हालत में हैं, जबकि 27 दवाओं की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
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राजस्थान के बीकानेर और कोटा के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत और गंभीर रूप से बीमार होने के मामलों की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। दोनों शहरों में कई महिलाएं अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। कुछ मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और वे डायलिसिस व वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग को दवाओं के नमूनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसव के बाद गंभीर रूप से बीमार हुई छह महिलाओं में से दो की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि शारदा की स्थिति सबसे गंभीर है। उसे दिमाग की नसों में खून के थक्के जमने की बीमारी (सीवीटी) हो गई है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसका उपचार कर रही है।
दूसरी मरीज प्रीति का लगातार डायलिसिस किया जा रहा है। किडनी संबंधी जटिलताओं के साथ उसकी आंखों पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि इसकी पुष्टि उसके होश में आने के बाद ही हो सकेगी। वहीं, एक अन्य मरीज तारा की हालत में सुधार हुआ है और उसे जल्द अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है।
मामले की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज और अस्पताल स्तर पर गठित तीन समितियों ने अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में दिए गए सुझावों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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इधर, प्रसव और सिजेरियन डिलीवरी में इस्तेमाल होने वाली 27 दवाओं और इंजेक्शनों के नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी लंबित है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसी दवा की भूमिका महिलाओं की बिगड़ती हालत में रही या नहीं।
उधर, कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में भी पिछले महीने हुई प्रसूताओं की मौतों के बाद भर्ती कुछ महिलाएं अब तक गंभीर हालत में हैं। परिजनों का कहना है कि कई बार डायलिसिस होने के बावजूद मरीजों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मृत महिलाओं में शरीर के कई अंग एक साथ काम करना बंद करने (मल्टी ऑर्गन फेल्योर) और खून में थक्के बनने की गंभीर समस्या जैसी स्थिति बनी थी। इसक उनकाा ब्लड प्रेशर तेजी से गिर गया और किडनियां ठीक से काम नहीं कर पाईं। हालांकि यह समस्या क्यों हुई, इसकी असली वजह की अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई है ।
कोटा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. निलेश जैन ने बताया कि एम्स और जयपुर के एसएमएस अस्पताल के विशेषज्ञों की प्रारंभिक रिपोर्ट में इलाज में लापरवाही के प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि रिपोर्ट में समय पर पर्याप्त मॉनिटरिंग नहीं होने की संभावना जताई गई है। साथ ही दवाओं में एंडोटॉक्सिन संबंधी खामी की आशंका को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अंतिम जांच रिपोर्ट और दवाओं की लैब रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।