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Rajasthan :क्या पंचायत चुनाव टालने तैयारी हो गई? 31 जुलाई की डेडलाइन पर BJP नेता के बयान से क्यूं मचा बवाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Mon, 15 Jun 2026 07:41 AM IST
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सार

राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर विवाद बढ़ गया है। भाजपा नेता अरुण चतुर्वेदी के चुनाव नवंबर-दिसंबर में कराने वाले बयान पर संयम लोढ़ा ने हाईकोर्ट अवमानना की चेतावनी दी है।

31 July Deadline vs December Poll Claim: Arun Chaturvedi’s Statement Sparks Controversy
अरुण चतुर्वेदी के बयान पर संयम लोढ़ा ने दी अममानना की चेतावनी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार


राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी अपने पंचायत-निकाय चुनावों पर दिए अपने बयान को लेकर विवादों में आ गए हैं। चतुर्वेदी ने भीलवाड़ा में कहा कि पंचायत और निकाय चुनाव अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच कराए जाएंगे। उनके इस बयान के बाद पूर्व विधायक और हाईकोर्ट में चुनाव संबंधी याचिका दायर करने वाले संयम लोढ़ा ने इसे अदालत की अवमानना की श्रेणी का मामला बताते हुए कड़ी आपत्ति जाताई है और चतुर्वेदी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी भी दे डाली है। ऐसे में अब कहा जा रहा है कि क्या चतुर्वेदी बैठे-बिठाए 'पंचायती' करके किसी नई मुसिबत में फंस गए हैं? 

संयम लोढ़ा ने कहा कि डॉ. अरुण चतुर्वेदी एक संवैधानिक पद पर बैठे हुए हैं और उन्हें यह जानकारी होनी चाहिए कि राजस्थान हाईकोर्ट पहले ही सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई तक चुनाव कराने के निर्देश दे चुका है। ऐसे में नवंबर-दिसंबर में चुनाव कराने का बयान देना सरकार को अदालत के आदेशों की अनदेखी करने के लिए प्रेरित करने जैसा है।

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लोढ़ा ने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप का मामला है। उन्होंने चतुर्वेदी से अपना बयान वापस लेने और सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करने की मांग की कि हाईकोर्ट के आदेशों का सम्मान किया जाएगा और उनकी पालना सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 15 दिन के भीतर बयान वापस नहीं लिया गया तो उनके खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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आखिर विवाद की वजह क्या है?

दरअसल, राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव लंबे समय से लंबित हैं। इस मुद्दे पर दायर 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन निर्धारित समय तक चुनाव नहीं हो सके। सरकार ने अदालत में दलील दी कि ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया और आयोग की रिपोर्ट लंबित होने के कारण चुनाव कराना संभव नहीं है।

इसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार को अतिरिक्त समय देते हुए नई डेडलाइन 31 जुलाई 2026 तय की। साथ ही ओबीसी आयोग को 20 जून तक अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। अदालत ने साफ कहा कि आयोग की देरी चुनाव कराने में बाधा नहीं बन सकती और लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव अनिश्चितकाल तक नहीं टाले जा सकते।

चतुर्वेदी ने क्या कहा था?

भीलवाड़ा में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने कहा था कि सरकार और ओबीसी आयोग युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद "एक प्रदेश-एक चुनाव" की अवधारणा के तहत पंचायत और निकाय चुनाव अक्टूबर से दिसंबर के बीच कराए जाएंगे। हालांकि बाद में उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव कार्यक्रम घोषित करना राज्य निर्वाचन आयोग का अधिकार है।

विपक्ष पहले से लगा रहा है चुनाव टालने के आरोप

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि भाजपा सरकार जानबूझकर पंचायत और निकाय चुनावों को टाल रही है। विपक्ष का दावा है कि सरकार संभावित राजनीतिक नुकसान और "वन स्टेट-वन इलेक्शन" की रणनीति के चलते स्थानीय निकाय चुनावों में देरी कर रही है। वहीं सरकार का कहना है कि आरक्षण प्रक्रिया पूरी किए बिना चुनाव कराना कानूनी रूप से संभव नहीं है।

 

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