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बीजेपी में कौन कर रहा था खेल? अंता उपचुनाव में करारी हार पर जांच शुरू

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Mon, 09 Feb 2026 05:24 PM IST
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सार

अंता उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी में अंदरूनी कलह बढ़ गई है। पराजित प्रत्याशी मोरपाल सुमन द्वारा लिखा पत्र सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। सुमन ने पत्र लीक करने से इनकार किया। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने जांच शुरू कर दी है और विधायकों से पूछताछ की जा रही है।

BJP Faces Infighting After Anta Bypoll Defeat
अंता उप चुनाव के दौरान मोरपाल सुमन
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विस्तार

अंता उपचुनाव में करारी हार के बाद बीजेपी के भीतर घमासान मचा हुआ है। हार की वजह जानने के लिए शुरू हुई जांच अब पार्टी के लिए नई मुसीबत बनती नजर आ रही है। पराजित प्रत्याशी मोरपाल सुमन के एक पत्र ने बीजेपी की अंदरूनी कलह को सार्वजनिक कर दिया है। अंता विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के बाद बीजेपी में मंथन जारी है। चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे पार्टी प्रत्याशी मोरपाल सुमन ने प्रदेश नेतृत्व को एक पत्र लिखकर अपनी हार के लिए पार्टी के ही नेताओं और पदाधिकारियों पर भीतरघात के आरोप लगाए। यही पत्र बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और विवाद गहरा गया।

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पत्र के वायरल होने के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने मोरपाल सुमन को कारण बताओ नोटिस जारी किया। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए तीन दिन में जवाब मांगा। जवाब में सुमन ने कहा कि पत्र उन्होंने मीडिया में लीक नहीं किया, बल्कि एक स्थानीय विधायक ने इसे सार्वजनिक किया।मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने अंदरूनी जांच शुरू कर दी है। एक प्रदेश पदाधिकारी को जांच सौंपी गई, जिसने बारां जिले के बीजेपी विधायकों से पूछताछ की। विधायकों ने पत्र लीक करने से इनकार किया है। अब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष खुद मैदान में उतर रहे हैं। मदन राठौड़ जल्द ही बारां जिले के तीन बीजेपी विधायक प्रताप सिंह सिंघवी, ललित मीणा और राधेश्याम बैरवा से मुलाकात करेंगे। इसके साथ ही अंता उपचुनाव के प्रभारियों और जिला अध्यक्ष से भी बातचीत होगी।
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गौरतलब है कि विवाद यहीं नहीं थमता। मोरपाल सुमन ने अपने पत्र में स्थानीय विधायकों के साथ-साथ एक कैबिनेट मंत्री पर भी भीतरघात का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं, उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की टीम और कई स्थानीय नेताओं पर भी प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से चुनाव में विरोध करने के आरोप लगाए। इससे पहले बारां विधायक प्रताप सिंह सिंघवी भी प्रदेश नेतृत्व को पत्र लिखकर चुनाव प्रचार से खुद को दूर रखे जाने की शिकायत कर चुके हैं। ऐसे में अंता उपचुनाव की हार बीजेपी के लिए केवल चुनावी झटका नहीं, बल्कि संगठनात्मक चुनौती बनती दिख रही है। फिलहाल बीजेपी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब सबकी नजरें पार्टी की अनुशासन समिति के फैसले पर टिकी हैं। सवाल यही है- क्या यह जांच बीजेपी की अंदरूनी कलह को शांत कर पाएगी, या आने वाले दिनों में विवाद और बढ़ेगा?

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