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Rajasthan Panchayat Polls: क्या पंचायत चुनाव टलने पर फिर घिरेगी सरकार ? हाईकोर्ट में कंटेम्प्ट याचिका दाखिल

Mon, 06 Jul 2026 03:35 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Mon, 06 Jul 2026 03:35 PM IST
सार

हाईकोर्ट के 31 जुलाई तक पंचायत चुनाव कराने के आदेश के बावजूद कार्यक्रम घोषित नहीं होने पर संयम लोढ़ा ने अवमानना याचिका दायर की। सरकार और निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है।

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Contempt Plea Filed in Rajasthan High Court Over Delay in Panchayat Polls
राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार


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राजस्थान में पंचायत चुनाव की लड़ाई एक बार फिर हाईकोर्ट के दरवाजे पहुंच गई है। हाईकोर्ट ने 22 मई 2026 को दिए अपने फैसले में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि  ग्राम पंचायतों और नगर निकायों सहित सभी स्थानीय निकायों के चुनाव 31 जुलाई 2026 तक संपन्न कराए जाएं।
लेकिन राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग के स्तर पर अब तक चुनावों की तारीखों का ऐलान नहीं किया गया है। ऐसे में याचिकाकर्ता संयम लोढ़ा की तरफ से अधिवक्ता पुनीत सिंघवी ने सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में अवमानना (कंटेम्प्ट) याचिका दायर की है। याचिका में राज्य निर्वाचन आयोग, पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग के चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। 
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22 मई को हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी निर्देश दिए थे कि नगरीय निकायों में वार्डों के परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य 20 जून 2026 तक पूरा किया जाए।   राज्य सरकार में शहरी निकायों के प्रशानिक विभाग स्वायत्त शासन ने 15 जून को ओबीसी आयोग के सचिव को चिट्ठी लिखकर नगरीय निकायों में अति पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से संबंध में सूचना उपलब्ध करवाने के लिए कहा था।
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इस चिट्ठी में कहा गया कि विभाग द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग को राजस्थान नगरपालिका (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 5 व 6 के अनुसार विभिन्न वर्गों यथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं महिला वर्ग के पदों के आरक्षण की सूचना पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही प्रेषित की जा सकेगी। सूत्रों के अनुसार ओबीसी आयोग ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए सरकार से जो आंकड़े मांगे थे वह सरकार की तरफ से कंप्लीट नहीं किए गए।

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याचिका में कहा गया है कि अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट कर दिया था कि राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना चुनाव कराए जाएं और आयोग की रिपोर्ट में देरी चुनाव टालने का आधार नहीं बन सकती। इसके बावजूद राज्य सरकार और संबंधित विभाग लगातार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तथा ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया का हवाला देते रहे।


याचिका के अनुसार 1 जून, 15 जून, 16 जून और 23 जून 2026 के बीच राज्य निर्वाचन आयोग, पंचायती राज विभाग, स्वायत्त शासन विभाग और ओबीसी आयोग के बीच हुए आधिकारिक पत्राचार से स्पष्ट है कि अधिकारी चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बजाय ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करते रहे। जबकि हाईकोर्ट पहले ही इस आधार को अस्वीकार कर चुका था।

याचिकाकर्ता ने कहा है कि संबंधित अधिकारियों का यह रवैया हाईकोर्ट के स्पष्ट और बाध्यकारी आदेशों की जानबूझकर अवहेलना है, जो अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(बी) और धारा 12 के तहत सिविल कंटेम्प्ट की श्रेणी में आता है।






 
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