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Rajasthan: 'साहब मां-बाप बीमार हैं..', 'पत्नी दूसरे जिले में है'.. तबादले के लिए कर्मचारियों ने लिखीं अर्जियां

Tue, 07 Jul 2026 05:42 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Tue, 07 Jul 2026 05:42 PM IST
सार

राजस्थान में तबादलों की प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों की ओर से ऐसी-ऐसी अर्जियां सामने आई हैं, जिनमें पारिवारिक मजबूरियों से लेकर स्वास्थ्य, बच्चों की पढ़ाई और पति-पत्नी के साथ रहने तक के तर्क दिए गए हैं। 

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From Sick Parents to Children's Education: Emotional Appeals Dominate Rajasthan Transfer Requests
तबादलों को लेकर मंत्रियों के बंगलों पर भीड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 राजस्थान में तबादलों की कवायद के बीच कर्मचारियों की अर्जियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। कोई बीमार माता-पिता की सेवा का हवाला देकर तबादला मांग रहा है, तो कोई गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिजन की देखभाल के लिए अपने गृह जिले में पोस्टिंग चाहता है। कई कर्मचारियों ने पति-पत्नी के अलग-अलग जिलों में तैनात होने की मजबूरी बताई है, जबकि कुछ ने छोटे बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों को आधार बनाया है।

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तबादले के लिए लगाई कैसी-कैसी अर्जी

तबादले के लिए कर्मचारियों ने सबसे अधिक माता-पिता की गंभीर बीमारी और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी का हवाला दिया है। कई कर्मचारियों ने पति-पत्नी के अलग-अलग जिलों में कार्यरत होने के कारण एक ही स्थान पर पदस्थापन की मांग की है।

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बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने को भी प्रमुख आधार बनाया गया है। कुछ कर्मचारियों ने स्वयं या परिवार के किसी सदस्य की गंभीर बीमारी का उल्लेख किया है, जबकि कई ने गृह जिले या उसके निकट पदस्थापन की मांग की है।
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इसके अलावा दिव्यांग या गंभीर रूप से बीमार परिजनों की देखभाल की जिम्मेदारी को भी तबादले का महत्वपूर्ण कारण बताया गया है।इन आवेदनों के साथ जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की सिफारिशी चिट्ठियां भी बड़ी संख्या में लगाई गई हैं।

गौरतलब है कि तबादलों से प्रतिबंध हटाने के साथ राज्य सरकार ने तबादला प्रक्रिया में कुछ श्रेणियों के कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। इनमें एकल, विधवा और परित्यक्ता महिला कर्मचारी, दिव्यांग कर्मचारी, गंभीर या जानलेवा बीमारियों से पीड़ित कर्मचारी, पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने पर स्पाउस केस तथा लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों को वरीयता दी जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही गंभीर बीमारी के मामलों में सक्षम मेडिकल बोर्ड का प्रमाणपत्र की अनिवार्यता भी नहीं रखी गई है।

यह भी पढें- Rajasthan Government Transfers: तबादला सूची तैयार, CMO की सख्ती से लंबी लिस्ट पर ब्रेक, टुकड़ों में होंगी जारी

तबादलों की समय-सीमा बढ़ने के बाद सचिवालय, मंत्री आवासों और जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों में कर्मचारियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। अब विभागीय स्तर पर इन आवेदनों और सिफारिशों के आधार पर तबादला आदेश जारी होने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

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