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Rajasthan Congress News:कांग्रेस के भीतर 'कई कांग्रेस'! गहलोत-पायलट के बाद क्या डोटासरा बनेंगे नया फ्रंट ?
Sat, 01 Aug 2026 04:33 PM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Sat, 01 Aug 2026 04:33 PM IST
सार
राजस्थान कांग्रेस में डोटासरा, गहलोत और पायलट खेमों की सक्रियता खुलकर सामने आ गई है। बयानबाजी, सोशल मीडिया और यूथ कांग्रेस चुनावों ने निकाय-पंचायत चुनाव से पहले गुटबाजी बढ़ा दी है।
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राजस्थान कांग्रेस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कांग्रेस के लिए कहावत मशहूर है कि कांग्रेस के भीतर कई कांग्रेस चलती है। राजस्थान कांग्रेस में भी गुटबाजी का लंबा इतिहास रहा है। पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में गहलोत और पायलट खेमों की लड़ाई बाड़ाबंदी तक पहुंची थी... अब मौजूदा वक्त में एक बार फिर से कांग्रेस की खेमाबंदी खुलकर सामने आने लगी है। इस बार कांग्रेस में एक नया फ्रंट नजर आ रहा है, वह है प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का। 'बाप' पार्टी से आए नेताओं की कांग्रेस में जॉइनिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद संगठन में पर्सनल ब्राडिंग से लेकर "ऐरे-गैरे नत्थू-खैरे' जैसे बयानों तक जा पहुंचा।
'ऐरे-गैरे' बयान से खुली नई जंग
दो दिन पहले पूर्व सीएम अशोक गहलोत के सरकारी आवास पर बाप नेताओं की कांग्रेस में ज्वाइनिंग करवाए जाने के मामले पर डोटासरा भड़क गए। उन्होंने इस मामले पर यहां तक कह दिया कि जो लोग अपनी "सेल्फ ब्रांडिंग" के लिए काम करते हैं, वे उन्हें मुबारक हो। महेंद्रजीत सिंह मालवीय के कांग्रेस में शामिल होने के मुद्दे पर डोटासरा ने कहा कि उनकी सिफारिश के बिना मालवीय की कांग्रेस में वापसी नहीं हो सकती थी, लेकिन उन्हें (मालवीय को) समझने की जरूरत है कि व्यक्ति से बड़ी कांग्रेस पार्टी है।
डोटासरा का बयान सियासी हलकों में तेजी से वायरल हुआ तो गहलोत की प्रतिक्रिया भी सामने आई। गहलोत ने कहा-"बीएपी के लोगों ने मिलने की जिद पकड़ ली थी. जब मालवीयाजी ने बार-बार कहा तो फिर मैंने कहा कि ठीक है, आप मिला दीजिए। मुझसे भी मिलने आए थे, उन्होंने खुद पीसीसी अध्यक्ष से भी टाइम लिया था और बताया था कि हम वहां भी जाकर आशीर्वाद लेंगे, मिल लेंगे। ना ज्वाइनिंग की थी, ना चर्चा हुई ज्वाइनिंग की। वो तो कार्यकर्ता थे और ज्वाइनिंग नेताओं की होती है।"
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सोशल मीडिया पर भिडंत शुरू
राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। बाप पार्टी से आए नेताओं की कांग्रेस में जॉइनिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी और सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयान के बाद अब कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष संदीप चौधरी की सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी हलचल और तेज कर दी है।दरअसल, गुरुवार को जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बिना किसी का नाम लिए कहा था, राहुल जी ने मुझसे कहा था कि डोटासरा और जूली, तुम लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हो। अब मुझे किसी ऐरे-गैरे नत्थू-खैरे से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। जब मेरा नेता यह कह रहा है, तो मैं भी यही उम्मीद करता हूं।" डोटासरा का यह बयान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर परोक्ष निशाना माना गया।
अब शुक्रवार को कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष संदीप चौधरी ने भी बिना किसी का नाम लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पलटवार किया। उन्होंने लिखा, "ऐरे-गैरे नत्थू-खैरे कुछ बन जाते हैं तो पागल हो जाते हैं।" राजनीतिक गलियारों में इस पोस्ट को डोटासरा के बयान का जवाब माना जा रहा है।
संदीप चौधरी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी समर्थकों में गिने जाते हैं। वे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के भी नजदीकी माने जाते हैं। गहलोत सरकार के दौरान उन्हें बंजर भूमि विकास बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था और राज्यमंत्री का दर्जा भी दिया गया था।
यूथ कांग्रेस चुनाव बना शक्ति प्रदर्शन का मंच
पार्टी में इसी साल गुटबाजी के कई वाकये सामने आ चुके हैं। राजस्थान यूथ कांग्रेस चुनाव ने भी अंदरूनी गुटबाजी को और उजागर किया था। प्रदेश अध्यक्ष समेत विभिन्न पदों के लिए नामांकन भी वर्चस्व की लड़ाई बनते नजर आए थे। पायलट खेमे में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अनिल चौपड़ा , डोटासरा समर्थक खेमे में अभिषेक चौधरी, और संदीप चौधरी गुट से राजेंद्र फरसवाल ने चुनाव लड़ा। अभी वोटों की स्क्रूटनी का काम चल रहा है। लेकिन इन चुनावों में भी पार्टी में गुटबाजी खुलकर सामने आई थी।
कार्यक्रम भी अलग-अलग, संदेश भी अलग
21 जुलाई को राहुल गांधी के समर्थन में जयपुर में कांग्रेस के प्रदर्शन में अशोक गहलोत, गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली सहित कई नेता मौजूद रहे, लेकिन सचिन पायलट इसमें शामिल नहीं हुए। अगले ही दिन पायलट ने संविधान क्लब में छात्रों के मुद्दे पर अलग कार्यक्रम किया, जिसके पोस्टरों में प्रदेश कांग्रेस के किसी बड़े नेता की तस्वीर नहीं थी।
चुनाव से पहले संगठन के सामने चुनौती
20 अगस्त से राजस्थान विधानसभा का मानूसन सत्र भी शुरू होने जा रहा है। इसके बाद राजस्थान में पंचातय और निकाय चुनावों का दौर चलेगा। सितंबर से निकायों के चुनाव होंगे और अक्टूबर में पंचायतों के। ऐसे समय में कांग्रेस के भीतर सामने आ रही गुटबाजी की खबरें विपक्षी भाजपा को राजनीतिक मुद्दा देने का काम कर सकती हैं। ऐसे में संगठन के भीतर जारी खींचतान और अलग-अलग खेमों की सक्रियता टिकट वितरण के दौरान और खुलकर सामने आ सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते पार्टी नेतृत्व ने मतभेदों को नहीं साधा, तो चुनावी तैयारियों के बीच टिकटों को लेकर गुटबाजी और तेज होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इनका कहना है-
कांग्रेस के भीतर कई कांग्रेस है लेकिन बीजेपी के भीतर कई बीजेपी है। लेकिन पिछले 5-7 साल है बीजेपी ने अपनी इंटरनल फाइट को कंट्रोल किया है। कई प्रमुख नेताओं को इधर-उधर कर दिया। ओम माथुर, गुलाबचंद कटारिया, वसुंधरा राजे जैसे नेता बीजेपी में है। लेकिन बीजेपी सत्ता में है इसलिए उसके पास देने के लिए अच्छे पद हैं। लेकिन कांग्रेस सत्ता में रहते हुए भी यह नहीं कर पाती। बीजेपी में सरकार पर सवाल उठाने वाले लोग हो सकते हैं। लेकिन इंटरनल विभाजन पहले जैसा नहीं है।
कांग्रेस में पहले गहलोत-सीपी जोशी गुट, दूसरी बार गहलोत और पायलट गुट और अब इसमें डोटासरा भी जुड़ गया। खास बात यह है कि अशोक गहलोत ने जब सचिन पायलट के लिए कुछ कहा तो पायलट ने बेहद सधे अंदाज में जवाब दिया लेकिन अब तक ऐरे गैरे नथ्थू खैरे शब्द का इसतेमाल किसी ने नहीं किया था। महेंद्रजीत मालवीय जब आए तो अशोक गहलोत से मिलने गए थे पीसीसी पहुंचे तो जो कमेंट आए उस पर अशोक गहलोत ने कहा कि डोटासरा मेरे लिए ऐसा नहीं कहा होगा। लेकिन जिन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल किया उनकी तरफ से अब तक इसका कोइ खंडन नहीं हुआ है। इससे लगता है कि डोटासरा तीसरी ताकत बनने की कोशिश में है।
राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार- त्रिभुवन
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'ऐरे-गैरे' बयान से खुली नई जंग
दो दिन पहले पूर्व सीएम अशोक गहलोत के सरकारी आवास पर बाप नेताओं की कांग्रेस में ज्वाइनिंग करवाए जाने के मामले पर डोटासरा भड़क गए। उन्होंने इस मामले पर यहां तक कह दिया कि जो लोग अपनी "सेल्फ ब्रांडिंग" के लिए काम करते हैं, वे उन्हें मुबारक हो। महेंद्रजीत सिंह मालवीय के कांग्रेस में शामिल होने के मुद्दे पर डोटासरा ने कहा कि उनकी सिफारिश के बिना मालवीय की कांग्रेस में वापसी नहीं हो सकती थी, लेकिन उन्हें (मालवीय को) समझने की जरूरत है कि व्यक्ति से बड़ी कांग्रेस पार्टी है।
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डोटासरा का बयान सियासी हलकों में तेजी से वायरल हुआ तो गहलोत की प्रतिक्रिया भी सामने आई। गहलोत ने कहा-"बीएपी के लोगों ने मिलने की जिद पकड़ ली थी. जब मालवीयाजी ने बार-बार कहा तो फिर मैंने कहा कि ठीक है, आप मिला दीजिए। मुझसे भी मिलने आए थे, उन्होंने खुद पीसीसी अध्यक्ष से भी टाइम लिया था और बताया था कि हम वहां भी जाकर आशीर्वाद लेंगे, मिल लेंगे। ना ज्वाइनिंग की थी, ना चर्चा हुई ज्वाइनिंग की। वो तो कार्यकर्ता थे और ज्वाइनिंग नेताओं की होती है।"
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सोशल मीडिया पर भिडंत शुरू
राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। बाप पार्टी से आए नेताओं की कांग्रेस में जॉइनिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी और सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयान के बाद अब कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष संदीप चौधरी की सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी हलचल और तेज कर दी है।दरअसल, गुरुवार को जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बिना किसी का नाम लिए कहा था, राहुल जी ने मुझसे कहा था कि डोटासरा और जूली, तुम लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हो। अब मुझे किसी ऐरे-गैरे नत्थू-खैरे से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। जब मेरा नेता यह कह रहा है, तो मैं भी यही उम्मीद करता हूं।" डोटासरा का यह बयान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर परोक्ष निशाना माना गया।
अब शुक्रवार को कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष संदीप चौधरी ने भी बिना किसी का नाम लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पलटवार किया। उन्होंने लिखा, "ऐरे-गैरे नत्थू-खैरे कुछ बन जाते हैं तो पागल हो जाते हैं।" राजनीतिक गलियारों में इस पोस्ट को डोटासरा के बयान का जवाब माना जा रहा है।
संदीप चौधरी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी समर्थकों में गिने जाते हैं। वे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के भी नजदीकी माने जाते हैं। गहलोत सरकार के दौरान उन्हें बंजर भूमि विकास बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था और राज्यमंत्री का दर्जा भी दिया गया था।
यूथ कांग्रेस चुनाव बना शक्ति प्रदर्शन का मंच
पार्टी में इसी साल गुटबाजी के कई वाकये सामने आ चुके हैं। राजस्थान यूथ कांग्रेस चुनाव ने भी अंदरूनी गुटबाजी को और उजागर किया था। प्रदेश अध्यक्ष समेत विभिन्न पदों के लिए नामांकन भी वर्चस्व की लड़ाई बनते नजर आए थे। पायलट खेमे में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अनिल चौपड़ा , डोटासरा समर्थक खेमे में अभिषेक चौधरी, और संदीप चौधरी गुट से राजेंद्र फरसवाल ने चुनाव लड़ा। अभी वोटों की स्क्रूटनी का काम चल रहा है। लेकिन इन चुनावों में भी पार्टी में गुटबाजी खुलकर सामने आई थी।
कार्यक्रम भी अलग-अलग, संदेश भी अलग
21 जुलाई को राहुल गांधी के समर्थन में जयपुर में कांग्रेस के प्रदर्शन में अशोक गहलोत, गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली सहित कई नेता मौजूद रहे, लेकिन सचिन पायलट इसमें शामिल नहीं हुए। अगले ही दिन पायलट ने संविधान क्लब में छात्रों के मुद्दे पर अलग कार्यक्रम किया, जिसके पोस्टरों में प्रदेश कांग्रेस के किसी बड़े नेता की तस्वीर नहीं थी।
चुनाव से पहले संगठन के सामने चुनौती
20 अगस्त से राजस्थान विधानसभा का मानूसन सत्र भी शुरू होने जा रहा है। इसके बाद राजस्थान में पंचातय और निकाय चुनावों का दौर चलेगा। सितंबर से निकायों के चुनाव होंगे और अक्टूबर में पंचायतों के। ऐसे समय में कांग्रेस के भीतर सामने आ रही गुटबाजी की खबरें विपक्षी भाजपा को राजनीतिक मुद्दा देने का काम कर सकती हैं। ऐसे में संगठन के भीतर जारी खींचतान और अलग-अलग खेमों की सक्रियता टिकट वितरण के दौरान और खुलकर सामने आ सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते पार्टी नेतृत्व ने मतभेदों को नहीं साधा, तो चुनावी तैयारियों के बीच टिकटों को लेकर गुटबाजी और तेज होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इनका कहना है-
कांग्रेस के भीतर कई कांग्रेस है लेकिन बीजेपी के भीतर कई बीजेपी है। लेकिन पिछले 5-7 साल है बीजेपी ने अपनी इंटरनल फाइट को कंट्रोल किया है। कई प्रमुख नेताओं को इधर-उधर कर दिया। ओम माथुर, गुलाबचंद कटारिया, वसुंधरा राजे जैसे नेता बीजेपी में है। लेकिन बीजेपी सत्ता में है इसलिए उसके पास देने के लिए अच्छे पद हैं। लेकिन कांग्रेस सत्ता में रहते हुए भी यह नहीं कर पाती। बीजेपी में सरकार पर सवाल उठाने वाले लोग हो सकते हैं। लेकिन इंटरनल विभाजन पहले जैसा नहीं है।
कांग्रेस में पहले गहलोत-सीपी जोशी गुट, दूसरी बार गहलोत और पायलट गुट और अब इसमें डोटासरा भी जुड़ गया। खास बात यह है कि अशोक गहलोत ने जब सचिन पायलट के लिए कुछ कहा तो पायलट ने बेहद सधे अंदाज में जवाब दिया लेकिन अब तक ऐरे गैरे नथ्थू खैरे शब्द का इसतेमाल किसी ने नहीं किया था। महेंद्रजीत मालवीय जब आए तो अशोक गहलोत से मिलने गए थे पीसीसी पहुंचे तो जो कमेंट आए उस पर अशोक गहलोत ने कहा कि डोटासरा मेरे लिए ऐसा नहीं कहा होगा। लेकिन जिन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल किया उनकी तरफ से अब तक इसका कोइ खंडन नहीं हुआ है। इससे लगता है कि डोटासरा तीसरी ताकत बनने की कोशिश में है।
राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार- त्रिभुवन